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फर्जी प्रमाण पत्र मामला: SP सांसद आज़म खान को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, मुकदमा और चार्जशीट रद्द करने से किया इंकार
Allahabad News in Hindi

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 14, 2020, 4:43 PM IST
फर्जी प्रमाण पत्र मामला: SP सांसद आज़म खान को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, मुकदमा और चार्जशीट रद्द करने से किया इंकार
मामले में आज़म खान के अलावा उनकी पत्‍नी और बेटा भी आरोपी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से रामपुर से सपा सांसद आज़म खान (Azam Khan) और उनके परिवार को एक बार फिर झटका लगा है. कोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में उन्‍हें राहत देने से इंकार कर दिया है.

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रामपुर. उत्‍तर प्रदेश के रामपुर से सपा सांसद आज़म खान (Azam Khan), उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला खान (Abdullah Khan) को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में रामपुर की जिला अदालत में चल रहे मुकदमे और चार्जशीट को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर राहत देने से इंकार कर दिया है.

हाईकोर्ट ने कही ये बात
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपराध की प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार है. चार्जशीट में प्रथम दृष्टया यदि अपराधिक केस बनता हो तो आरोप के साक्ष्य पर मुकदमे के विचारण के समय विचार किया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध कारित हो रहा हो तो कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता. कोर्ट के इस फैसले से आज़म खान के परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

ये है पूरा मामला

गौरतलब है कि मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान ने हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, बीटेक और एमटेक की शिक्षा हासिल की है, जिसमें 1 जनवरी 1993 जन्म तिथि दर्ज है. जबकि 28 जून 2012 को मोहम्मद अब्दुल्ला का रामपुर नगर पालिका परिषद से जन्म तिथि प्रमाण पत्र बनवाया गया, जिसमें बदलाव करते हुए 30 सितंबर 1990 जन्मतिथि दर्शायी गई. इस जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त कराए बगैर नगर निगम लखनऊ से 2015 में दोबारा 30 सितंबर 1990 जन्म तिथि का प्रमाण पत्र जारी कराया गया.

बहरहाल, फर्जी जन्मपत्र बनवाने को लेकर धोखाधड़ी के आरोप में आज़म खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान के खिलाफ रामपुर के भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस ने इस मामले में विवेचना पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर दी है. इस मामले को लेकर कायम आपराधिक मुकदमे को रद्द करने की याचिका में मांग की गई थी. जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद राहत देने से इंकार कर दिया है.

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First published: February 14, 2020, 4:36 PM IST
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