शाहजहांपुर में खेली गई 'जूता मार होली', सैकड़ों साल पुरानी है परंपरा, देखें फोटो

शाहजहांपुर में होली की अनोखी परंपरा: यहां जूता मार होली खेलते हैं लोग

शाहजहांपुर में होली की अनोखी परंपरा: यहां जूता मार होली खेलते हैं लोग

उत्तर प्रदेश में होली खेलने की एक परंपरा ऐसी भी है जो सबको चौंकाती है. शाहजहांपुर में होली पर कुछ अलग ही नजारा रहा. यहां बड़ी संख्या में लोग 'जूता मार होली' खेलते देखे गए. इस मौके पर जूता फेंककर मारे जाने की काफी पुरानी परंपरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 29, 2021, 8:27 PM IST
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शाहजहांपुर. रंग-गुलाल की होली तो सब खेलते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) में होली खेलने की एक परंपरा ऐसी भी है जो सबको चौंकाती है. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ( Shahjahanpur) में सोमवार को होली पर कुछ अलग ही नजारा रहा. यहां बड़ी संख्या में लोग जूता मार होली मनाते देखे गए. इस मौके पर जूता ( shoes) फेंककर मारे जाने की काफी पुरानी परंपरा है. जिसको लेकर प्रशासन काफी सतर्क और मुस्तैद रहा.

सौ साल से अधिक पुरानी है परंपरा

बताया जाता है कि बैलगाड़ी पर बैठाए गए लाटसाहेब के स्वरूप के रूप में बैठे व्यक्ति को हेलमेट पहनाया जाता है, जिससे उसको कोई गंभीर चोट न पहुंचे. इसके पीछे उसकी पहचान छिपाने का भी दस्तूर है. स्थानीय लोग इस परंपरा को बहुत पुराना बता रहे हैं. इसकी शुरूआत को लेकर कई मिथक हैं. होली के दिन यहां दो जुलूस निकाले जाते हैं. लाट साहब का जूलूस और फिर छोटा लाट साहब का जूलूस निकलता है. पहले इसे नवाब साहब का जलूस कहा जाता था. बताते हैं कि इसकी शुरुआत 100 साल से अधिक पुरानी है. इसी को लेकर यहां के लोग जलूस में शिरकत करते हैं और लाट साहब की सवारी पर जूते फेंककर होली मनाते हैं.

सांप्रदायिक सौहार्द बनाना पुलिस के लिए चुनौती
जूता मार होली से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती होती है. जूते फेंके जाने से कई बार विवाद होने और उनके धर्मिक स्थानों में गिरने से सांप्रदायिक सौहार्द को बिगडऩे से बचाने पुलिस कई कदम उठाती है. इसी को लेकर जुलूस में फेंके गए जूते मस्जिदों, मजारों या अन्य धार्मिक जगहों पर जाकर न गिरें इसलिए उनको कवर कर दिया जाता है. पुलिस अधिकारियों की मानें तो ये दोनों जलूस जिन रास्तों से होकर निकलते हैं, वहां सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की जाती है. अपद्रवियों पर भी नजर रखी जाती है. इस परंपरा से हजारों लोगों का जुड़ाव है. इसी को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी बेहद सतर्क रहते हैं.
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