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UP Election: NDA ने 2014 के बाद मुस्लिम प्रत्‍याशी पर खेला दांव, पहले कांग्रेस ने दी थी टिकट, जानिए पूरा मामला

UP Election: NDA ने 2014 के बाद मुस्लिम प्रत्‍याशी पर खेला दांव, पहले कांग्रेस ने दी थी टिकट, जानिए पूरा मामला

हैदर अली खान के पिता नवाब काजिम अली चार बार विधायक रहे हैं. (फोटो-हैदर अली खान फेसबुक)

हैदर अली खान के पिता नवाब काजिम अली चार बार विधायक रहे हैं. (फोटो-हैदर अली खान फेसबुक)

UP Election 2022: यूपी विधानसभा चुनाव में सियासी दांव पेच का खेल जारी है. इस बीच भाजपा के गठबंधन सहयोगी अपना दल (एस) की प्रमुख और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से कांग्रेस की दिग्गज नेता नूर बानो के पौते हैदर अली खान (Haider Ali Khan) को मैदान में उतारा है. यही नहीं, भाजपा के खेमे के किसी दल ने 2014 के बाद किसी मुस्लिम प्रत्‍याशी पर दांव लगाया है. बता दें कि कांग्रेस ने हैदर अली खान को 13 जनवरी को जारी अपनी पहली लिस्‍ट में प्रत्‍याशी घोषित किया था, लेकिन उन्‍होंने पाला बदलकर अपना दल का दामन थाम लिया. अब उनका मुकाबला आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) से होगा. बता दें कि नवाब परिवार और आजम खान के बीच राजनीतिक अदावत पिछले काफी समय से चली आ रही है.

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लखनऊ/रामपुर. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) के लिए भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन सहयोगी अपना दल (एस) की प्रमुख और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से हैदर अली खान (Haider Ali Khan) को मैदान में उतारा है. वहीं, एनडीए के प्रत्‍याशी का मुकाबला समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) से होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि यूपी में भगवा खेमे के किसी दल ने 2014 के बाद पहली बार मुस्लिम प्रत्‍याशी पर दांव खेला है.

बता दें कि 36 साल के हैदर अली खान को यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस ने 13 जनवरी को अपना प्रत्‍याशी घोषित किया था. इसके बाद उन्‍होंने पाला बदलकर अपना दल (एस) का थामन थाम लिया. यही नहीं, रविवार को अपना दल ने उन्‍हें स्‍वार से टिकट देकर मैदान में उतार दिया है. हैदर अली खान कांग्रेस की दिग्गज नेता नूर बानो के पोते हैं और उन्‍होंने ब्रिटेन से पढ़ाई लिखाई की है.

क्‍या अपना दल में जाने की ये है वजह?
एसेक्स यूनिवर्सिटी से स्नातक हैदर के पिता नवाब काजिम अली और सपा सांसद आजम खान के बीच लंबे समय से अदावत है. यही नहीं, वह स्‍वार और तत्कालीन बिलासपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं. जबकि 2017 में काजिम ने बसपा के टिकट पर स्‍वार सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सपा उम्मीदवार और आजम के बेटे अब्दुल्ला से हार गए थे. इसके बाद दिसंबर 2019 में अब्दुल्ला का गलत हलफनामे की वजह से विधायक पद चला गया. इसके शिकायतकर्ता हैदर के पिता काजिम ही थे. वैसे रामपुर जिले में नवाब परिवार और आजम खान के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है और यह लंबे समय से चली आ रही है.

यही नहीं, नवाब परिवार से संबंध रखने वाली रामपुर की पूर्व सांसद बेगम नूर बानो के पौत्र हैदर अली दूसरे उम्मीदवार हैं, जो कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद टिकट ठुकराकर अन्य दल के उम्मीदवार बने हैं. हैदर अली खान को कांग्रेस ने 13 जनवरी को अपनी पहली सूची में स्‍वार से उम्मीदवार बनाया था. इससे पहले बरेली की छावनी सीट से विधानसभा की कांग्रेस प्रत्याशी घोषित सुप्रिया ऐरन ने सपा का दामन थाम लिया था. वैसे उसी सूची में बेगम नूर बानो के पुत्र काजिम अली खान को रामपुर से कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित किया गया. बता दें कि पिछली बार भाजपा ने अपना दल को 11 सीटें दी थीं और 9 पर जीत मिली थी. उस वक्‍त पार्टी ने कोई मुस्लिम प्रत्‍याशी नहीं उतारा था.

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हैदर अली खान चुनाव प्रचार में भी जुट गए हैं.

दरअसल 2012 में परिसीमन के बाद स्वार सीट बनी थी. इससे पहले इस सीट का नाम स्वार टांडा हुआ करता था. 2012 और 2017 के चुनाव में भाजपा की लक्ष्मी सैनी ने यहां से चुनाव लड़ा था. वो जीत तो नहीं पायीं लेकिन दोनों ही चुनावों में वह दूसरे नंबर पर रही थीं. 2012 में 41 हजार और 2017 में 53 हजार वोट लक्ष्मी सैनी को मिले थे. यानी लगभग 50 हजार भाजपा का कोर वोट स्वार सीट पर रहा है. भाजपा ने अब्दुल्ला आजम को शिकस्त देने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. स्वार सीट पर लगभग 1 लाख 80 हजार मुसलमान हैं. जबकि एक लाख 20 हजार के करीब हजार के करीब हिंदू वोटर हैं. भाजपा को उम्मीद है कि मुस्लिम कैंडिडेट के चुनाव लड़ने से हिंदू वोट के साथ कुछ मुस्लिम वोट भी उसके साथ जुड़ जाएगा. इसीलिए इलाके में पहचान रखने वाले कैंडिडेट को अपना दल से उतारा गया है.

यूपी में कब-कब है वोटिंग
उत्तर प्रदेश में इस बार सात चरणों में मतदान होना है. इसकी शुरुआत 10 फरवरी को पश्चिमी यूपी के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ होगी. इसके बाद दूसरे चरण में राज्य की 55 सीटों पर मतदान होगा. वहीं, तीसरे चरण में 59, चौथे चरण में 60, पांचवें चरण में 60 सीटों, छठे चरण में 57 और सातवें चरण में 54 सीटों पर मतदान होगा. 10 फरवरी को पहले चरण के मतदान के बाद 14 फरवरी को दूसरे चरण, 20 फरवरी को तीसरे चरण, 23 फरवरी को चौथे चरण, 27 फरवरी को पांचवें चरण, 3 मार्च को छठे चरण और 7 मार्च को सातवें चरण के लिए मतदान होगा. वहीं, यूपी चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे.

पिछले विधानसभा चुनाव के ऐसे थे नतीजे
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने 403 में से 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी. सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. सपा ने 47 और कांग्रेस ने 7 सीटें ही जीती थीं. मायावती की बसपा 19 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. वहीं, 4 सीटों पर अन्य का कब्जा हुआ था.

Tags: Anupriya Patel, Azam Khan, BJP, CM Yogi Adityanath, Uttar Pradesh Assembly Elections, Uttar Pradesh Elections

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