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जानिए कौन है भीम आर्मी का चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण?

चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण

चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण

भीम आर्मी एक बहुजन संगठन है, जिसे भारत एकता मिशन भी कहा जाता है. ये दलित चिंतक सतीश कुमार के दिमाग की उपज है. इसे 2014 में चंद्रशेखर आजाद 'रावण' और विनय रतन आर्य ने हाशिए वाले वर्गों के विकास के लिए स्थापित किया गया.

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    भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की 15 माह जेल में रहने के बाद गुरुवार की देर रात रिहा हो गया है. चंद्रशेखर का जन्म सहारनपुर में चटमलपुर के पास धडकूलि गांव में हुआ था. जिले के एक स्थानीय कॉलेज से उन्होंने कानून की पढ़ाई की. वो पहली बार 2015 में विवादों में घिरे थे. उन्होंने अपने मूल स्थान पर एक बोर्ड लगाया था, जिसमें 'धडकाली वेलकम यू द ग्रेट चमार्स' लिखा था. इस कदम ने गांव में दलितों और ठाकुर के बीच तनाव पैदा कर दिया था. चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया के जरिए काफी सुर्खियां बटोरी हैं. चंद्रशेखर ने फेसबुक और व्हाट्सअप के जरिए लोगों को भीम आर्मी से जोड़ने का काम किया.

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    भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने अपनी ताकत उस वक्त दिखायी, जब नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में दलितों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था. सहारनपुर में दलितों पर हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन के बाद चंद्रशेखर ने कहा था कि यदि 37 निर्दोष दलित जमानत पर रिहा किये जाएं, तो वह आत्मसमर्पण कर देगा.

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    भीम आर्मी है क्या?
    भीम आर्मी एक बहुजन संगठन है, जिसे भारत एकता मिशन भी कहा जाता है. ये दलित चिंतक सतीश कुमार के दिमाग की उपज है. इसे 2014 में चंद्रशेखर आजाद 'रावण' और विनय रतन आर्य ने हाशिए वाले वर्गों के विकास के लिए स्थापित किया गया. भीम आर्मी का कहना है कि वह शिक्षा के माध्यम से दलितों के लिए काम कर रहा है.

    इसका बेस कहां है?
    इसका बेस मुख्य तौर पर यूपी में है. सहारनपुर में ये वर्ष 2017 में चर्चाओं में आया. चर्चाओं में आने की वजह थी जाति संघर्ष. हिंसा के आरोपों के बाद भीम आर्मी के मुख्य कर्ताधर्ता चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था. चंद्रशेखर की अगुवाई में 25 युवा भीम आर्मी संभालते हैं. भीम सेना और अंबेडकर सेना भी ऐसे ही संगठन हैं लेकिन भीम सेना हरियाणा में ही काम कर रही है और अंबेडकर सेना का गढ़ पूर्वी यूपी में है. भीम आर्मी दलित शब्द के खिलाफ है और अंबेडकरवादी सोच वालों का स्वागत करती है.

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    इसका मूल संस्थापक कौन?
    भीम आर्मी’के मूल संस्थापक छुटमलपुर निवासी एक दलित चिंतक सतीश कुमार हैं. इस आर्मी को उनके दिमाग की उपज बताया जाता है. सतीश कुमार पिछले कई वर्षों से ऐसे संगठन बनाने की जुगत में थे, जो दलितों का उत्पीड़न करनेवालों को जवाब दे सके. लेकिन, उन्हें कोई योग्य दलित युवा नहीं मिला, जो कमान संभाल सके. ऐसे में सतीश कुमार को जब चंद्रशेखर मिले, तो उन्होंने चंद्रशेखर को ‘भीम आर्मी’ का अध्यक्ष बना दिया.

    भीम आर्मी ने रफ्तार कैसे पकड़ी?
    सितंबर साल 2016 में सहारपुर के छुटमलपुर में स्थित एएचपी इंटर कॉलेज में दलित छात्रों की कथित पिटाई के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार यह संगठन सुर्खियों में आया था.

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    इसके बाद भीम आर्मी ने क्या किया?
    5 मई 2017 को सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर शब्बीरपुर गांव में राजपूतों और दलितों के बीच हिंसा हुई थी. इस हिंसा में कथित तौर पर दलितों के 25 घर जला दिए गए थे और एक शख्स की मौत हो गई थी. इस हिंसा के विरोध में जब प्रदर्शन किया गया तो पुलिस ने 37 लोगों को जेल में डाल दिया और 300 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. इस पूरे मामले के बाद चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भीम आर्मी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था.

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