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संभल के इस गांव में नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन, बड़ी दिलचस्प है इसके पीछे की कहानी

संभल जिले में एक गांव बेनीपुरचक है, जहां पर भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. (News18Hindi)

संभल जिले में एक गांव बेनीपुरचक है, जहां पर भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. (News18Hindi)

Rakshabandhan Tyohar: संभल जिले में एक गांव बेनीपुरचक है, जहां पर भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है, जिस वजह से रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. बेनीपुरचक गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाने की ये परंपरा अरसे से आज तक कायम है.

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हाइलाइट्स

संभल जिले के बेनीपुरचक गांव में भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है.
इसके पीछे एक मजेदार कहानी है, जो आज भी कायम है.
नई आई दुल्हन भी अपने मायके राखी मनाने नहीं जाती है...

संभल. उत्तर प्रदेश संभल में एक ऐसा गांव है, जहां पर भाई-बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है, जिस वजह से रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है. यहां के गांव बेनीपुरचक में रक्षाबंधन नहीं मनाने की ये परंपरा अरसे से आज तक कायम है. यूं तो भारत त्यौहारों का देश है इन दिनों जहां एक ओर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत मनाए जा रहे, राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस की धूम है. दूसरी ओर भाई बहन के पर्व रक्षाबंधन की तैयारी चल रही है.

रक्षाबंधन पर बहनों को आने जाने जाने के लिए सीएम ने रोडवेज को 48 घंटे तक के लिए फ्री कर दिया है. मगर संभल में एक ऐसा गांव है, जहां रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता. भाई की कलाई सूनी रहेगी न बहन भाई को राखी बांधेगी और न ही भाई बहन से राखी बंधवाएगा.

किंवदंती के अनुसार… बहन ने मांग लिया था बदले में गांव
जी हां, हम बिल्कुल सही कह रहे हैं, संभल के गांव बेनीपुरचक में राखी का पर्व नहीं मनाया जाता. इस गांव के लोग इसके पीछे एक लंबी कहानी बताते हैं. बताते हैं अधिकतम यादव जाति की आबादी वाले इस गांव के लोगों के पूर्वज मूलरूप से अलीगढ़ जिले के सिमरई गांव में रहते थे. किंवदंती के अनुसार उस गांव में ठाकुर और यादव जाति के लोग साथ साथ प्रेम से रहते थे. रक्षाबंधन पर यादव जाति की लड़की ने अपने रिश्ते के मुंहबोले भाई एक ठाकुर लड़के को राखी बांधी और दक्षिणा में घोड़ा ले लिया.

विवाह के बाद गांव आई दुल्हन भी मायके राखी बांधने नहीं जाती
वहीं इस गांव की एक ठाकुर लड़की ने यादव लड़के को राखी बांधी और उपहार स्वरूप पूरा सिमरई गांव मांगा. यादव लड़के ने अपनी जमींदारी का पूरा गांव राखी बांधने वाली मुंह बोली बहन को दे दिया. चूंकि गांव दक्षिणा में दिया जा चुका था और चीज दी हुई चीज पर अपना कोई हक नहीं बचता जिसके बाद सिमरई गांव के यह सभी लोग बेनीपुर चक गांव में आकर बस गए. राखी बांधने के बदले कोई अब संपत्ति न मांग ले इस कारण इस गांव के लोग रक्षाबंधन पर राखी नहीं बंधवाते हैं. यही नहीं, इस गांव में दूसरे गांव से शादी होकर आई युवती भी अपने भाई को राखी बांधने अपने मायके नहीं जाती है.

Tags: Rakshabandhan, Rakshabandhan festival, Sambhal News

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