शाहजहांपुर लोकसभा सीट: बीजेपी के लिए तीन दशक के ट्रेंड को बदलने की चुनौती
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शाहजहांपुर लोकसभा सीट: बीजेपी के लिए तीन दशक के ट्रेंड को बदलने की चुनौती
शाहजहांपुर में मुख्य मुकाबला बीजेपी के अरुण कुमार सागर ( बाएं ) और गठबंधन प्रत्याशी अमर चंद्र जौहर (दाएं) के बीच है.

शाहजहांपुर के वोटर के पिछले रिकॉर्ड को देखकर ऐसा लगता है कि यहां के वोटर प्रत्याशी या पार्टी को बदल देने में भरोसा रखते हैं.

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शाहजहांपुर के वोटर के पिछले रिकॉर्ड को देखकर ऐसा लगता है कि यहां के वोटर प्रत्याशी या पार्टी को बदल देने में भरोसा रखते हैं. वरना ऐसा नहीं होता कि पिछले तीन दशक से कभी पिछले चुनाव में जीती पार्टी यहां कामयाब नहीं हो पाती. शायद यह भी एक वजह है कि बीजेपी ने प्रत्याशी बदलने का फैसला किया. 2014 में बीजेपी से कृष्णा राज जीती थीं. लेकिन इस बार प्रत्याशी बदल गए. फैसला हो चुका है. यहां चुनाव हो चुके हैं. अब नतीजे का इंतजार है.

बीजेपी ने यहां अपना असर 1990 के आसपास जमाया था, जब जब देश में राम मंदिर आंदोलन चल रहा था. 1989 और 1991 के चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की. राम मंदिर आंदोलन के बाद बनी समाजवादी पार्टी ने 1996 के चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज की. लेकिन 1998 में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी यहां से जीत कर आई. 1999 में कांग्रेस के जितेंद्र प्रसाद जीत कर सांसद बने. 2001 में उनका निधन हो गया, जिसके बाद 2004 के चुनाव में उनके बेटे जितिन प्रसाद इस सीट से चुनाव जीते. 2009 का चुनाव समाजवादी पार्टी के खाते में गया, लेकिन 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर विजयी हुई.

जितिन प्रसाद




सीट का समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर करीब 19 लाख से अधिक वोटर हैं. इसमें करीब 11 लाख पुरुष और करीब आठ लाख महिला वोटर हैं. यहां की करीब 20 फीसदी जनसंख्या मुस्लिम समुदाय से है. शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र के अंदर छह विधानसभा सीट आती हैं- कटरा, जलालाबाद, तिलहर, पुवायां, शाहजहांपुर और ददरौल शामिल हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां सिर्फ जलालाबाद में समाजवादी पार्टी जीत पाई थी, बाकी पांच विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहराया था.

क्या हुआ था पिछली बार

पूरे उत्तर प्रदेश की तरह 2014 में शाहजहांपुर भी मोदी लहर से प्रभावित था. बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ीं कृष्णा राज ने यहां करीब ढाई लाख वोटों से जीत दर्ज की. उनको कुल 46.5% वोट मिले थे. बहुजन समाज पार्टी के उमेद सिंह दूसरे और समाजवादी पार्टी के मिथिलेश कुमार तीसरे नंबर पर रहे थे. 2014 में इस सीट पर करीब 57 फीसदी मतदान हुआ था. कृष्णा राज मोदी सरकार में मंत्री भी रहीं.

कृष्णा राज


कौन हैं प्रत्याशी

शाहजहांपुर लोकसभा सीट से 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि ऐसा लग रहा है कि मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अरुण कुमार सागर और बहुजन समाज पार्टी के अमर चंद्र जौहर के बीच है. कांग्रेस ने ब्रह्मस्वरूप सागर को मैदान में उतारा है. सीपीआई ने मनीष चंद्र कोरी को टिकट दिया. तीन निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं.

अरुण सागर कटरा विधानसभा में चावर खास गांव के हैं. वह वित्त विकास निगम के साथ कारोबार करते थे. साथ में बीएसपी के कार्यकर्ता थे. 2007 में वो राजकीय निर्माण निगम के उपाध्यक्ष बन गए. 2009 में उन्हें संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाल दिया गया. उसके बाद वो फिर बीएसपी में आए और विधान सभा चुनाव लड़े. लेकिन हार गए. 2015 में उन्हें फिर पार्टी से निकाल दिया गया. इसके बाद वो बीजेपी में आ गए.

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