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सपा सांसद आजम खान को बड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी के दो भवन सीज
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News18 Uttar Pradesh
Updated: January 22, 2020, 5:49 PM IST
सपा सांसद आजम खान को बड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी के दो भवन सीज
रामपुर प्रशासन ने सांसद आजम खान के जौहर ट्रस्ट से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है (फाइल फोटो)

बता दें राजस्व परिषद ने पूर्व कमिश्नर के आदेश को खारिज करते हुए प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है. जिसके तहत जौहर ट्रस्ट की ओर से बनवाए गए जाैहर विश्वविद्यालय के कब्जे से दलितों की 104 बीघा जमीन वापस होगी.

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रामपुर. उत्तर प्रदेश शासन (UP Government) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के दिग्गज नेता और रामपुर (Rampur) से सांसद आजम खान (Azam Khan) के जौहर ट्रस्ट (Jauhar Trust) मामले में एक्शन शुरू कर दिया है. शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जौहर यूनिवर्सिटी से जमीन वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है. बुधवार को भारी पुलिस बल के साथ जिला प्रशासन यूनिवर्सिटी पहुंचा और नपाई शुरू की और जौहर यूनिवर्सिटी के दो भवन सीज कर दिए.

दरअसल आजम खान पर श्रम विभाग का 1 करोड़ 37 लाख रुपये सेस का बकाया था. जमा न करने पर श्रम विभाग ने आरसी जारी थी. भवन की कीमत का अनुमान लगाकर जौहर यूनिवर्सिटी के दो भवन सीज कर दिए गए.

बता दें कि पिछले दिनों जौहर विश्वविद्यालय के लिए दलितों की जमीन नियम विरुद्ध खरीदने में फंसे एसपी सांसद और यूनिविर्सिटी के चांसलर मोहम्मद आजम खान को राजस्व परिषद से बड़ा झटका लगा था. राजस्व परिषद ने पूर्व कमिश्नर के आदेश को खारिज करते हुए प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है. जिसके तहत जौहर ट्रस्ट की ओर से बनवाए गए इस विश्वविद्यालय के कब्जे से दलितों की 104 बीघा जमीन वापस होगी.

बिना DM की अनुमति के विश्वविद्यालय के नाम करा दी जमीन

छह मार्च, 2018 में तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) ने पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ राजस्व परिषद प्रयागराज में 10 निगरानी वाद दायर कराए थे. आजम पर आरोप था कि उन्होंने दलितों की लगभग 104 बीघा जमीन कलेक्टर की अनुमति के बगैर ही विश्वविद्यालय के नाम दर्ज करवाई है. डीएम ने यह कार्रवाई बीजेपी लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश कुमार सक्सेना द्वारा मुख्यमंत्री से की गई शिकायत की जांच के बाद की थी.

कानून का खुलेआम उल्लंघन किया गया
आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अनुसूचित जाति के लोगों की यह जमीन तहसील सदर के ग्रामसभा सीगनखेड़ा में थी. वर्ष 2007 में इनके नाम सीलिंग पट्टेदार के रूप में अंकित थे लेकिन राजस्व अभिलेखों में वो संक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं हुए थे. इनकी भूमि की खरीद में नियम विरुद्ध कार्य किया गया. अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम पर पट्टा होने के कारण इस जमीन को सामान्य श्रेणी के विश्वविद्यालय को नहीं बेचा जा सकता था. जमीन की खरीद में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 का उल्लंघन किया गया.दोनों पक्षों को सुनने के बाद राजस्व परिषद ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया. न्यायालय राजस्व परिषद ने मुरादाबाद के पूर्व में कमिश्नर द्वारा आजम के पक्ष में किए गए आदेश को खारिज कर दिया. परिषद ने निगरानियों को सही करार करते हुए विक्रय पत्र को आधारहीन बताया.

(इनपुट: विशाल सक्सेना)

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First published: January 22, 2020, 4:56 PM IST
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