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कभी मुलायम और मायावती की 'पसंद' रहे भालचंद्र यादव ने झेला था दल-बदल कानून

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 4, 2019, 7:29 PM IST
कभी मुलायम और मायावती की 'पसंद' रहे भालचंद्र यादव ने झेला था दल-बदल कानून
अपने राजनीतिक जीवन में भालचंद्र यादव ने कई पार्टियों से चुनाव लड़े.

पूर्व सांसद भालचंद्र यादव (BhalChandra Yadav) का शुक्रवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में देहांत हो गया. वह संतकबीर नगर जिले की राजनीति में माहिर खिलाड़ी माने जाते रहे. हालांकि उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो इसमें कई उतार-चढ़ाव, बदलाव देखने को मिलेगा.

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संतकबीरनगर. पूर्व सांसद भालचंद्र यादव (BhalChandra Yadav) का शुक्रवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में देहांत हो गया. पूर्व सांसद भालचंद्र यादव लंबे समय से कैंसर से पीड़ित चल रहे थे. भालचंद्र यादव संतकबीर नगर जिले की राजनीति में माहिर खिलाड़ी माने जाते रहे. हालांकि उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो इसमें कई उतार-चढ़ाव, बदलाव देखने को मिलेगा.

पढ़ाई के साथ पहलवानी का शौक

भालचंद्र जिले के भगता गांव के निवासी थे. बचपन से लेकर जवानी तक पढ़ाई के साथ पहलवानी करने वाले भालचंद्र यादव का एक समय मे छात्रसंघ की राजनीति में काफी दबदबा बना था. वर्ष 1999 में वो पहली बार सपा से सांसद बने. 2004 के इलेक्शन में वह बसपा से सांसद बने लेकिन वर्ष 2008 में कुछ दिक्कतों का कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी. इसके बाद उपचुनाव हुआ लेकिन वह हार गए. इसके बाद भालचंद्र यादव ने 2009 और 2014 लोकसभा चुनाव में भी हिस्सा लिया लेकिन जीत उन्हें नसीब नहीं हुई.

पहली बार 1998 में लड़ा लोकसभा चुनाव और मिली हार

पूर्व सांसद भालचंद्र यादव ने वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा, लेकिन वे बीजेपी प्रत्याशी इंद्रजीत मिश्र से 2,140 मतों से चुनाव हार गए थे. लेकिन 13 महीने बाद 1999 में 13वीं लोकसभा का चुनाव हुआ. यहां सपा ने एक बार फिर भालचंद्र यादव पर विश्वास जताया और आखिरकार उन्होने चुनाव में बसपा प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी को करीब 3 हजार वोट से मात दी. ये पहला मौका था जब भालचंद्र यादव सीधे लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद 2004 के 14वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में भालचंद्र यादव सपा का दामन छोड़ कर बसपा पहुंच गए. उन्होंने बतौर बसपा प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी को 27 हजार वोट से हराया और दूसरी बार सांसद बने.

2008 में दल-बदल कानून के तहत सदस्यता गंवाई

लेकिन 2008 में उनका बसपा से मोहभंग हुआ और उन्होंने समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली. लेकिन दल-बदल कानून के तहत भालचंद्र यादव की सदस्यता रद्द हो गई. इसके बाद 2008 में संतकबीरनगर सीट पर लोकसभा उप चुनाव हुआ लेकिन किस्मत ने यहां भालचंद्र का साथ नहीं दिया. बसपा प्रत्याशी भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी ने इस बार भालचंद्र यादव को करीब 64 हजार से ज्यादा मतों से मात दे दी. इसके बाद भालचंद्र यादव को 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कुशल तिवारी के हाथों हार झेलनी पड़ी.
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2010 में माया सरकार के दौरान बसपा में लौटे
एक साल बाद 2010 में भालचंद्र ने मायावती सरकार के दौरान फिर से बसपा का दामन थाम लिया. इसके बाद उन्होंने सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा विधानसभा क्षेत्र से अपने छोटे बेटे सुबोध यादव को सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय के खिलाफ बसपा से चुनाव लड़ाया. वहीं बड़े बेटे प्रमोद यादव को सिद्धार्थनगर से जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ाया और जीत भी हासिल की.

आखिरी बार कांग्रेस से लड़ा चुनाव

सिद्धार्थनगर में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भालचंद अपनी जमीन तलाश रहे थे, कि अप्रैल 2012 में भालचंद्र बसपा से निष्कासित कर दिए गए. इसके बाद उन्होंने सपा का दामन थाम लिया. लेकिन सत्ता उनसे दूर ही रही. 2014 में भालचंद्र ने चुनाव लड़ा लेकिन वह जीत नहीं सके. यही नहीं इसके बाद 2019 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.

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First published: October 4, 2019, 6:33 PM IST
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