रामपुर: आजम खान के जौहर ट्रस्ट को 100 रुपये जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला

सपा सांसद आजम खान (File Photo)
सपा सांसद आजम खान (File Photo)

रामपुर (Rampur): 12.5 एकड़ से अधिक ज़मीन को सरकारी जमीन घोषित किए जाने का ये मामला है. आरोप है कि ज़मीन जिन शर्तो पर दी गई थी, उन शर्तो का उल्लंघन किया गया है. मामले में एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट में भूमि वापस लेने को कहा था.

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  • Last Updated: October 30, 2020, 10:30 AM IST
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रामपुर. उत्तर प्रदेश के रामपुर (Rampur) में सपा सांसद आजम खान (SP MP Azam Khan) के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (Maulana Mohammad Ali Jauhar Trust) पर 100 रुपये का जुर्माना लगा है. 100 रुपये जुर्माने के साथ जौहर ट्रस्ट का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया गया है और सुनवाई के लिए अंतिम बार समय दिया गया है. दरअसल 12.5 एकड़ से अधिक ज़मीन को सरकारी जमीन घोषित किए जाने का ये मामला है. आरोप है कि ज़मीन जिन शर्तो पर दी गई थी, उन शर्तो का उल्लंघन किया गया है. मामले में एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट में भूमि वापस लेने को कहा था. इसके बाद एडीएम प्रशासन की कोर्ट में मामला चल रहा है.

वहीं ट्रस्ट की तरफ से क्षेत्राधिकार के मामले में राजस्व परिषद में कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. राजस्व परिषद में अब 5 नबम्बर को सुनवाई होगी. एडीएम कोर्ट में सुनवाई के लिए ट्रस्ट के वकील ने समय मांगा. इसके बाद 100 रुपये हर्जाने के साथ प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया गया. अब मामले में 9 नबम्बर को सुनवाई होगी. एडीएम प्रशासन जगदम्बा प्रसाद गुप्ता की कोर्ट में मामला लंबित है.

पिछले दिनों हाईकोर्ट से मिली फौरी राहत



बता दें पिछले दिनों आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फौरी राहत मिली है. सीतापुर जेल में बंद आजम खान को ये राहत मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट मामले में मिली है. हाईकोर्ट ने ट्रस्ट के खिलाफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के 20 मार्च 2020 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार सहित विपक्षियों से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है.
ये है सुन्नी बोर्ड का आदेश

बता दें अतिक्रमण और कुप्रबंध के आरोप में जौहर ट्रस्ट पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कार्रवाई का आदेश दिया था. सांसद आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, रामपुर के मुतवल्ली हैं. याचिका ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई है. याचिका में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आदेश को नैसर्गिक न्याय के खिलाफ बताते हुए रद्द करने मांग की गई है.
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