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संभल के गुन्नौर सीएचसी का हाल, ड्रिप लगाने में हुआ मोबाइल का इस्तेमाल

Sunil kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 20, 2019, 8:23 PM IST
संभल के गुन्नौर सीएचसी का हाल, ड्रिप लगाने में हुआ मोबाइल का इस्तेमाल
संभल की गुन्नौर सीएचसी में मोबाइल की रोशनी में बच्चे को लगा दिया ड्रिप.

यूपी (Uttar Pradesh) के संभल जनपद (Sambhal) में स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) की खस्ता हालत, बच्चे को मोबाइल टॉर्च की रोशनी (Mobile Torch light) में ड्रिप लगाने को लेकर उठ रहे सवाल.

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संभल. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) की बुरी हालत किसी से छिपी नहीं है. आए दिन स्वास्थ्य सुविधाओं में लापरवाही, अस्पतालों में इलाज के लिए अपर्याप्त इंतजाम की खबरें आती रहती हैं. इसी क्रम में संभल (Sambhal) के अस्पताल से भी मोबाइल की रोशनी में इलाज करने की खबर आई है. जी हां, संभल के अस्पताल में बीते शनिवार की रात एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए हॉस्पिटल स्टाफ ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी (Mobile Torch light) का सहारा लिया, क्योंकि अस्पताल में बिजली नहीं थी. ऐसा नहीं है कि अस्पताल में जेनरेटर या इंवर्टर नहीं था, लेकिन बीमार बच्चे को ड्रिप लगाने के समय बिजली नहीं थी, सो मोबाइल की रोशनी में ही उसके हाथों की नसें तलाश करने और ड्रिप लगाने का काम हो सका.

बरामदे पर इलाज, मोबाइल ही सहारा
संभल जिले की गुन्नौर सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. इसका उदाहरण सिर्फ मोबाइल की रोशनी में इलाज करना ही नहीं है, बल्कि यहां मरीजों को बेड मुहैया कराना भी समस्या है. शनिवार की रात जब सीएचसी पर बीमार बच्चे को उसके परिजन लेकर आए, तो उसे अस्पताल के बरामदे में जगह मिली. बच्चे की हालत देख उसकी मां लगातार रोए जा रही थी और जल्द से जल्द इलाज करने की गुहार लगा रही थी. ऐसे में सीनियर फार्मासिस्ट बच्चे का इलाज करने आए. बरामदे में अंधेरा पसरा हुआ था, सो उन्होंने वहीं पर इलाज करना शुरू कर दिया. ड्रिप लगाने की बारी आई तो फार्मासिस्ट ने बच्चे के परिजनों से मोबाइल का टॉर्च जलाने को कहा और इस रोशनी में ही बच्चे को ड्रिप लगा दी.

सीएचसी प्रभारी ने किया बचाव

न्यूज 18 ने जब सीनियर फार्मासिस्ट की लापरवाही को लेकर सीएचसी प्रभारी डॉ. एसपी सिंह से बात की, तो उन्होंने अपने स्टाफ का बचाव करते हुए बयान दिया. डॉ. सिंह ने कहा कि अस्पताल में बिजली कनेक्शन के साथ-साथ जेनरेटर भी है. इसके अलावा हर कमरे में इंवर्टर भी लगा है. लेकिन कभी-कभी मरीज को सही तरीके से ड्रिप लगाने के लिए इस तरह का तरीका अपनाने की जरूरत होती है. बच्चे को तत्काल इलाज की जरूरत थी, इसलिए फार्मासिस्ट ने यह तरीका अपनाया.

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First published: October 20, 2019, 8:22 PM IST
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