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देवबंद में जमीयत की बैठक में मौलाना महमूद मदनी बोले- ये मुल्क हमारा है, हम कहीं नहीं जाएंगे

मदनी ने कॉमन सिविल कोड को मंजूर करने से साफ इनकार कर दिया.

मदनी ने कॉमन सिविल कोड को मंजूर करने से साफ इनकार कर दिया.

जमीयत के जलसे में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा ईदगाह मस्जिद के संबंध में भी प्रस्‍ताव पास किया गया. जमीयत उलेमा ने अपने प्रस्ताव में सरकार और सियासी दलों को नसीहत दी कि अतीत के गड़े मुर्दों को उखाडने से बचना चाहिए. जमीयत उलेमा के प्रस्ताव ने 1991 धर्म स्थल कानून का हवाला देते हुए ज्ञानवापी विवाद को संवाधान का उल्लंघन बताया है. इतिहास सुधारने के नाम पर मस्जिदों और इबादतगाहों में विवाद खड़ा किया जा रहा है.

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सहारनपुर. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) के देवबंद में उलेमा-ए-हिंद (Jamiat-Ulema-e-Hind) की बैठक में आखिरी दिन रविवार को ज्ञानवापी-मथुरा विवाद से लेकर कॉमन सिविल कोड पर प्रस्ताव पास किए गए. इस दौरान मौलाना महमूद मदनी ने जलसे में मौजूद लोगों से सब्र करने के लिए कहा. उन्होंने आगे कहा कि ये मुल्क हमारा और हम इसे बचाएंगे. किसी को अगर हमारा मजहब बर्दाश्त नहीं है तो कहीं और चले जाओ. हम यहीं के हैं और यहीं रहेंगे. मदनी ने कहा कि हमको मौका मिला था पाकिस्तान जाने का. लेकिन हम नहीं गए. बात-बात पर पाकिस्तान भेजने वाले खुद पाकिस्तान चले जाएं. उन्होंने कहा कि हालात से परेशान होने की जरूरत नहीं है बल्कि हौसला और हिम्मत से काम लेने की जरूरत है.

मौलाना महमूद मदनीने देश में प्रेम सद्भावना और एकता अखंडता को मजबूत करने के लिए सभी वर्गो और धर्मों के साथ मिलकर भाईचारे के साथ काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया. मदनी ने कॉमन सिविल कोड को मंजूर करने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह गैर संवैधानिक है. जमीयत ने साफतौर पर कहा कि कॉमन सिविल कोड किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगा. इसे लागू करना संविधान का उल्लंघन होगा. इस्लामी कायदे-कानून में किसी तरह की दखलंदाजी मंजूर नहीं होगी.

जमीयत के जलसे में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा ईदगाह मस्जिद के संबंध में भी प्रस्‍ताव पास किया गया. जमीयत उलेमा ने अपने प्रस्ताव में सरकार और सियासी दलों को नसीहत दी कि अतीत के गड़े मुर्दों को उखाडने से बचना चाहिए. जमीयत उलेमा के प्रस्ताव ने 1991 धर्म स्थल कानून का हवाला देते हुए ज्ञानवापी विवाद को संवाधान का उल्लंघन बताया है. इतिहास सुधारने के नाम पर मस्जिदों और इबादतगाहों में विवाद खड़ा किया जा रहा है. शरीयत को लेकर मुस्लिम धर्म गुरुओं ने सख्त रूख अपनाया. जमीयत के प्रस्ताव में कहा गया कि इस्लामी शरीयत में किसी तरह दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी.

Tags: Bjp government, CM Yogi, Gyanvapi Masjid, Jamiat Ulema-e-Hind, Saharanpur news, Saharanpur Police, Uniform Civil Code, UP news, Yogi government

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