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टोक्यो पैरालंपिक 1981 में ये लाए थे 3 गोल्ड, आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

टोक्यो पैरालंपिक 1981 में ये लाए थे 3 गोल्ड, आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

शाहजहांपुर के पैरालंपियन कौशलेंद्र किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं.

शाहजहांपुर के पैरालंपियन कौशलेंद्र किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं.

Tokyo Paralympic-1981 : शाहजहांपुर यूपी के रहनेवाले ओलंपियन कौशलेंद्र सिंह ने टोक्यो पैरालंपिक 1981 में 3 गोल्ड मेंडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. पर आज वे किडनी की समस्या से पीड़ित हैं और उनके पास इलाज कराने के लिए पैसे भी नहीं हैं.

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  • News18Hindi
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लखनऊ. टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने वाले पैरालंपिक खिलाड़ियों का इन दिनों पूरे देश में जोरदार स्वागत और सम्मान किया जा रहा है. देश के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात कर उनका अभूतपूर्व स्वागत और सम्मान किया. इन खिलाड़ियों को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया गया. लेकिन इस बीच टोक्यो पैरालंपिक-1981 में भारत के लिए 3 गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले कौशलेंद्र सिंह आज न सिर्फ अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं, बल्कि अपने इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें भी खा रहे हैं.

टोक्यो पैरालंपिक-1981 में जीते थे 3 गोल्ड मेडल

कौशलेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद के रहने वाले हैं. वे दोनों पैरों से लाचार हैं. लेकिन उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक-1981 में 3 गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम दुनिया में रोशन किया था. कौशलेंद्र सिंह ने उस वक्त टोक्यो पैरालंपिक में 1500 मीटर और 100 मीटर व्हीलचेयर रेस में गोल्ड मेडल के साथ 100 मीटर की बाधा दौड़ में भी गोल्ड मेडल जीता था. इस दौरान कौशलेंद्र सिंह ने अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई सिल्वर और ब्रांन्ज मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. लेकिन इस वक्त 55 वर्ष के कौशलेंद्र सिंह किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी आर्थिक स्थित भी खस्ता है. किडनी के इलाज के लिए कौशलेंद्र सिंह हरिद्वार स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम पहुचे. जहां से उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली रेफर कर दिया गया. RML में उन्हें भर्ती तो कर लिया गया. लेकिन 2 दिन बाद कुछ और जांच कराकर आने की बात कहकर बिना किसी इलाज के डिस्चार्ज कर दिया गया.

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तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था मदद का आश्वासन

टोक्यो पैरालंपिक-1981 के गोल्ड मेडलिस्ट कौशलेंद्र सिंह भावुक होकर कहते है कि आज टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर देश का नाम रोशन करनेवाले अपने खिलाड़ियों पर बेहद गर्व हो रहा है. क्योंकि टोक्यो पैरालंपिक-1981 में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर मेरा भी इसी तरह से स्वागत-सम्मान हुआ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी ने भी हमसे मुलाकात कर हमारे साथ लंच किया था. उन्होंने भविष्य में भी हमलोगों की पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था. लेकिन उसके बाद सरकारों, नेताओं और अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन मिला, कोई मदद आज तक नहीं मिली. हालांकि मुझे इसके लिए किसी से कोई शिकायत नहीं है. मैं शाहजहांपुर से RML अस्पताल, नई दिल्ली में इलाज कराने गया था. जहां मुझे भर्ती करने के 2 दिन बाद बिना इलाज किए ही डिस्चार्ज कर दिया गया. मुझे अभी भी असहनीय दर्द हो रहा है. लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं किसी प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करा सकूं. मैं बस इतनी ही अपील करना चाहता हूं कि अगर किसी से हो सके तो कोई मेरे इलाज में मदद कर दे. ताकि मेरी जान बच जाए.’

Tags: Paralympic, Shahjahanpur उत्तर प्रदेश, Uttar pradesh news

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