स्वामी चिन्मयानंद की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने खारिज की केस वापसी की अर्जी
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स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म केस की वापसी की भनक लगने पर पीड़िता ने सीजेएम कोर्ट में एक आपत्ति याचिका दाखिल किया था और कोर्ट से मुकदमा वापस लेने की अर्जी को खारिज करने की मांग की थी

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पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. शाहजहांपुर सीजेएम कोर्ट ने स्वामी चिन्मयानंद के ऊपर चल रहे दुष्कर्म के मुकदमों को वापस लेने की अर्जी को खारिज कर दिया है. इतना ही नहीं, कोर्ट ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए 12 जुलाई को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं.

गौरतलब है वर्ष 2011 में स्वामी चिन्मयानंद पर उनकी ही एक शिष्या ने हरिद्वार के आश्रम में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था और पीड़िता की तहरीर पर स्वामी के खिलाफ शाहजहांपुर चौक कोतवाली में 30 नवंबर 2011 को केस दर्ज हुआ था.

हालांकि गत 9 अप्रैल को सूबे योगी सरकार ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दायर केस वापस लेने के आदेश ने जारी किया था और इसी आधार पर एडीएम प्रशासन के कहने पर सहायक अभियोजन अधिकारी ने सीजेएम कोर्ट में पत्र देकर मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी.



रिपोर्ट के मुताबिक स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म केस की वापसी की भनक लगने पर पीड़िता ने सीजेएम कोर्ट में एक आपत्ति याचिका दाखिल किया था और कोर्ट से मुकदमा वापस लेने की अर्जी को खारिज करने की मांग की. यही कारण था कि सीजेएम शिखा प्रधान ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार की अर्जी को खारिज कर दिया और स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ पांच हजार का जमानती वारंट भी जारी कर दिया.
इससे पहले, केस वापसी को लेकर 9 मार्च 2018 को जिला मजिस्ट्रेट, शाहजहांपुर के कार्यालय से एक लेटर जारी किया गया था. वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी को भेजे इस पत्र में लिखा था कि शासन ने शाहजहांपुर कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज धारा 376 और 506 आइपीसी का केस वापस लिए जाने का फैसला किया है. अतः शासनादेश के तहत कृत कार्रवाई से अवगत कराने का कष्ट करें ताकि शासन को भी इस बारे में अवगत कराया जा सके.

उल्लेखनीय है सीएम योगी आदित्यनाथ स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में आयोजित मुमुक्ष युवा महोत्सव में शिरकत करने के लिए शाहजहांपुर भी पहुंचे थे. एडीएम जितेंद्र शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित जारी पत्र में मुकदमा वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए थे.

पीड़िता के पति ने सरकार के फैसले को खुद के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि किसी भी सरकार का दायित्व न्याय व्यवस्था बनाए रखते हुए पीड़ितों को इंसाफ दिलाना होता है, लेकिन इसके उलट राज्य सरकार गुनाहगारों को ही मुक्त कर रही है.

मालूम हो, अटल सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद पर बदायूं निवासी उनकी एक शिष्या ने साल 2011 में हरिद्वार स्थित आश्रम में बंधक बनाकर हवस का शिकार बनाने आरोप लगाया था.
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