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आजम का जेल से बाहर आने का इंतजार बढ़ा, इलाहाबाद HC ने ढाई घंटे की बहस के बाद सुरक्षित रखा फैसला

आजम खान की जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में  सुनवाई पूरी हो गई है.

आजम खान की जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है.

Azam Khan News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी विधायक आजम खान की जमानत अर्जी पर ढाई घंटे चली बहस के बाद फैसला सुरिक्षत रख लिया है. बता दें कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति के इस मामले में अगर उनकी जमानत मंजूर होती है, तो वह जेल से बाहर आ जाएंगे.

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प्रयागराज/रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सपा विधायक मोहम्मद आजम खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला रिजर्व कर लिया है. कोर्ट इस मामले में अगले हफ्ते में अपना फैसला सुनाएगी. जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की सिंगल बेंच ने करीब ढाई घंटे चली लंबी बहस के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला रिजर्व कर लिया है. साफ है कि आजम खान को हाईकोर्ट से आज कोई राहत नहीं मिल सकी है, इसलिए उन्हें अभी भी जेल में ही रहना होगा.

गौरतलब है कि मोहम्मद आजम खान के खिलाफ कुल 87 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिनमें से 86 मामलों में आजम खान को जमानत मिल चुकी है. उनके खिलाफ आखिरी मामला शत्रु संपत्ति से जुड़ा हुआ है. इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही थी. इससे पहले 4 दिसंबर 2021 को हाई कोर्ट ने इस मामले में बहस पूरी होने के बाद जजमेंट रिजर्व कर लिया था, लेकिन करीब 4 महीने तक इस मामले में फैसला ना आने के बाद यूपी की योगी सरकार ने हाईकोर्ट में अर्जेंसी एप्लीकेशन और सप्लीमेंट्री दाखिल की. सरकार ने कोर्ट से मांग की कि इस मामले में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं जिन्हें वह कोर्ट में पेश करना चाहती है. कोर्ट ने राज्य सरकार की अर्जी स्वीकार करने के बाद इस मामले में दोबारा सुनवाई शुरू की. जबकि 4 मई और 5 मई (दो दिन) तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है. आजम खान के वकील ने कहा है कि राज्य सरकार कोर्ट में कुछ नए तथ्य नहीं पेश कर पाई बल्कि उन्हीं मामलों को कोर्ट में दोबारा उठाया गया जो मामले पहले से चार्जशीट में शामिल थे.

जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की सिंगल बेंच में दो दिनों तक चली सुनवाई में आजम खान के वकीलों ने उनके ऊपर दर्ज कराए गए मुकदमे को गलत बताया और कहा कि सभी मुकदमे राजनीति से प्रेरित होकर दर्ज कराए गए हैं और 86 मुकदमों में अब तक उन्हें जमानत भी मिल चुकी है, इसलिए इस मुकदमे में भी जमानत मिलनी चाहिए. वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने जमानत अर्जी का विरोध किया और शत्रु संपत्ति की जमीन ट्रस्ट में फर्जी दस्तावेज के आधार पर शामिल करने की बात कही. हालांकि आजम खान के वकीलों ने कोर्ट में बताया कि वर्ष 2014 में जमीन बीएसएफ को दे दी गई थी और इस मामले में केस हुआ था. इस मामले में कोर्ट में स्टे है. 2015 में शिया वक्फ बोर्ड ने भी इस जमीन पर दावा किया. इस मामले में भी हाई कोर्ट से स्टे है. जबकि राज्य सरकार इसे शत्रु संपत्ति बताते हुए सरकार को कस्टोडियन बता रही है.

आजम खान के अधिवक्ताओं ने दलील दी की इस मामले में जमानत के पर्याप्त आधार हैं, इसलिए उनको जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए. आजम खान के वकील कमरुल हसन सिद्दीकी के मुताबिक, शत्रु संपत्ति से जुड़े इस आखिरी मामले में अगर आजम खान को जमानत मिलती है, तो उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो जाएगा. सपा विधायक के खिलाफ शत्रु संपत्ति से जुड़े इस मामले में अगस्त 2019 में रामपुर के अजीम नगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था. इस मामले में विवेचना के बाद चार्जशीट भी दाखिल हो गई है.

आजम की रिहाई पर जमकर सियासत
बहरहाल, आजम खान पिछले दो साल से सीतापुर जेल में बंद हैं और उनकी रिहाई को लेकर यूपी का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. पिछले दिनों सपा विधायक के मीडिया सलाहकार फसाहत अली ने अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि सपा प्रमुख नहीं चाहते की आजम खान जेल से बाहर आएं. यही नहीं, इसके बाद रामपुर विधायक के कई समर्थकों ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद प्रसपा चीफ शिवपाल सिंह यादव ने भी अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव पर आरोप लगा दिया कि दोनों नेता आजम खान के साथ खड़े होते तो वह जेल से बाहर होते. इसके साथ वह सीतापुर जेल में आजम से मिले और कहा कि मैं हमेश उनके साथ खड़ा हूं. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि जब वह जेल से बाहर आएंगे तब हम यूपी में नया मोर्चा बनाने के बारे में फैसला करेंगे. वहीं, अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव की रामपुर विधायक से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने अपनी चुप्‍पी तोड़ते कहा कि सपा आजम खान के साथ है और हम उनको रिहा कराने के लिए सड़कों पर उतरेंगे.

Tags: Akhilesh yadav, Allahabad high court, Azam Khan Bail Application, Shivpal singh yadav

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