तीन तलाक अध्यादेश: आजम खान बोले- अल्लाह के कानून से बड़ा कोई कानून नहीं

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 19, 2018, 3:49 PM IST
तीन तलाक अध्यादेश: आजम खान बोले- अल्लाह के कानून से बड़ा कोई कानून नहीं
सपा नेता आजम खान. Photo: News 18

आजम खान ने कहा कि बीजेपी का तो ये चुनावी मुद्दा है. हम बस इतना कहना चाहते हैं कि जो इस्लामिक शरह के ऐतबार से जायज है, वही सही है. तलाक पर कानून बने या न बने अल्लाह के कानून से बड़ा कोई कानून नहीं है.

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मोदी कैबिनेट ने ने बुधवार को तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले अध्यादेश को पास कर दिया. तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों में पास कराने में असफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है. उधर इस पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने भी अपना पक्ष रखा है.

आजम खान ने कहा कि बीजेपी का तो ये चुनावी मुद्दा है. हम बस इतना कहना चाहते हैं कि जो इस्लामिक शरह के ऐतबार से जायज है, वही सही है. तलाक पर कानून बने या न बने अल्लाह के कानून से बड़ा कोई कानून नहीं है. हम तो तलाक के मामले में अल्लाह के कानून को ही मानेंगे.  आजम खान ने कहा कि चूंकि उनके पास अभी अध्यादेश नहीं है, लिहाजा वह उसके बारे में तो कुछ नहीं कह सकते. लेकिन अगर अध्यादेश कुरान और शरह की रोशनी में है तो कोई ऐतराज नहीं है.

इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यादेश के संबंध में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक की तरह ही प्रावधान होंगे. इस बिल को पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पारित कर दिया गया था. हालांकि राज्यसभा में जहां सरकार के पास संख्याबल कम है वहां हंगामे के चलते इस बिल पर बहस भी नहीं हो पाई थी.

वैसे मोदी कैबिनेट ने भले ही अध्यादेश पास कर दिया है लेकिन इसे संसद में पास कराना सरकार के लिए अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 में फैसला दिया था कि अध्यादेश लाने की शक्ति कानून बनाने के लिए समानांतर ताकत नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि किसी बिल के पास नहीं होने पर उसके लिए अध्यादेश लाना संविधान के साथ धोखाधड़ी है और इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है.

तीन तलाक बिल का राज्यसभा में कड़ा विरोध हुआ था. विपक्षी नेताओं ने मांग की थी कि इस बिल को कड़े परीक्षण के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए. प्रस्तावित कानून पर बढ़ते विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सभी राज्य सरकारों से राय भी मांगी थी. ज्यादातर राज्य सरकारों ने इसका समर्थन किया था.

इस बिल के तहत तुरंत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को अपराध की श्रेणी में रखा गया. अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक बोलकर तलाक देने वाले मुस्लिम पुरुष को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है. इस बिल में मुस्लिम महिला को भत्ते और बच्चों की परवरिश के लिए खर्च को लेकर भी प्रावधान है. इसके तहत मौखिक, टेलिफोनिक या लिखित किसी भी रूप में एक बार में तीन तलाक को गैर-कानूनी करार दिया गया है.

पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक को गैर कानूनी और असंवैधानिक करार दिया था. तीन तलाक के संबंध में कई मुस्लिम महिलाओं ने याचिका लगाई थी कि उनके पतियों ने उन्हें स्काइप या वॉट्सऐप के जरिये तलाक दिया है और उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है.
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(रिपोर्ट: विशाल सक्सेना)

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First published: September 19, 2018, 3:49 PM IST
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