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क्या ये प्रकृति का कमाल? कालू नाम का बकरा देता है दूध; कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश, देखें VIDEO

Saharanpur News: सहारनपुर में दूध देने वाला बकरा चर्चा का विषय बन गया है. जनपद से करीब 15 किमी दूरी पर स्थित मुगल माजरा ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- निखिल त्यागी

सहारनपुर. प्रकृति में आदि काल से ही दूध देने के लिए मादा प्रजाति की उत्पत्ति हुई है. लेकिन जनपद सहारनपुर में दूध देने वाला बकरा चर्चा का विषय बन गया है. जनपद से करीब 15 किमी दूरी पर स्थित मुगल माजरा गांव में एक बकरा दूध देता है. यह नर-मादा दोनो के गुणों वाला बकरा पूरे दिन में करीब आधा लीटर दूध देता है. स्वामी ने अपने बकरे का नाम कालू रखा है. जिसकी उम्र डेढ़ वर्ष है. लोगों के आकर्षण का केंद्र बने इस बकरे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं. बकरे का स्वामी इरशाद पैरों से विकलांग है तथा एक पशुपालक है. बकरी का दूध बेचकर वह प्रत्येक महीने 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी कर लेता है. इरशाद के परिवार में चार बेटे और चार बेटियां है. जिनका पालन पोषण वह दूध बेचकर ही करता है.

साधारण तौर पर देखने में बकरे की शारीरिक बनावट बकरे की तरह ही है. लेकिन यह मादा बकरी की तरह ही दूध देता है. मुगल माजरा गांव के इरशाद इस बकरे का पालक है. क्षेत्र में कई दिनों से दूध देने वाला बकरा चर्चा का केंद्र बना हुआ है. जनता रोड से कुछ दूरी पर स्थित गांव से में इरशाद को बाबा बकरे वाले के नाम से जाना जाता है. इस समय वह दूध देने वाले बकरे की वजह से मशहूर है. बाबा बकरे वाले इरशाद के घर की हालत भी कुछ अच्छी नही है. उसके घर पर कई बकरी-बकरे भी जिन्हें वह पाल रहा है.

बकरा देता है दिन में आधा लीटर दूध
इरशाद ने बताया कि उसका बकरा दिन में करीब आधा लीटर दूध देता है. जिसकी उम्र अभी डेढ़ वर्ष है. जिस कमरे में इरशाद ने बकरे को रखा है, उसमें अन्य कई बकरी बकरे भी बंधे रहते है. इरशाद ने बताया कि उसके पिता मोहर्रम अली भी पशुपालक ही है. बढ़ती उम्र के साथ अब वह बकरियों को चलाने में असमर्थ है. इसलिए पुश्तैनी रूप से अब इरशाद भी अपने पिता की तरह ही पशुपालक बन गया है. बकरे को देखने दूर-दूर से लोग आ रहे है. इरशाद बकरे के थन से दूध निकालकर आने वाले सभी लोगों की जिज्ञासा दूर कर देता है.

13 बच्चों का बाप है बकरा (कालू)
इरशाद ने बताया कि डेढ़ वर्ष का कालू 13 बच्चों का पिता है. इरशाद उसके दूध को उसके बच्चों को ही पिला देते है. इसके अलावा इरशाद का परिवार भी उस बकरे के दूध को घर में प्रयोग करता है. इतना ही नहीं कालू के दूध को डेंगू पीड़ित मरीजों को भी इरशाद ने मुफ्त में दिया है.

एक करोड़ कीमत में दूंगा कालू को
50 बकरी व 10 बकरे पालने वाले इरशाद ने बताया कि यदि कोई खरीददार मेरे बकरे कालू को खरीदना चाहे, तो मैं उसको बेच भी दूंगा. उसने बताया कि मैंने इस बकरे की कीमत पहले ही सोच रखी है. इरशाद ने बताया कि एक करोड़ रुपये से कम किसी भी कीमत पर मैं अपने बकरे को नहीं बेचूंगा.

जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि दूध है या अन्य कोई पदार्थ
पशु चिकित्सा अधिकारी राजीव कुमार सक्सेना ने बताया कि हमारे संज्ञान में भी बकरे के दूध देने का मामला आया है. विभागीय स्तर पर गांव मुगल माजरा में जांच कराई गई. उन्होंने बताया कि जांच के बाद जो तथ्य सामने आया है, उसके अनुसार बकरे के थन से दूध जैसा पदार्थ निकल रहा है. जिसे दूध कहना अभी सही नहीं है. पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उक्त पदार्थ की जांच करा कर ही पता चलेगा कि यह दूध है या अन्य कोई पदार्थ. उन्होंने बताया कि प्रकृति में जन्मे सभी जीव जंतुओ में नर व मादा दो प्रकार की प्रजाति होती है. इसी तरह इस बकरे में प्रथम दृष्टया नर प्रजाति का होने के बाद भी मादा प्रजाति के हारमोंस नजर आ रहे है. उन्होंने बताया कि अंतिम रिपोर्ट जांच के बाद ही सामने आएगी.

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