शाहजहांपुर में परिजन ने शव लेने से किया इनकार, अस्पताल ने कहा व्यक्ति नहीं था संक्रमित

उन्होंने बताया कि परिजनों को समझाने के बाद मिश्रीपुर के ग्राम प्रधान रूप राम वर्मा के सहयोग से मृतक का रविवार को अंतिम संस्कार करा दिया गया. (सांकेतिक फोटो)

उन्होंने बताया कि परिजनों को समझाने के बाद मिश्रीपुर के ग्राम प्रधान रूप राम वर्मा के सहयोग से मृतक का रविवार को अंतिम संस्कार करा दिया गया. (सांकेतिक फोटो)

प्रधान ने बताया कि उसके बाद वाहन चालक शव को वापस मेडिकल कॉलेज (Medical college) ले गया. बाद में मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर यू. पी. सिन्हा ने फोन पर उन्हें बताया कि पवन कोविड-19 संक्रमित नहीं था.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर जिले में पहले एक व्यक्ति को कोरोना वायरस (Corona virus) से संक्रमित बताये जाने और फिर उसकी मौत के बाद उसे संक्रमित नहीं बताये जाना का मामला सामना आया है. मामला जिले के पवन (33) नामक व्यक्ति से जुड़ा है. दरअसल जब पवन की मौत के बाद अस्पताल से उसका शव वाहन से उसके घर भेजा गया तो परिजनों ने शव लेने से मना करते हुए उसे सीधे श्मशान घाट (Graveyard) ले जाने को कहा जिसके बाद वाहन चालक शव को वापस मेडिकल कॉलेज ले गया, जहां मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि पवन संक्रमित नहीं था.

शहर के रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र के मिश्रीपुर गांव में रहने वाले ग्राम प्रधान रूप राम वर्मा ने सोमवार को बताया कि पड़ोस में रहने वाले उनके भतीजे पवन (33) की 26 मई को तबीयत खराब होने के बाद उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और 27 मई को उसकी कोविड-19 की जांच की गई जिसमें उसके संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी. उन्होंने बताया कि 29 मई को हालत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान अस्पताल में ही पवन की मौत हो गई और शव को वाहन से उसके घर भेजा गया. लेकिन कोरोना वायरस से संक्रमित बताये जाने की वजह से परिजन तथा मोहल्ले के लोगों ने वाहन चालक से शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने को कहा लेकिन उसने नियमों का हवाला देते हुए ऐसा करने से मना कर दिया.

पहले से संक्रमित था जिसे परिजनों ने छुपाया था

प्रधान ने बताया कि उसके बाद वाहन चालक शव को वापस मेडिकल कॉलेज ले गया. बाद में मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर यू. पी. सिन्हा ने फोन पर उन्हें बताया कि पवन कोविड-19 संक्रमित नहीं था. इसके बाद परिजनों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई क्योंकि 28 मई को उसे संक्रमित बताया गया तथा 29 मई को मौत के बाद संक्रमित नहीं बताया जा रहा है. मेडिकल कॉलेज की जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर पूजा त्रिपाठी ने बताया कि इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सिन्हा से उनकी बात हुई है. उनका कहना था कि मरीज पहले से संक्रमित था जिसे परिजनों ने छुपाया था. बाद में मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में उसमें संक्रमण नहीं पाया गया. उन्होंने बताया कि परिजनों को समझाने के बाद मिश्रीपुर के ग्राम प्रधान रूप राम वर्मा के सहयोग से मृतक का रविवार को अंतिम संस्कार करा दिया गया.

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