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रामपुर: जंगल में घुसपैठ रोकने को वन विभाग ने खुदवाई खाई, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रदर्शन
Rampur News in Hindi

News18Hindi
Updated: May 19, 2020, 5:12 PM IST
रामपुर: जंगल में घुसपैठ रोकने को वन विभाग ने खुदवाई खाई, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रदर्शन
रामपुर में वन विभाग द्वारा खोदी गई खाई के विरोध में लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विरोध प्रदर्शन किया

रामपुर (Rampur): प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि बिना उन्हें सूचना दिए उनके द्वारा सालों से जोती जा रही जमीन को वन विभाग ने अपना बताकर जेसीबी से जमीन पर गहरी लम्बी खाई खुदवा दी. जबकि ज़मीन के मालिकाना हक के लिए अभी निर्णय होना वाकी है.

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रामपुर. एक तरफ जहां पूरा देश कोरोना (COVID-19) महामारी से परेशान है पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) चल रहा है. वहीं रामपुर (Rampur) में सैकड़ों लोगों ने वन विभाग के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन किया. प्रदर्शन करने वालों में महिलाएं भी शामिल रहीं. प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि बिना उन्हें सूचना दिए उनके द्वारा सालों से जोती जा रही जमीन को वन विभाग ने अपना बताकर जेसीबी से जमीन पर गहरी लम्बी खाई खुदवा दी. जबकि ज़मीन के मालिकाना हक के लिए अभी निर्णय होना वाकी है. अभी ज़मीन को लेकर विवाद चल रहा है. वहीं वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह खाई पिपली वन की सुरक्षा को देखते हुए खुदवाई गई है. किसी को परेशान करना हमारा मकसद नहीं है.

विरोध के बाद खुदाई बंद

मामला रामपुर के थाना मिलक खानम के पिपली बन के पास का है. करीब तीन दिन पहले वन विभाग द्वारा पीपली वन के पास खेत मे जेसीबी चलवाकर लम्बी खाई खुदवा दी गई. लोगों ने इसका विरोध किया तो खुदाई बन्द करवा दी गई लेकिन वन विभाग के अधिकारियों से नाराज सैकड़ों लोगों ने लॉकडाउन होने के बाद भी वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा.



बंटवारे के बाद यहां बसे थे



लोगों ने बताया कि वो लोग जब देश आज़ाद हुआ था तो पाकिस्तान से हिंदुस्तान स्थापित होकर आए थे. उस समय रामपुर में नबाबों का शासन था और हमे यहां इस क्षेत्र में बसाया गया था. इस समय यह नबीगंज, खुदागंज, हुसेनगंज, पिपली, आरसल, पारसल कहलाता है. हम लोग 1947-48 में यहां आए थे. उस समय यह एरिया बंजर और खाली पड़ा था, क्योंकि उस समय यहां महामारी फैली थी और यहां के लोग भाग गए थे. हमें यहां बसा दिया गया, हम लोगों ने बंजर जगह को आबाद किया. रोजगार के साधन जुटाए. हमें नहीं पता कि कैसे यह बन विभाग में कर दिया गया?

वर्षों से चल रही हक की लड़ाई

उन्होंने कहा कि कागजात बताते हैं कि 1950 में यह वन विभाग में कर दिया गया लेकिन एक तरफ डॉक्युमेंट यह भी बताते हैं कि यह खालसा सरकार में था और आज भी है. उन्होंने कहा कि 15 गांव मे आवादी है और 8 गांव मे पिपली वन है. आबादी की जगह 5 हज़ार एकड़ के करीब है जबकि पिपली वन करीब 6 हज़ार 445 एकड़ के करीब है. हम लोग बराबर सरकार के सम्पर्क में हैं और पेपर द्वारा हक की लड़ाई लड़ रहे हैं.

इस जमीन को रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हमने सभी को इसके लिए ज्ञापन दे चुके हैं. इस जगह की रिपोर्ट प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक मांग चुके हैं. अधिकारियों द्वारा यह रिपोर्ट जा चुकी है कि यह लोग नबाब के समय यहां आकर बस गए थे. उन्होंने बताया कि बीच मे यह भी हुआ कि वन विभाग कहता था हमारे पट्टे ले लो लेकिन हमने कहा हम राजस्व विभाग के पट्टे लेंगे. इस समय हमारी फाइल राजस्व परिषद में विचाराधीन है.

मामला राजस्व विभाग में लंबित है

वन विभाग ने राजस्व विभाग को जवाब भेजा है. राजस्व विभाग में फाइल लंबित पड़ी है. हमारा कोई झगड़ा नहीं है. किसी किसान पर कोई केस नही है. पुराने समय से जितनी ज़मीन की जुताई की जा रही है, उतनी ही ज़मीन है. इस समय लॉकडाउन चल रहा है. अब वन विभाग के डीएफओ ने इसका फायदा ऊठाते हुए हमे शिकार बनाया है. हमारे खेतों के बीचों-बीच मे खाई खोदनी शुरू कर दी है.

धीरे-धीरे वन सीमा में कर रहे थे प्रवेश

इस मामले में जब वन विभाग कर अधिकारियों से बात की तो डीएफओ एके कश्यप ने बताया कि पिपली वन का एरिया काफी आगे तक है. उनका यह कहना कि आज़ादी के बाद से वो यहां है तो उस मामले में शासन से दिशा-निर्देश मिले कि 1980 से पूर्व के अतिक्रमण को विनियमित करेंगे. 1980 के बाद का जो अतिक्रमण होगा उसे खारिज करेंगे. अभी जो किसान हैं, वो धीरे-धीरे वन सीमा के अंदर की और आ रहे हैं. आज से करीब 5 से 6 साल पहले तक जहां वन विभाग के पेड़ खड़े थे, आज उस जगह खेती हो रही है. हमने जो खाई खोदी है उसका मतलब यही है कि लोग समझें कि पिपली बन में प्रवेश प्रतिबंधित है. वन वन्य जीव और पेड़ पौधों के लिए है.

जंगल में अवैध शराब की भट्टियां चल रहीं: डीएफओ

उन्होंने कहा कि अभी शिकायत मिल रही थी कि वहां अवैध रूप से शराब की भट्टियां चल रही हैं. लोग लॉकडाउन में भी वनों के अंदर घूम रहे हैं. हमने पहले भी प्रयास किया था कि वनों के अंदर बेव्जह प्रवेश न हो, :इसलिए हमने सभी रास्ते बंद कराये. इसी का यह हिस्सा था कि हमने यह खाई खुदवाई है. हमने किसी को बेदखल नहीं किया है. उनके पास न खसरा है न खतौनी है, न उनके पास कोई दस्तावेज हैं, जिससे ये प्रूफ हो कि वो भूमि उनकी है. अभी हम भूमि की बात नही कर रहे हैं. लेकिन लॉक डाउन में जिस तरफ से वहां भट्टियां पाई गई हैं. असामाजिक तत्व जो वहां घूम रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए वहां खाई खोदी गयी है.

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First published: May 19, 2020, 5:11 PM IST
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