जानिए आजम खान के जौहर ट्रस्ट को लीज पर दी गई रामपुर के सबसे पुराने कॉलेज की जमीन का सच

दरअसल जिन दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की गई है कभी वहां पर डेढ़ सौ साल पुराना ओरिएंटल कॉलेज हुआ करता था. लेकिन जमीन कब्जाने के लिए कई तरह के खेल हुए. जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. यह रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 23, 2019, 12:45 PM IST
जानिए आजम खान के जौहर ट्रस्ट को लीज पर दी गई रामपुर के सबसे पुराने कॉलेज की जमीन का सच
सपा के कद्दावर नेता आजम खान
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 23, 2019, 12:45 PM IST
रामपुर जिला प्रशासन ने सपा के कद्दावर नेता आजम खान को भू-माफिया घोषित करने के बाद अब उनके मौलाना अली जौहर ट्रस्ट की दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की है. हालांकि इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है, लिहाजा इस पर अंतिम फैसला उसे ही लेना है. दरअसल जिन दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की गई है कभी वहां पर डेढ़ सौ साल पुराना ओरिएंटल कॉलेज हुआ करता था. लेकिन जमीन कब्जाने के लिए कई तरह के खेल हुए. जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. यह रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है.

मदरसा आलिया की जमीन लीज पर लेकर किया यूनानी दवाखाना पर कब्ज़ा

जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह के मुताबिक पूरा मामला दो संस्थाओं से जुड़ा है. इस पर संस्तुति आज नहीं की गई है. जुलाई माह के शुरुआत में ही कर दी गई थी. लेकिन इस पर अंतिम फैसला एसआईटी को लेना है. जिलाधिकारी ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि दोनों ही मामले एसआईटी जांच के दायरे में है. पहला मामला मदरसा आलिया से जुड़ा है जिसे 90 साल की लीज पर जौहर ट्रस्ट को दिया गया है.

DM rampur Aanjneya Kumar Singh
डीएम आंजनेय कुमार सिंह


मदरसा आलिया के साथ ही लगा हुआ यूनानी दवाखाना था, जो ट्रस्ट को नहीं दिया गया था. लेकिन वहां के डॉक्टरों को भगा कर उस पर भी कब्ज़ा कर लिया गया. जब शिकायत मिली तो उसकी जांच कराई गई. जांच में पता चला मदरसा आलिया करीब डेढ़ सौ साल पुराना संस्थान था. यहां अरबी व फारसी पढ़ाई जाती था. रामपुर के मर्जर डॉक्यूमेंट में भी इसका उल्लेख है. ये भी लिखा है कि सैकड़ों साल पुराना संस्थान है, जिसमें अरबी और फारसी पढ़ाई जाती है. 2001 तक शासन द्वारा इसको लगातार मेंटेन किया गया. 2001 में इसे पहला अरबी विश्वविद्यालय बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके बाद पता नहीं क्या हुआ, 2002 के बाद ये हवाला देते हुए की शिक्षकों की संख्या कम है और इसे जीर्णोद्धार में डाल दिया गया.



इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए जीर्णोद्धार के लिए दिए गए और सीएनडीएस द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा था. उसके बाद से लगतार ही इसमें ताला ही बंद रहा. 2010 में प्रिंसिपल ओरिएण्टल कॉलेज (मदरसा आलिया) के द्वारा लिखा एक पात्र भी है, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि ताला बंद होने की वजह से बच्चे वापस चले जा रहे हैं. इसके बाद 2016 में इसको लीज पर दे दिया गया. लेकिन लीज पर पाने के बाद रामपुर पब्लिक स्कूल खोला गया. लेकिन स्कूल को मदरसा आलिया की जगह पर न खोलकर यूनानी दावा खाना की जगह खोल दिया गया और वहां के डॉक्टरों को भगा दिया गया. इस तरह से यह अवैध कब्ज़ा था. जांच में सारी बातें जांच सामने आने के बाद हमने शासन को संस्तुति कर दी है कि इसका लीज रद्द करना उचित प्रतीत होता है. हालांकि ये कार्य एसआईटी के द्वारा ही फाइनल किया जाएगा.
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मुर्तजा कॉलेज की जमीन लीज पर लेकर खोला सपा दफ्तर

दूसरी जगह है रामपुर के सबसे पुराना कॉलेज मुर्तजा कॉलेज. इस कॉलेज की जमीन को 30 साल के लिए लीज पर लिया गया. उसके एक भाग में स्कूल और दूसरे भाग में डीआईओएस और बीएसए का कार्यालय चलता था. इस बात की पुष्टि दस्तावेजों और जांच कमेटी की रिपोर्ट से भी होती है. 2007 में इस जमीन को जौहर ट्रस्ट को लीज पर देने के लिए आदेशित हुआ था, लेकिन 2012 में आधिकारिक रूप से जौहर ट्रस्ट को लीज पर दे दिया गया. जिसके बाद इसके एक भाग में समाजवादी पार्टी का कार्यालय बना दिया गया. तीसरा प्रकरण है रामपुर के सबसे आधुनिक मोंटेसरी स्कूल का. हालांकि इसको लीज पर नहीं लिया गया, लेकिन उसको लीज पर लेने का प्रयास किया गया. इसके लिए कई बार लिखा पढ़ी हुई है. 2005 में इसके लिए लिखा पढ़ी शुरू हुई. 2007 में सात शिक्षकों को हटा दिया गया. कहा गया कि चार-पांच बच्चे हैं. बाद में ये कहते हुए कि ये स्कूल बहुत दिनों से बंद है इसलिए इसकी जमीन जौहर ट्रस्ट को देना उचित है. लेकिन किन्हीं कारणों से ये हो नहीं सका.



(इनपुट: विशाल सक्सेना)

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First published: July 23, 2019, 12:45 PM IST
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