गौतमबुद्ध नगर में कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चे को गोद लेने जा रहे हैं तो पहले पढ़ लें पुलिस की यह चेतावनी

गौतम बुद्ध नगर पुलिस-प्रशासन ने कोरोना पीड़ित बच्चों की मदद के लिए आसरा के नाम से पहल शुरु की है. Demo Pic

गौतम बुद्ध नगर पुलिस-प्रशासन ने कोरोना पीड़ित बच्चों की मदद के लिए आसरा के नाम से पहल शुरु की है. Demo Pic

Noida News: कोरोना पीड़ित बच्चों को गोद लेने पर आप किसी मुसीबत में भी फंस सकते हैं. ऐसे में जिले के पुलिस-प्रशासन ने एक चेतावनी जारी की है. साथ ही हेल्पलाइन नंबर (Helpline Numbe) भी जारी किया है.

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नोएडा. कोरोना (Corona) महामारी के चलते बहुत सारे बच्चों ने अपने मां-बाप को खो दिया है. किसी ने अपनी मां को खोया है तो किसी ने अपने पिता को. कुछ बच्चे ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस महामारी में मां-बाप दोनों को ही खो दिया है. परिवार में कमाने और खिलाने वाला भी कोई नहीं है. बहुत सारे लोग ऐसे अनाथ और बेसहारा हुए बच्चों को गोद ले रहे हैं. इनमें कुछ संस्थाएं और एनजीओ (NGO) भी हैं. लेकिन गौतमबुद्ध नगर (Gautam Budha Nagar) पुलिस-प्रशासन की अनदेखी कर कोरोना पीड़ित बच्चों को गोद लेने पर आप किसी मुसीबत में भी फंस सकते हैं. ऐसे में जिले के पुलिस-प्रशासन ने एक चेतावनी जारी की है. साथ ही हेल्पलाइन नंबर (Helpline Numbe) भी जारी किया है.

गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था-एनजीओ किसी कोरोना पीड़ित बच्चे को गोद लेती है या किसी को दिलाते हैं तो उन्हें ऐसा करने से पहले पुलिस और प्रशासन को सूचना देनी होगी.

इसके लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी 9450611460, बाल संरक्षण अधिकारी 7503551845, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 9870395200 पर कॉल कर जानकारी दी जा सकती है. अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो इसे गैरकानूनी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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30 बच्चों की लिस्ट बना चुकी है पुलिस

पुलिस ने गौतमबुद्ध नगर में ऐसे 30 बच्चों की पहचान की है, जिनके मां-बाप में से कोई एक या किसी के दोनों की ही मौत हो गई है. पुलिस-प्रशासन की मदद से एनजीओ यूथ फॉर सेवा और सेवा इंटरनेशनल ने ऐसे बच्चों की जिम्मेदारी ली है. नर्सरी से क्लास 10 तक संस्था ऐसे बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा ले रही है. वहीं, एक अन्य संस्था ने ऐसे बच्चों के परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया है.




4 बच्चे ऐसे हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा संस्था ने लिया है, लेकिन बच्चों को उनके रिश्तेदारी में भेज दिया है. पुलिस ऐसे घरों में भी खाना पहुंचा रही है, जहां परिवार के सभी बड़े सदस्य बीमार हैं और कमाने वाला ओर खाना बनाने वाला कोई नहीं है.

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