पानी बचाने के लिए एवरेस्‍ट पर चढ़ा ये IAS अधिकारी

माउंट एवरेस्ट को दो बार फतह करने वाले देश के पहले IAS हैं रवींद्र कुमार. बिहार के बेगूसराय के किसान परिवार से संबंध रखने वाले इस साहसी अधिकारी ने हर बार जनमानस को खास संदेश देने के मकसद से यह मुकाम हासिल किया है.

Ajay Raj | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 14, 2019, 5:08 PM IST
Ajay Raj | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 14, 2019, 5:08 PM IST
उत्‍तर प्रदेश कैडर के आईएएस रवींद्र कुमार ने दो बार माउंट एवरेस्ट फतह की है और वह ऐसा करने वाले देश के पहले आईएएस हैं. बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर प्रखंड के बसही गांव के निवासी शिवनंदन प्रसाद सिंह के बेटे ने इस मुश्किल चुनौती के लिए जनमानस से जुड़ी बातों को अपना मकसद बनाया और यही बात हर किसी को भावुक कर देती है. आखिर आधुनिक दौर में वो बिरले ही लोग हैं जिन्‍हें अपनी कठिनाइयों के बजाए देश और जनमानस की चिंता है. साल 2011 में आईएएस बनने के बाद रवींद्र कुमार ने अपनी प्रशासनिक जिम्‍मेदारी के साथ देश और मानवता के लिए जो किया है वह एक मिसाल है. पेश है उनके साथ किया गया Exclusive इंटरव्‍यू...

माउंट एवरेस्‍ट फतह करने के कारण पिछले काफी दिनों से आपकी देशभर में चर्चा हो रही है. इस मुश्किल मिशन के लिए आपको प्रेरणा कहां से मिली?



बात 2012 की है जब मैं सिक्‍कम कैडर के तहत डिस्ट्रिक्‍ट ट्रेनिंग पर था और उस दौरान मुझे जानकारी मिली कि कुछ समय पहले नेपाल में आए भूकंप (Earthquake) के रेसक्‍यू के लिए कुछ लोग बुलाए गए थे. तब मैंने सोचा क्‍यों ना इस दिशा में कदम बढ़ाया जाए. ज‍बकि उस वक्‍त में यंग था. इसके बाद मैं माउंटेनियर, रेसक्‍यू ऑपरेशन आदि की ट्रेनिंग में जुट गया.

2013 के बाद आपने 2019 में एक बार फिर माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल कर इतिहास रच दिया. आप दोनों तरफ से कामयाबी हासिल करने वाले पहले आईएएस हैं. इसके क्‍या मायने हैं?

मैंने तीन बार प्रयास किया है और दो बार मुझे सफलता मिली है. आईएएस बनने के दो साल बाद मैंने 2013 में पहली बार माउंट एवरेस्‍ट पर चढ़ने में सफलता हासिल की और यहां मुझे माउंटेनरिंग ट्रेनिंग की क्षमता परखने का मौका मिला. इसके बाद 2015 में मैंने दूसरी बार प्रयास किया. मेरा मकसद स्‍वच्‍छ भारत अभियान को बढ़ावा देना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लैग ऑफ किया. हालांकि एवरेस्‍ट पर हिमस्खलन (avalanche) के कारण यह मिशन अधूरा रह गया, क्‍योंकि नेपाल ने उस वक्‍त माउंट एवरेस्‍ट पर होने वाली हर एक्‍टविटी को बंद कर दिया था. हालांकि मेरी सोच थी कि मैं एवरेस्‍ट के टॉप पर जाकर लोगों को संदेश दूंगा कि स्‍वच्‍छ भारत अभियान को जीवन का अभिन्‍न हिस्‍सा बनाएं. यह हर तरह से हमारे फायदे का सौदा है.

रवींद्र कुमार ने माउंट एवरेस्‍ट से दिये ये संदेश.


2019 में मेरा मकसद एक बार फिर जनमानस से संबंधित रहा. इस बार मैंने 'जल बचाओ' मिशन के लिए एवरेस्‍ट को फतह किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस वक्‍त प्रति व्‍यक्ति 200 लीटर स्‍वच्‍छ पानी मिलता है, लेकिन उसे साफ सफाई, कार धोने आदि में इस्‍तेमाल कर बर्बाद किया जा रहा है. यही नहीं, एक अन्‍य रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में दिल्‍ली समेत देश के 21 शहर पानी के भयानक संकट से जूझ रहे होंगे. आपको बता दूं कि देश के करीब 40 प्रतिशत पानी की आपूर्ति गंगा से होती है और उसका प्रमुख स्रोत हिमालय है. गंगा के पानी पर अनुमानित तौर पर 50 करोड़ लोगों का जीवन निर्भर है. बहरहाल, मैंने एवरेस्‍ट पर फतह हासिल की और वहां से देश दुनिया के लोगों को अच्छा जल बचाने का संदेश दिया है, ताकि आने वाले वक्‍त में 'जल संकट' से बचा जा सके.
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आपको बता दूं कि पहली बार (2013) में नेपाल की तरफ से चोटी पर पहुंचा था और इस बार (2019) मैंने चीन की तरफ से चढ़ते हुए सफलता हासिल की है.

आपको ये सब करने का हौसला किसने दिया?

आप मेरा मकसद भलीभांति जान चुके हैं, जो कि जनमानस से संबंधित है. रही बात हौसले की तो जब आप सही नीयत से अच्‍छा काम करते हैं तो हर मुश्किल आसान बन जाती है. जबकि मुझे जल संसाधन मंत्री रहते हुए उमा भारती जी के अलावा जल संसाधन मंत्रालय, माउंटेनरिंग एसोसिएशन, आईएएस एसोसिएशन, उत्‍तर प्रदेश सरकार, बिहार सरकार आदि का भरपूर सहयोग मिला है. माननीय मंत्री जी ने मुझे मेंटली काफी सपोर्ट किया और एवरेस्‍ट पर जाने की अनुमति भी दी.

माउंट एवरेस्‍ट में आईएएस रवींद्र कुमार.


माउंट एवरेस्‍ट पर फतह पाने के बाद आपके जीवन में क्‍या बदलाव आया है?

मेरी बात जन-जन तक पहुंची है और यही मेरे लिए सबकुछ है. मानव को नेचर की रक्षा और सम्‍मान करना चाहिए. आखिर नेचर के सापेक्ष कुछ नहीं है और हमें हर हाल में इसके दोहन से बचना चाहिए.

आईएएस अधिकारी होने के बाद भी आपने इस मिशन के लिए समय कैसे निकाला और क्‍या परेशानियां रहीं.?

मेरा मकसद जनमानस से संबंधित रहा है और यही मुझे बात खुशी देती है. मेरा जॉब फील्‍ड से संबंधित रहा है और जब आप एवरेस्‍ट पर चढ़ने के बारे में सोचते हैं तो मेंटली और फिजीकली काफी मेहनत करनी पड़ती है. जबकि इस बार तो मेरा वजन 89 किलो था तो उसे कम करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. अगर इरादा और लक्ष्‍य स्‍पष्‍ट हो तो हर कोई मदद के लिए खड़ा हो जाता है. सच कहूं तो शुरू में स्‍पॉन्‍सरशिप की दिक्‍कत थी, लेकिन वो भी मिल गई. वहीं, सरकार, मेरे विभाग आदि से भरपूर सहयोग मिला. रही बात परेशानी की तो जब आप माउंट एवरेस्‍ट पर होते हैं तो आपको अपनी खुद हिफाजत करनी पड़ती है. अगर कोई दूसरा आपकी मदद कर सकता है तो वो हैं भगवान.

फरूर्खबाद के डीएम के रूप में दो साल पहले कार्यरत रवींद्र कुमार.


रवींद्र कुमार क्‍या हैं?
मैं बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर प्रखंड के बसही गांव का निवासी हूं और मेरे पिता शिवनंदन प्रसाद सिंह पेशे से किसान हैं. मेरी प्रारंभिक शिक्षा बेगूसराय में हुई. उसके बाद झारखंड की राजधानी रांची के जवाहर विद्या मंदिर सहित कई विद्यालयों में से शिक्षा हासिल की. प्लस टू की शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1999 में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की और शिपिंग में करियर चुनते हुए मुंबई स्थित ट्रेनिंग शिप चाणक्य से जुड़ा और वर्ष 2002 में ऐरो नॉटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद पेंटागन मरीन सर्विस कंपनी में कार्य करते हुए प्रबंधकीय रैंक के अधिकारी के रूप में प्रोन्नत हुआ. 2011 में आईएएस बना. पहले सिक्‍कम कैडर था, फिर यूपी कैडर मिला. इसके बाद भारत सरकार के साथ काम करने का मौका मिला और अब फिर से यूपी सरकार को सेवाएं दे रहा हूं.

मिल चुके हैं ये सम्‍मान
रवींद्र कुमार दो बार माउंट एवरेस्‍ट फतह करने वाले देश के पहले आईएएस होने के साथ-साथ साल 2013 में एलवी रेड्डी अवॉर्ड, 2014 में विशेष खेल सम्मान व सिक्किम खेल रत्न अवॉर्ड, साल 2016 में काष्ती रत्न अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं. जबकि उन्‍होंने माउंट एवरेस्ट की अपनी यात्रा के रोमांच को लोगों के साथ साझा करने के लिए 'मेनी एवरेस्ट' नामक पुस्तक लिखी. पुस्तक में सपनों के हकीकत में बदलने की प्रेरणादायक यात्रा का जिक्र करने के साथ खास जानकारी और परेशानी का भी जिक्र किया है. इस पुस्तक का विमोचन वर्ष 2016 में नयी दिल्ली में किया गया था.

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