केदारनाथ दर्शन के लिए प्रयागराज से 1100 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़ा है ये युवा

UP: प्रयागराज के धीरज मिश्रा पैदल ही 1100 किलोमीटर दूर केदारनाथ की यात्रा पर निकल पड़े हैं.

Shahjahanpur: प्रयागराज के रहने वाले धीरज मिश्रा केदारनाथ की यात्रा पैदल चलने की ठानी है. वह सुबह और शाम करीब 40 किलोमीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं. 10 दिन बाद वह शाहजहांपुर पहुंचे हैं.

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शाहजहांपुर. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. प्रयागराज (Prayagraj) के रहने वाले धीरज मिश्रा ने ऐसा ही कुछ करके दिखा रहे हैं. उन्होंने अपने हौसले से प्रयागराज से केदारनाथ (Kedarnath) की यात्रा शुरू की है. पिछले 10 दिनों के बाद वह शाहजहांपुर (Shahjahanpur) पहुंचे हैं. देर शाम को एक बार फिर शाहजहांपुर से केदारनाथ की यात्रा पर निकल पड़े हैं. उनका कहना है कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ अपने अंदर छिपी प्रतिभा दिखाने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं.

प्रयागराज के रहने वाले धीरज मिश्रा केदारनाथ की यात्रा पैदल चलने की ठानी है. वह सुबह और शाम करीब 40 किलोमीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं. 10 दिन बाद वह शाहजहांपुर पहुंचे हैं. धीरज मिश्रा का कहना है कि वह प्रकृति और अपने अंदर छिपी प्रतिभा को दिखाने के लिए यह मुहिम शुरू की है हर इंसान के अंदर प्रतिभा छुपी होती है. यदि इंसान कुछ करने की ठान ले तो हर किसी का संकल्प पूरा होता है. इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रकृति को नजदीक से समझ रहे हैं. वहीं अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शन करने का एक प्लेट फॉर्म भी मिल रहा है.

दरअसल धीरज मिश्रा अपनी गाड़ी से कई बार केदारनाथ की यात्रा कर चुके हैं. उन्हें भगवान शिव से प्रेरणा मिली कि एक बार वह पैदल यहां जरूर आएं. इस संकल्प लेकर धीरज मिश्रा ने यह पदयात्रा शुरू कर लोगों के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है. अपने हौसलों को दिखाकर वह लगातार पैदल यात्रा कर रहे हैं. करीब 1107 किलोमीटर की यात्रा वह 1 महीने में पूरी कर पाएंगे. रोजाना 40 किलोमीटर चलने के बाद विश्राम करते हैं. इस दौरान उनकी सारी थकान भी मिट जाती है.

रेलवे में सिग्नल ऑपरेटर के बेटे धीरज मिश्रा धूमनगंज के रहने वाले हैं. उन्होंने यह यात्रा 4 जून की सुबह से शुरू की थी. धीरज मिश्रा स्पोर्ट्स के सामान का कारोबार करते हैं और वह खेलो से भी जुड़े हुए हैं. ऐसे में उन्होंने अपने शरीर में स्टैंमिना भी विकसित किया है. इसी ताकत के चलते वह अपने संकल्प को पूरा कर पा रहे हैं. अपनी इस यात्रा के जरिए वह लोगों को संदेश दे रहे हैं कि वह प्रकृति के साथ जुड़े. जिसके चलते न केवल वह है अपने शरीर और मन को प्रसन्न रख सकेंगे बल्कि अपने हर संकल्प को पूरा करने में सक्षम भी हो सकेंगे.

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