भीम आर्मी ने खोली पाठशाला, UP में 1000 दलित स्कूल खोलने की तैयारी

वालिया बताते हैं, "भीम पाठशाला चलाने में हर करीब तीन हजार का खर्च आता है. यहां पढ़ाने वाले शिक्षक कोई फीस नहीं लेते हैं. भीम आर्मी का हर सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार भीम पाठशाला की मदद करते हैं.

News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 1:35 PM IST
भीम आर्मी ने खोली पाठशाला, UP में 1000 दलित स्कूल खोलने की तैयारी
भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल सिंह वालिया की फोटो.
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Updated: April 17, 2018, 1:35 PM IST
सहारनपुर में भीम आर्मी ने दलित बच्चों के लिए पाठशाला' शुरू की है. इस पाठशालाओं में दलित बच्चों को न सिर्फ फ्री में शिक्षा दी जाएगी, बल्कि उन्हें दलितों के संघर्ष और इतिहास के बारे में भी बताया जाएगा. भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल वालिया ने दावा किया है कि दलित बच्चों को उनके इतिहास से जोड़ने के लिए और फ्री में शिक्षा देने के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी 1000 पाठशालाएं खोलेगी.

वालिया ने कहा कि दलित बच्चों के परिवार वाले उनकी पढ़ाई का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं और सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी से सभी लोग वाकिफ हैं. इसलिए भीम आर्मी के अधिकारियों ने 21 जुलाई 2015 को भीम पाठशालाओं को खोलने का फैसला लिया था. उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी और बच्चों को उनके इतिहास से रूबरू कराने के लिए 2015 भीम पाठशालाएं शुरू की गईं.

बकौल वालिया, अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांवों में स्कूल के बाद हर दिन बच्चे दो घंटे के लिए भीम पाठशाला आते हैं. यह पाठशाला किसी गांव में पेड़ की छांव में लगती है, तो किसी गांव में रविदास मंदिर के बरामदे में तो कभी कभी भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के घर पर लगती है.



वालिया बताते हैं, "भीम पाठशाला चलाने में हर करीब तीन हजार का खर्च आता है. यहां पढ़ाने वाले शिक्षक कोई फीस नहीं लेते हैं. भीम आर्मी का हर सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार भीम पाठशाला की मदद करते हैं. ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं से उम्मीद की जाती है कि वे दिन में दो घंटे का वक्त निकालकर बच्चों को पढ़ाएं. स्कूल के लिए कुछ लोग महीने के 50 रुपए दे देते हैं तो कुछ 200 से 300 रुपए भी देते हैं. हर कोई अपने तरीके से पाठशाला की मदद करता है."

इन पाठशालाओं में बेहद बारीकी से राजनीतिक संदेश भी दिया जाता है. जब कमल वालिया पाठशाला में आते हैं तो बच्चे 'जय भीम' कहकर उनका स्वागत करते हैं. जब चार साल की वर्षा आंबेडकर से 'बाबा ब्लैक शीप' सुनाने के लिए कहा जाता है तो वह पहले 'जय भीम, भीम आर्मी जिंदाबाद, जय भीम आर्मी, एड्वोकेट चंद्रशेखर आजाद जिंदाबाद' कहती है."
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