संतकबीरनगर लॉकडाउन: न बिजली, न उज्जवला गैस और महीनों से मिल नहीं रहा केरोसिन
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संतकबीरनगर लॉकडाउन: न बिजली, न उज्जवला गैस और महीनों से मिल नहीं रहा केरोसिन
संतकबीर नगर में हजारों परिवार ऐसे हैं, जो केरोसिन के अभाव में चूल्हे पर खाना बनाने को विवश है.

संतकबीरनगर (Sant Kabir Nagar) के डीएम रवीश गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में जिले में डीएसओ ने सर्वे किया था, जिसमें 8 प्रतिशत की ही मांग थी. इसके बाद कोटा सरेंडर करा दिया गया था. अब डीएसओ द्वारा दोबारा सर्वे कराकर बांटा जाएगा. डीएम के अनुसार करीब 45 जनपदों ने सरेंडर कर दिया है.

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संतकबीरनगर. लॉकडाउन (Lockdown) के बीच गरीबों को राहत देने का सरकारी फरमान संतकबीरनगर (Sant Kabir Nagar) जिले में कुछ और ही जमीनी हकीकत दिखा रहा है. शासन द्वारा गरीबों को केरोसिन वितरण का आदेश यहां फाइलों में दफन होकर रह गया है. लॉकडाउन के बीच मुसीबत के मारे गरीबों पर अब सिस्टम की मार पड़ी है. मजदूर कहीं से जुगाड़ कर अनाज की व्यवस्था कर ले रहा है तो उसे पकाने के लिए उसके पास न तो उज्ज्वला गैस का कनेक्शन है और न ही केरोसिन. ऐसे में हालात और सरकारी सिस्टम के मारे ये गरीब प्लास्टिक जलाकर या जंगल व अन्य जगहों से लकड़ी के सहारे भोजन बनाने को मजबूर हैं. उधर प्रशासन का कहना है कि सर्वे जारी है, जल्द आपूर्ति की जाएगी.

लॉकडाउन को लेकर शासन से बीते 24 अप्रैल को यूपी के सभी जिलाधिकारियों और जिला पूर्ति अधिकारियों को केरोसिन वितरण करवाने का आदेश जारी किया था. जिसके बाद यूपी के सभी जिलों में केरोसिन वितरण का काम तो शुरू हो गया लेकिन संतकबीरनगर जिले को आवंटित 1.92 लाख लीटर केरोसिन का वितरण आज भी जिले के अफसर नहीं करवा पाए हैं. लॉकडाउन के बीच ऐसे गरीब जो अब तक सरकारी योजना उज्ज्वला गैस योजना अथवा विद्युत कनेक्शन से वंचित रह गए हैं, उनके लिए मिट्टी का तेल ही मौजूदा वक्त मे सबसे ज्यादा जरूरी है.

2 लाख लोगों को मिट्टी के तेल की सख्त जरूरत



जिले के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में कुल 2 लाख 46 हजार 792 बिजली कनेक्शन हैं जबकि 1.10 लाख उज्ज्वला गैस योजना से लाभान्वित गरीब हैं. उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारियों के साथ जिले में कुल 4 लाख 69 हजार गैस उपभोक्ता हैं, जिनका काम तो बगैर मिट्टी के तेल से चल जा रहा है लेकिन जिले में लगभग 2 लाख ऐसे कार्ड धारक हैं, जिनको मिट्टी के तेल की मौजूदा वक्त में सख़्त जरूरत है जो उन्हें नहीं मिल पा रहा है.



क्या कहते हैं डीएम...

डीएम रवीश गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में जिले में डीएसओ ने सर्वे किया था, जिसमें 8 प्रतिशत की ही मांग थी. इसके बाद कोटा सरेंडर करा दिया गया था. अब डीएसओ द्वारा दोबारा सर्वे कराकर बांटा जाएगा. डीएम के अनुसार करीब 45 जनपदों ने सरेंडर कर दिया है.

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First published: May 28, 2020, 7:46 PM IST
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