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UP News: ऑपरेशन के दौरान डॉक्‍टर ने पेट में ही छोड़ दिया कपड़ा, लापरवाही ने ली महिला की जान

डॉक्टर की लापरवाही के चलते महिला की ऑपरेशन के छह महीने बाद मौत हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)

डॉक्टर की लापरवाही के चलते महिला की ऑपरेशन के छह महीने बाद मौत हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)

Shahjahanpur News: महिला की मौत के बाद भी आरोपी डॉक्टर पर नहीं हुई कार्रवाई. जांच के लिए बनाई गई कमेटी को भी बयान देने से बचता रहा डॉक्टर.

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शाहजहांपुर. प्रसव के दौरान लापरवाही के चलते एक महिला के पेट में कपड़ा छोड़ने का दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है. जिसके बाद महिला की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार चिकित्सक ने प्रसव के दौरान करीब छह महीने पहले महिला के पेट में कपड़ा छोड़ दिया था और अब 26 जुलाई को महिला की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है. पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि शाहजहांपुर जिले के रामापुर उत्तरी गांव में रहने वाले मनोज की 30 वर्षीय पत्नी नीलम का पिछली छह जनवरी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के जरिए प्रसव हुआ था.

आरोपी पर नहीं हुई कार्रवाई
पीड़िता के पति मनोज ने बुधवार को को बताया कि उनकी पत्नी की इलाज के दौरान लखनऊ के ट्रामा सेंटर में सोमवार की रात को मौत हो गई. उन्होंने मामले की शिकायत की है लेकिन अब तक किसी ने भी उनके न तो बयान लिए और न ही आरोपी डॉक्टर पर कोई कार्रवाई हुई. उन्होंने बताया कि बेटी के जन्म के बाद उसकी पत्नी के पेट में दर्द की शिकायत रहती थी. गत 21 जून को मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन के दौरान पेट में कपड़ा होने की पुष्टि हुई थी. इसके बाद ऑपरेशन करके कपड़ा निकाला भी गया था. बाद में हालत गंभीर होने पर पीड़िता को लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती करा दिया गया था.

बयान देने से टालता रहा डॉक्टर
इस बीच, राजकीय मेडिकल कॉलेज की जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर पूजा त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में बनाई गई जांच कमेटी ने आरोपित डॉक्टर पंकज को फोन करके उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने बात टाल दी. इस बात की पुष्टि जांच कमेटी के सदस्य डॉक्टर सरोज कुमार ने करते हुए बताया कि अब डॉक्टर पंकज जांच कमेटी को बयान देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने बताया कि आरोपित डॉक्टर पंकज छह माह के लिए सीनियर रेजिडेंट के पद पर यहां काम कर रहे थे और कार्यकाल पूरा होने के बाद वह मेडिकल कॉलेज से चले गए हैं.

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UP: शाहजहांपुर में प्रेमी युगल की गोली मारकर हत्या, ऑनर किलिंग की आशंका

UP: शाहजहांपुर में प्रेमी युगल की गोली मारकर हत्या (File photo)

UP Crime News: एसपी एस आनंद ने बताया कि प्रेमी- प्रेमिका एक ही जाति के हैं और पिछले 6 सालों से दोनों का प्रेम संबंध चल रहा था. इस दौरान दोनों की शादी की बात हुई लेकिन घर वाले शादी के राजी नहीं हुए.

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शाहजहांपुर. यूपी के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में प्रेमी युगल (Love Couples) की शुक्रवार सुबह गोली मारकर हत्या (Murder) कर दी गई. युवक का शव गांव के बाहर एक धार्मिक स्थल के पास जबकि युवती का शव उसके घर के कमरे में पड़ा मिला. घटना की जानकारी मिलने पर सीओ समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई है. युवक के पिता ने ऑनर किलिंग का आरोप लगाया है. मौके पर पहुंचे एसपी ने अपनी टीम के साथ फॉरेंसिक टीम के जरिए जांच शुरू की है. वहीं परिजनों की तहरीर पर पुलिस कार्रवाई की बात कर रही है.

घटना गढ़िया रंगीन थाना क्षेत्र के नोगवां निरोत्तम गांव की है. नोगवां निरोत्तम गांव निवासी आशीष कुमार आज सुबह करीब तीन बजे स्वजन को बिना कुछ बताये घर से निकले थे. सुबह करीब पांच बजे आशीष का शव गांव के बाहर धार्मिक स्थल के पास खून से लथपथ पड़ा मिला. उनके सीने में गोली लगी थी. कुछ देर बाद आशीष के पड़ोसी कृष्णपाल सिंह की बेटी बंटी की भी गोली लगने से मौत की चर्चा होने लगी. पुलिस जब उनके घर पहुंची तो दूसरी मंजिल के कमरे में बंटी का शव खून से लथपथ पड़ा था. बंटी के भी सीने में गोली लगी थी. दोनों शव के पास असलाह नहीं मिले. घटना की जानकारी मिलने पर सीओ परमानंद पांडेय, कटरा, जैतीपुर, तिलहर पुलिस गांव पहुंच गई है.

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आशीष के पिता सुखपाल ने आरोप लगाया कि बंटी के पिता कृष्णपाल ने दोनों की गोली मारकर हत्या की है. एसपी एस आनंद ने बताया कि प्रेमी- प्रेमिका एक ही जाति के हैं और पिछले 6 सालों से दोनों का प्रेम संबंध चल रहा था. इस दौरान दोनों की शादी की बात हुई लेकिन घर वाले शादी के राजी नहीं हुए. इस दौरान प्रेमी आशीष की शादी दूसरी जगह कोई और उसके दो बच्चे भी पैदा हो गए. फिलहाल इस घटना के बाद दोनों घरों में कोहराम मचा हुआ है.

टोक्यो पैरालंपिक 1981 में ये लाए थे 3 गोल्ड, आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

शाहजहांपुर के पैरालंपियन कौशलेंद्र किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं.

Tokyo Paralympic-1981 : शाहजहांपुर यूपी के रहनेवाले ओलंपियन कौशलेंद्र सिंह ने टोक्यो पैरालंपिक 1981 में 3 गोल्ड मेंडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. पर आज वे किडनी की समस्या से पीड़ित हैं और उनके पास इलाज कराने के लिए पैसे भी नहीं हैं.

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लखनऊ. टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने वाले पैरालंपिक खिलाड़ियों का इन दिनों पूरे देश में जोरदार स्वागत और सम्मान किया जा रहा है. देश के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात कर उनका अभूतपूर्व स्वागत और सम्मान किया. इन खिलाड़ियों को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया गया. लेकिन इस बीच टोक्यो पैरालंपिक-1981 में भारत के लिए 3 गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले कौशलेंद्र सिंह आज न सिर्फ अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं, बल्कि अपने इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें भी खा रहे हैं.

टोक्यो पैरालंपिक-1981 में जीते थे 3 गोल्ड मेडल

कौशलेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद के रहने वाले हैं. वे दोनों पैरों से लाचार हैं. लेकिन उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक-1981 में 3 गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम दुनिया में रोशन किया था. कौशलेंद्र सिंह ने उस वक्त टोक्यो पैरालंपिक में 1500 मीटर और 100 मीटर व्हीलचेयर रेस में गोल्ड मेडल के साथ 100 मीटर की बाधा दौड़ में भी गोल्ड मेडल जीता था. इस दौरान कौशलेंद्र सिंह ने अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई सिल्वर और ब्रांन्ज मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. लेकिन इस वक्त 55 वर्ष के कौशलेंद्र सिंह किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी आर्थिक स्थित भी खस्ता है. किडनी के इलाज के लिए कौशलेंद्र सिंह हरिद्वार स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम पहुचे. जहां से उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली रेफर कर दिया गया. RML में उन्हें भर्ती तो कर लिया गया. लेकिन 2 दिन बाद कुछ और जांच कराकर आने की बात कहकर बिना किसी इलाज के डिस्चार्ज कर दिया गया.

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तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था मदद का आश्वासन

टोक्यो पैरालंपिक-1981 के गोल्ड मेडलिस्ट कौशलेंद्र सिंह भावुक होकर कहते है कि आज टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर देश का नाम रोशन करनेवाले अपने खिलाड़ियों पर बेहद गर्व हो रहा है. क्योंकि टोक्यो पैरालंपिक-1981 में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर मेरा भी इसी तरह से स्वागत-सम्मान हुआ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी ने भी हमसे मुलाकात कर हमारे साथ लंच किया था. उन्होंने भविष्य में भी हमलोगों की पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था. लेकिन उसके बाद सरकारों, नेताओं और अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन मिला, कोई मदद आज तक नहीं मिली. हालांकि मुझे इसके लिए किसी से कोई शिकायत नहीं है. मैं शाहजहांपुर से RML अस्पताल, नई दिल्ली में इलाज कराने गया था. जहां मुझे भर्ती करने के 2 दिन बाद बिना इलाज किए ही डिस्चार्ज कर दिया गया. मुझे अभी भी असहनीय दर्द हो रहा है. लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं किसी प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करा सकूं. मैं बस इतनी ही अपील करना चाहता हूं कि अगर किसी से हो सके तो कोई मेरे इलाज में मदद कर दे. ताकि मेरी जान बच जाए.’

PM मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामला: शाहजहांपुर से आरोपी ओवैस को पुलिस ने किया गिरफ्तार

आरोपी ओवैस को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Shahjahanpur News: मीडिया सेल के अधिकारियों ने सर्विलांस टीम के जरिए आरोपी युवक को खोजते हुए गिरफ्तार कर लिया. सदर बाजार पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा है. बताया जा रहा है कि युवक उवैस थाना आरसी मिशन के गाड़ी पूरा मोहल्ले का रहने वाला है.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले आरोपी युवक को पुलिस (Police) ने गिरफ्तार किया है. आरोपी युवक उवैस ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी. जिसके चलते मीडिया सेल के अधिकारियों ने सर्विलांस टीम के जरिए आरोपी युवक को खोजते हुए गिरफ्तार कर लिया. सदर बाजार पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा है. बताया जा रहा है कि युवक उवैस थाना आरसी मिशन के गाड़ी पूरा मोहल्ले का रहने वाला है.


दरअसल, आरोपी ओवैस ने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष की फर्जी फेसबुक पेज बनाकर प्रधानमंत्री के लिए अभद्र टिप्पणी की थी. जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के आईटी विभाग के प्रदेश सह संयोजक अनुज कुमार वर्मा ने गत रविवार को थाना सदर बाजार पहुंच तहरीर दी थी.


उन्होंने बताया कि किसी ने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष की फर्जी फेसबुक पेज बनाया है और वह पेज से गलत पोस्ट कर रहा है. जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी.

VIDEO: सपा के पूर्व विधायक राजेश यादव बोले- गुंडई क्या होती है? ये हम बताएंगे

शाहजहांपुर में सपा के पूर्व विधायक राजेश यादव का एक बयान का वीडियो वायरल हो रहा है.

Shahjahanpur News: सपा के पूर्व विधायक राजेश यादव ने शाहजहांपुर में कहा कि पार्टी पर गुंडई करने का आरोप लगता रहा है. अब आप समझ जाओ कि हम गुंडई पर आ गए तो जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ 15 के स्थान पर 16 ब्लॉक प्रमुख होंगे. सभी विधानसभा में सपा के ही विधायक होंगे.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में पूर्व सपा विधायक राजेश यादव (Former SP MLA Rajesh Yadav) के बिगड़े बोल का वीडियो वायरल हुआ है. वीडियो में विधायक राजेश यादव सपा कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि हम गुंडई पर आए तो जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ 16 ब्लॉक प्रमुख उनके होंगे. छह विधानसभाओं में सपा के विधायक होंगे. गुंडई क्या होती है, ये इन्हें आने वाले वक्त में हम बताएंगे. बता दें राजेश यादव कटरा विधानसभा से सपा के पूर्व विधायक हैं. गुरुवार को समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान तिलहर तहसील में उन्होंने ये बयान दिया था.

अब शाहजहांपुर सहित पूरे प्रदेश में सपा के धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक राजेश यादव के बिगड़े बोल का वीडियो वायरल हो रहा है. अपने वीडियो वायरल में आक्रोशित होकर उन्होंने कहा कि सपा पार्टी पर गुंडई करने का आरोप लगता रहा है. भाजपा और बसपा वाले गुंडों की पार्टी आरोप लगाते रहे हैं. इस बार पंचायत चुनाव में भाजपा ने गुंडई की पराकाष्ठा ही पार कर दी.

सपा के पूर्व विधायक का बयान...



अब आप समझ जाओ कि हम गुंडई पर आ गए तो जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ 15 के स्थान पर 16 ब्लॉक प्रमुख होंगे. सभी विधानसभा में सपा के ही विधायक होंगे. गुंडई क्या होती है? ये इन्हें आने वाले वक्त में हम बताएंगे. बता दें गुरुवार को समाजवादी पार्टी ने पंचायत चुनाव में धांधली के आरोप के साथ ही किसानों, बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दे पर प्रदेश के अधिकतर जिलों में तहसीलों पर प्रदर्शन किया. इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने जिले के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा.

Eid-ul-Adha: शाहजहांपुर में आकर्षण का केंद्र बना 27 लाख का बकरा, अल्लाह के साथ शरीर पर लिखी हैं कई आयतें

शाहजहांपुर में आकर्षण का केंद्र बना 27 लाख का बकरा

Shahjahanpur News: बकरे के मालिक सियाराम का दावा है कि बकरे के शरीर पर अल्लाह, मोहम्मद, 786 समेत 15 आयतें लिखी हैं. इसकी कीमत 27 लाख है. अभी तक 20 लाख तक की बोली लग चुकी है.

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शाहजहांपुर. बकरीद (Bakrid) से पहले उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) के बकरा मंडी में एक बकरा इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. दरअसल इस बकरे की कीमत इसके मालिक ने 27 लाख रुपए लगाई है. बकरे के मालिक का दावा है कि बकरे के शरीर पर न केवल अल्लाह लिखा हुआ है बल्कि कुरान की कई आयतें भी कुदरती तौर पर लिखी हुई हैं. लिहाजा वह उसे बकरीद पर 27 लाख की कीमत पर ही बेचेगा. 27 लाख के बकरे की बात सुनकर लोग उसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं.

बकरीद पर हर मुस्लिम के घर बकरे या पशु की कुर्बानी दी जाती है. ऐसे में लोग पहले से ही बाजारों से बकरों को खरीदकर उन्हें पालते हैं. ऐसे में व्यापारी अपने बकरों पर अल्लाह की आयतों को दिखाकर ऊंची बोली बोल रहे हैं, ताकि उनको बकरीद पर मोटी कमाई मिल सके. कटरा कस्बे में ऐसे ही एक बाजरे की चर्चाएं हैं, जिसकी कीमत 27 लाख रुपए लगाई गई है. बकरे के मालिक सियाराम का कहना है कि 20 लाख रुपए तक बकरी की कीमत लग चुकी है. उसने दावा किया है कि उसके बकरे के शरीर पर न केवल अल्लाह लिखा है, बल्कि कुरान की आयतें भी लिखी हुई है.

अब तक 20 लाख की लगी बोली
बकरे के मालिक सियाराम का दावा है कि बकरे के शरीर पर अल्लाह, मोहम्मद, 786 समेत 15 आयतें लिखी हैं. इसकी कीमत 27 लाख है. अभी तक 20 लाख तक की बोली लग चुकी है, लेकिन वे इसे 27 लाख से कम में नहीं बेचेंगे.

इन बकरों की मिलती है मुंह मांगी कीमत
दरअसल शाहजहांपुर के बकरा व्यापारी इन दिनों उत्साहित दिख रहे हैं. उनका कहना है कि आमतौर से बकरे की कीमत 5000 से 10000 के बीच होती है, लेकिन जब इन बकरों के शरीर पर अल्लाह या कुरान की कोई आयतें लिखी हुई होती हैं तो उन बकरों की मुंह मांगी कीमत मिलती है. अल्लाह लिखा हुआ बकरे की कुर्बानी सबसे बढ़िया मानी जाती है. ऐसे में बकरों की बिक्री करने वाले व्यापारी अपने चितकबरा बकरों पर कुरान की कुछ आयतों की  वीडियो वायरल कर उनकी कीमत लगाने की जुगत में लग गये हैं. ऐसा ही मामला कटरा कस्बे मे देखने को मिला है, जहां व्यापारी ने 27 लाख रुपए की कीमत दिखा कर अपने बकरे को चर्चा में ला दिया है.

शख्स ने लाइट लगवाने को कहा तो बोले BJP MLA- कसम खाओ कि तुमने मुझे ही वोट दिया है

विधायक वीर विक्रम सिंह ने इस बारे में बताया कि ग्रामीण उन पर अपने घर में लाइट लगवाने का दबाव बना रहा था. (सांकेतिक फोटो)

ये वीडियो मीरानपुर कटरा क्षेत्र से बीजेपी विधायक वीर विक्रम सिंह (BJP MLA Veer Vikram Singh) का है. वीडियो में एक ग्रामीण उनसे अपने यहां एक लाइट लगवाने के लिए गुहार लगा रहा है.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में एक वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हो रहा है. इस वीडियो में बीजेपी विधायक एक फरियादी से यह कह रहे हैं कि तुम बेटे की कसम खाकर बोले कि चुनाव में मुझे ही वोट दिए हो. इस दौरान फरियादी बेटे की कसम खाते हुए कहता है कि मैंने आपको ही वोट दिया है. दरअसल, ये वीडियो मीरानपुर कटरा क्षेत्र से बीजेपी विधायक वीर विक्रम सिंह (BJP MLA Veer Vikram Singh) का है. वीडियो में एक ग्रामीण उनसे अपने यहां एक लाइट लगवाने के लिए गुहार लगा रहा है. इसी दौरान विधायक विक्रम सिंह कसम खाने की बात कहते हुए सुनाई दे रहे हैं.

वीडियो के मुताबिक, बीजेपी विधायक हाल में संपन्न वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्र में अपने विकास कार्यों का जिक्र कर रहे थे. तभी एक ग्रामीण उनसे अपने यहां लाइट लगवाने की बात कहने लगता है. उसकी बात पर विधायक ने कहा कि तुम गंगा की तरफ हाथ करके या अपने लड़के की कसम खाकर कहो कि तुमने हमें वोट दिया है. यदि कसम खाते हो तो हम आज ही तुम्हारे घर पर लाइट लगवा देंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि अपेक्षा उससे की जाती है जिसे आप कुछ दो.

लाइट सार्वजनिक स्थानों पर ही लगाई जाती है
वहीं, इसके बाद जब ग्रामीण ने कहा कि वह तो सिर्फ लाइट लगाने के लिए फरियाद कर रहा है. इसके बाद विधायक ने कहा कि फरियाद उसी से किया जाता है जिसे तुमने कुछ दिया है. यदि तुमने मुझे वोट दिया होता तो तुम्हारा मेरी छाती पर चढ़ने का अधिकार होता. आप हमें बेवकूफ बनाने का प्रयास न करो. हमारे पिता चार बार विधायक रहे. इसके बाद विधायक विक्रम सिंह ने कहा कि हम विधायक ऐसे ही नहीं बने हैं. हमे सब मालूम है कि किस बूथ पर किसने हमें वोट दिया है और किसने नहीं दिया है. विधायक वीर विक्रम सिंह ने इस बारे में बताया कि ग्रामीण उन पर अपने घर में लाइट लगवाने का दबाव बना रहा था. उस लाइट की कीमत 10 लाख रुपए है. ऐसे में सरकार की योजना के तहत यह लाइट सार्वजनिक स्थानों पर ही लगाई जाती है.

UP News: शाहजहांपुर में मैक्रोनी खाने से पिता-पुत्र की मौत, मां और दो बच्चों की हालत गंभीर

सूचना पर घर पहुंची डॉक्टरों के टीम ने अन्य सदस्यों का इलाज शुरू किया है

Shahjahanpur News: घटना थाना खुटार के गांव छापा बोझी की है, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक ही परिवार में पिता-पुत्र की मौत हो गई है. महिला समेत दो बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में उस समय हड़कंप मच गया जब मैक्रोनी (Macaroni) खाने से पिता और पुत्र की मौत हो गई. वहीं, एक महिला और दो बच्चों समेत तीन लोग बीमार हो गये. मैक्रोनी खाने से हुई मौतों के बाद घर में कोहराम मच गया. इस बात की खबर लगते ही डॉक्टर की टीम रविवार देर रात गांव पहुंची, जहां डॉक्टर ने बीमार लोगों का इलाज शुरू किया है. बताया जा रहा है कि मैक्रोनी खाने के बाद बीमार पड़े परिवार ने झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराया था.

घटना थाना खुटार के गांव छापा बोझी की है, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक ही परिवार में पिता-पुत्र की मौत हो गई है. महिला समेत दो बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गये. बताया जा रहा है कि बुधवार को मृतक शंकरलाल गांव नारौठा से मैक्रोनी लाये थे. पूरे परिवार ने मैक्रोनी बनाकर खाई थी, जिसके बाद शंकरलाल और उसके परिजनों की हालत बिगड़ गई. परिजन शंकरलाल का इलाज नरौठा के एक झोलाछाप डॉक्टर से करवाते रहे. गुरुवार को शंकरलाल की मौत हो गई. इसके बाद शंकरलाल के बड़े बेटे रजनीश की हालत बिगड़ गई. झोलाछाप डॉक्टर से फायदा न होने पर उसे रविवार को सीएचसी खुटार लाया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. जिला अस्पताल में इलाज के दौरान रजनीश की मौत हो गई. रजनीश की मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया.

तीनों का चल रहा इलाज
मामले की जानकारी पाकर पुलिस और सीएचसी में तैनात डॉक्टर संजीव मौके पर परिवार के अन्य लोगों का इलाज शुरू किया है. मृतक शंकरलाल के 10 वर्षीय बेट विशाल, 7 वर्षीय बेटी किरन और पत्नी उषा देवी का इलाज उसके घर पर ही किया जा रहा है. खुटार चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि मामला फूड प्वाइजनिंग का लग रहा है, बीमारों को इलाज दिया जा रहा है.

UP जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: सपा को तगड़ा झटका, 3 प्रत्याशियों ने लिया पर्चा वापस, BJP को मिली जीत

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी काे वोटिंग से पहले बड़ा झटका लगा है. (File Photo: Akhilesh Yadav)

UP Panchayat Elections: पीलीभीत, शाहजहांपुर और बहराइच में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने पर्चा वापस ले लिया. वहीं सहारनपुर में बसपा प्रत्याशी ने नामांकन वापस लिया. इन सभी जगह बीजेपी प्रत्याशी की निर्विरोध जीत हो गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव (Jila Panchayat Adhyaksh Chunav) से बड़ी खबर है. 4 और सीटों पर भाजपा (BJP) को खुली जीत मिल गयी है. यानी इन चार जिलों में भाजपा के प्रतिद्वन्द्वी प्रत्याशियों ने नाम ही वापस ले लिया है. इस वजह से भाजपा का जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिये गये हैं. ये जिले हैं बहराइच (Behraich), पीलीभीत (Pilibhit), शाहजहांपुर (Shahjahanpur) और सहारनपुर (Saharanpur).

बड़ी खबर बहराइच, शाहजहांपुर और पीलीभीत से आयी है. इन जिलों में समाजवादी पार्टी  के प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया है. वहीं सहारनपुर में बसपा प्रत्याशी ने पर्चा वापस ले लिया है. बहराइच में सपा प्रत्याशी नेहा अजीज ने नामांकन के आखिरी दिन अपना पर्चा वापस ले लिया. अपना नाम वापस लेने के बाद भाजपा की कैण्डिडेट मंजू सिंह को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है. जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सर्टीफिकेट भी दे दिया गया है.

ऐसा ही हाल पीलीभीत में भी हुआ है. यहां से सपा समर्थित प्रत्याशी स्वामी प्रवक्तानन्द ने अपना नाम वापस ले लिया है. इन के नाम वापस ले लेना के बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित कर दिया गया है.

UP जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: 21 जिलों में BJP और इटावा में SP की निर्विरोध जीत, 53 पर कड़ा मुकाबला

वहीं शाम होते-होते शाहजहांपुर से भी खबर आ गई कि सपा प्रत्याशी ने पर्चा वापस ले लिया है. यहां बीजेपी जिला पंचायत प्रत्याशी ममता यादव जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित कर दी गई हैं. डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने सर्टिफिकेट देकर यह घोषणा की. दरअसल सपा प्रत्याशी बीनू सिंह न पर्चा वापस ले लिया है.

सहारनपुर में बसपा प्रत्याशी ने लिया पर्चा वापस

वहीं चौथा जिला सहारनपुर रहा, जहां नाम वापस लेने के बाद भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है. सहारनपुर से बसपा के प्रत्याशी जयवीर उर्फ धोनी ने अपना पर्चा वापस ले लिया है. इसके बाद भाजपा के कैण्डिडेट चौधरी मांगेराम को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित कर दिया गया है. सपा और रालोद ने अपना कैण्डिडेट सहारनपुर से नहीं उतारा था.

आजमगढ़ में सपा-भाजपा में मुकाबला

वैसे आजमगढ़ में भी निर्दलीय प्रत्याशी जय प्रकाश यादव ने अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया है. हालांकि मैदान में दो कैण्डिडेट के बचे रहने से चुनाव होगा. अब लड़ाई सपा के विजय यादव और भाजपा के संजय निषाद के बीच होगी.

इस तरह अब भाजपा के 21 कैंडीडेट निर्विरोध निर्वाचित हो गये हैं. जिस दिन पर्चा दाखिल किया जा रहा था, उस दिन 17 जिलों में सिर्फ भाजपा के ही प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था. उन 17 सीटों पर भाजपा को विजयी बढ़त तो मिल ही गयी थी लेकिन, अब चार जिलों से नाम वापस ले लेने के कारण भाजपा की जीत का ग्राफ 21 हो गया है जो निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं. कुल 18 सीटों पर सिर्फ 1 पर्चा दाखिल किया गया था. इटावा में भी सपा के अलावा किसी ने नामांकन नहीं किया था. इस तरह 22 सीटों पर चुनाव नहीं होंगे. अब सिर्फ 53 सीटों पर 3 जुलाई को चुनाव होगा.

UP जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: 21 जिलों में BJP और इटावा में SP की निर्विरोध जीत, 53 पर कड़ा मुकाबला

यूपी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में अब तक 22 सीटों पर परिणाम वोटिंग से पहले ही आ चुका है.

UP Jila Panchayat Adhyaksh Chunav: उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में आज नामांकन के आखिरी दिन कई के नाम वापस लेने से बीजेपी अब तक 21 सीटों पर निर्विरोध काबिज हो चुकी है. वहीं सपा सिर्फ इटावा ही जीत सकी है.

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लखनऊ. इन दिनों उत्तर प्रदेश में चल रहे जिला पंचायत अध्यक्ष (Jila Panchayat Adhyaksh Chunav) के चुनाव के दौरान सूबे की सत्ताधारी पार्टी भाजपा (BJP) और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के बीच जमकर सियासी घमासान हो रहा है. बीजेपी ने आज मंगलवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन तक पहले ही प्रदेश के 20 जिलों में अपने प्रत्याशियो के निर्विरोध निर्वाचन से इस चुनाव में एक बड़ी बढ़त बना ली है. वहीं चुनाव में भाजपा पर सत्ता का दुरूपयोग का आरोप लगाने वाली समाजवादी पार्टी लाख कोशिशों के बावजूद महज इटावा में ही अपने उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित करा सकी है. बाकी अन्य 54 जिलों में भाजपा को अब अधिकतर सीटों पर समाजवादी पार्टी के साथ रायबरेली में कांग्रेस और मथुरा-बागपत में रालोद से टक्कर मिलती नजर आ रही है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश की 75 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिये आज मंगलवार को नामांकन पत्र वापसी की अंतिम तिथि तक 22 जिलों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ है. जिसमें नामांकन के आज अंतिम दिन सहारनपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बहराइच के भी विपक्षी उम्मीदवारो के पर्चा वापस ले लेने से 21 जिलों में भाजपा और 1 इटावा में सपा के उम्मीदवार निर्विरोध जीत गये हैं. लेकिन अन्य 53 जिलों में से 37 जिलों में सिर्फ 2, 11 जिलों में 3, 4 जिलों में 4 और 1 जिले में 5 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है. ऐसे में UP के जिन 38 जिलों में दो-दो उम्मादवारों नें नामांकन किया है. उसमें मथुरा से रालोद, रायबरेली से कांग्रेस और अन्य सभी सीटों पर भाजपा की सपा से ही टक्कर होगी.

प्रदेश के 35 जिलों में भाजपा की सीधे टक्कर सपा से ही है. जिसे देखते हुए सपा और भाजपा अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिये अपने स्तर से हर संभव प्रयास करते नजर आ रहे हैं.

भाजपा का दावा, 90 फीसदी सीटों पर होगी हमारी जीत

सूबे की 21 जिलों में अपने जिला पंचायत अध्यक्षों के निर्विरोध निर्वाचन से भाजपा न सिर्फ खासा खुश नजर आ रही है. बल्कि 3 जुलाई को होने वाले जिला पंचायत चुनाव के पहले ही प्रदेश की 90 फीसदी से अधिक सीटों पर भाजपा के ही जीत का दावा कर रही है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जो गरीबो और किसानों के लिए जो योजनाएं हैं, उन योजनाओं के कारण बीजेपी ने ग्रामीण क्षेत्रो में भी अपना पर्याप्त विस्तार किया है. और पंचायत चुनाव में अपेक्षाकृत एक बड़ी सफलता हासिल की है. लेकिन आज विपक्ष हताश, निराश और परेशान है. जब 3 जुलाई को परिणाम आयेगा तो भाजपा 90 फीसदी सीट जीतती नजर आयेगी.”

कांग्रेस का आरोप- भाजपा नहीं डीएम-एसपी लड़ रहे चुनाव

दूसरी ओर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत कहते हैं, “बीते दिनों उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त हुई है. लेकिन भाजपा अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिय़े सत्ता, धन और बाहुबल का दुरूपयोग कर रही है. खुद को मिली करारी शिकस्त के चलते अब भाजपा ने अपने प्रत्याशियो को जिताने की जिम्मेदारी जिले के डीएम-एसपी को सौप दी है. जिसके बाद अब भाजपा उम्मीदवारों को जिताने के लिये पुलिस-प्रशासन द्वारा या तो विपक्षी जिला पंचायत सदस्यों पर दबाव बनाया जा रहा है. या फिर उन्हे स्थानीय पुलिस द्वारा जबरन उठवा लिया जा रहा है. जो पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक है.”

‘सपा के सदस्यों के घर पर चलवाये जा रहे बुलडोजर’

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सत्ताधारी भाजपा सरकार से मिल रही कड़ी चुनौती से जुडे सवाल पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आनुराग भदौरिया कहते हैं, ”उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने जिला पंचायत अध्यक्षो के जिताने के लिये साम, दाम, दंड-भेद के साथ सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर रही है. सरकार तांडव करवा रही है. हद तो ये कर दी है कि भाजपा के प्रत्याशियो को जिताने के लिये सपा के जिला पंचायत सदस्यों के घरों पर बुलडोजर चलवाकर उनके रास्ते तक को तुड़वा दिया जा रहा है. ये तानाशाही है, ऐसा करके भाजपा लोकतंत्र का गला घोट रही है. आने वाले 2022 के चुनाव में जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी.”

UP की इन 35 सीटों पर सिर्फ भाजपा-सपा में होगी सीधी टक्कर

लखनऊ, हरदोई, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड, बिजनौर, बरेली, पीलीभीत, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रयागराज, अमेठी, बाराबंकी,अम्बेडकरनगर, अयोध्या, बहराईच, बस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र.

UP News: शाहजहांपुर में घोड़ी पर नहीं चढ़ सका नशे में धुत दूल्हा, दुल्हन ने कैंसिल की शादी

घोड़ी पर नहीं चढ़ सका नशे में धुत दूल्हा (सांकेतिक तस्वीर)

दुल्हन (Bride) ने कहा कि जो लड़का अपनी शादी के दिन इतनी शराब पी सकता है कि घोड़ी पर नहीं चढ़ पा रहा. अगर उससे शादी कर ली तो उसकी तो जिंदगी खराब कर देता.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Sahajahanpur) में अपनी शादी में दूल्हा नशे में धुत होने के कारण घोड़ी पर नहीं चढ़ सका, जिसकी वजह से दुल्हन ने शादी से ही इनकार कर दिया. बताया जा रहा है कि एक शादी समारोह के दौरान दूल्हे से इतनी शराब (Drunk Groom) पी ली थी कि वह घोड़ी पर नहीं चढ़ पा रहा था. काफी बार कोशिश करने के बाद दुल्हा घोड़ी से कई बार नीचे गिर गया. शराबी दूल्हे की हालत देख कर दुल्हन ने शादी से इनकार कर दिया. पूरी रात विवाद होता रहा, इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. बाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे का सामान वापस कर दिया. जिसके बाद दूल्हे को बिना दुल्हन ही बारात वापस ले जानी पड़ी. लड़की ने कहा कि शादी के बाद वह उसकी जिंदगी खराब कर देता. अच्छा हुआ जीवन बर्बाद होने से बच गया.

पूरा मामला सदर बाजार के एक मैरिज लॉन का है. जानकारी के अनुसार खुटार के रहने वाली लड़की की शादी सदर बाजार के मैरिज लॉन में होनी थी. शादी की सभी तैयारियां हो चुकी थीं. बारात भी मैरिज हॉल तक पहुंच चुकी थी. दरवाजे के लिए जैसे ही बारात चढ़ने लगी दूल्हे ने घोड़ी पर चढ़ने की कोशिश की. दूल्हा नशे में इतना धुत था कि वह घोड़ी पर नहीं चढ़ सका. ये सब देखकर दुल्हन ने शादी से ही इनकार कर दिया.

दुल्हन पक्ष ने नहीं दर्ज कराया केस
दुल्हन ने कहा कि जो लड़का अपनी शादी के दिन इतनी शराब पी सकता है कि घोड़ी पर नहीं चढ़ पा रहा. अगर उससे शादी कर ली तो उसकी तो जिंदगी खराब कर देता. नशे में लड़खड़ाते दूल्हे को देखकर दुल्हन ने शादी तोड़ दी. इंस्पेक्टर अजय पाल ने बताया कि दुल्हन पक्ष ने इस मामले में कोई भी केस दर्ज नहीं कराया है. दोनों पक्षों के बीच आपस में ही समझौता हो गया. दोनों ने अक दूसरे का दिया सामान भी वापस कर दिया.

शाहजहांपुर: पुलिसकर्मी के Suicide केस में उसकी सिपाही पत्नी और प्रेमी पर FIR

लखनऊ के पुलिस सिपाही की शाहजहांपुर में सुसाइड केस में नया खुलासा हुआ है.  (सांकेतिक तस्वीर)

Shahjahanpur News: सीओ सिटी प्रवीण कुमार ने बताया कि सुसाइड करने वाले सिपाही दिलीप के पिता उम्मेद सिंह की तहरीर पर महिला थाने पर तैनात आंचल नेहरा और उसके दोस्त सिपाही जुबेर खां पर धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले की पुलिस ने लखनऊ (Lucknow) के थाना बाजार खाला में तैनात सिपाही दिलीप सोरेन के सुसाइड (Suicide) के मामले में उसकी पत्नी और उसका प्रेमी जुबेर खान के खिलाफ केस दर्ज किया है. बीते 30 मई की शाम सदर थाना के मोहल्ला ऐमनजई जलालनगर में सिपाही दिलीप ने अपनी पत्नी के दुपट्टे से पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी. उसकी पत्नी आंचल नेहरा महिला थाने पर तैनात है और उसी ने ऐमनजई जालालनगर में किराए पर कमरा ले रखा था.

पुलिसकर्मी की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने दिलीप की पत्नी आंचल नेहरा और उसके दोस्त पुलिसकर्मी जुबेर खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. परिजनों का आरोप है कि आंचल नेहरा और जुबेर खां के नाजायज संबंधों से परेशान होकर पुलिसकर्मी दिलीप ने आत्महत्या की थी.



दिलीप के पिता गाजियाबाद निवासी उम्मेद सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उसने अपने बेटे दिलीप सोरेन की शादी बीते 16 फरवरी को गाजियाबाद की आंचल नेहरा से की थी. आंचल नेहरा इस समय महिला थाने पर तैनात है. इससे पहले आंचल मिर्जापुर थाने पर तैनात थी और उसी थाने पर तैनात कांस्टेबल जुबेर खान से आंचल के नाजायज संबंध हो गए. दोनों का एक साथ बीते 17 मई को शाहजहांपुर स्थानांतरण हुआ था.

पिता ने आरोप लगाया है कि दोनों के बीच नाजायज संबंधों की जानकारी होने पर बेटे दिलीप ने दोनों को समझाया, लेकिन वह नहीं माने. बल्कि दोनों ने दिलीप को अंजाम भुगतने की धमकी दी. उसका बेटा दिलीप पत्नी आंचल और जुबेर खान के नाजायज संबंधों को लेकर काफी परेशान रहता था. यह बात मृतक बेटे ने फोन पर अपने छोटे भाई को बताई थी. बीते 28 मई को दिलीप लखनऊ से पत्नी के किराए पर लिए गए कमरे मोहल्ला एमनजई जलानगर आया. वहां, उसका पत्नी आंचल और जुबेर से झगड़ा हुआ. दोनों से परेशान होकर उसके बेटे दिलीप ने 30 मई की शाम पत्नी के दुपट्टे से फंदा बनाकर फांसी लगा ली.

मामले में सीओ सिटी प्रवीण कुमार ने बताया कि उम्मेद सिंह की तहरीर पर महिला थाने पर तैनात आंचल नेहरा और उसके दोस्त सिपाही जुबेर खां पर धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

UP News: दुबई में बेहतर जॉब के लिए रेणू बनीं आयशा, कुछ दिनों पहले ही हिंदू लड़के से की थी शादी

शाहजहांपुर की रेनू अब आयेशा बन गई है

Shahajahanpur News: दिल्ली में एयरपोर्ट पर काम करने वाली रेणू गंगवार ने बताया कि उन्‍होंने दुबई में जॉब करने के लिए अपना धर्म परिवर्तन कराया है. उनका कहना है कि मुस्लिम होने पर दुबई में एडवांटेज मिलता है.

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शाहजहांपुर. जबरन व फर्जी धर्मांतरण रैकेट (Forceful Conversion Racket) के खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले से धर्म परिवर्तन का एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां एक हिंदू युवती ने जॉब की खातिर मुस्लिम धर्म अपना लिया. दिल्ली में एयरपोर्ट पर काम करने वाली युवती ने बताया कि उन्‍होंने दुबई में जॉब करने के लिए अपना धर्म परिवर्तन कराया है, क्योंकि मुस्लिम होने पर वहां एडवांटेज मिलता है. इसके साथ ही इंडिया में कम सैलरी है, जबकि दुबई के एयरपोर्ट में नौकरी करने पर सबसे अधिक सैलरी मिलती है. बता दें कि युवती की पिछले महीने ही हिंदू लड़के से शादी हुई थी.

मामला थाना तिलहर के कस्बे का है, जहां की रहने वाली युवती रेनू गंगवार ने अपना धर्म हिंदू से मुस्लिम में परिवर्तन कराया है. दिल्ली एयरपोर्ट पर टिकट रूम में काम करने वाली लड़की रेणू गंगवार का कहना है कि उन्‍होंने दुबई में जॉब करने के लिए अपना धर्म परिवर्तन कराया है. उनका कहना है कि एयरपोर्ट में उन्‍होंने अप्लाई किया है, जहां मुस्लिम लड़कियों को ज्यादा बेनिफिट दिए जाते हैं. ऐसे में उन्‍होंने अपना धर्म परिवर्तन कराया है. फिलहाल उनके इस बयान पर किसी को यकीन नहीं हो रहा है. उनका कहना है कि उन्‍होंने अपने माता-पिता की सहमति से ही धर्म बदला है और उन्‍हें किसी तरह की ग्लानी भी नहीं है. अभी पिछले महीने ही उनकी शादी हिंदू लड़के से हुई है. लड़का मुंबई में जॉब कर रहा है.

रेनू  से बानी आयेशा अल्मी
धर्मांतरण कार्ड के मुताबिक रेणू गंगवार अब आयेशा अल्मी हैं और उनका धर्म इस्लाम है. जॉब के लिए धर्मांतरण का यह अनोखा मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, यूपी एटीएस द्वारा जबरन धर्मांतरण रैकेट के खुलासे के बाद अब उसके हाथ वे दस्तावेज लगे हैं, जिनमें आरोपी जहांगीर काजी और उमर गौतम ने एक हजार लोगों का धर्मांतरण करवाया है.

Shahjahanpur News: पुलिस मुठभेड़ में 15 बदमाश गिरफ्तार, लग्जरी कार समेत 19 लाख की ज्वेलरी बरामद

पुलिस मुठभेड़ में 15 बदमाश गिरफ्तार

शाहजहांपुर (Shahjahanpur) के एसपी (SP) एस.आनंद ने बताया कि कटरा पुलिस ने इन शातिर अपराधियों के पास से चोरी के करीब 19 लाख रुपए के सोने- चांदी के जेवर बरामद किये हैं.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले में रविवार को पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी. जहां एसओजी और कटरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने अंतरराज्यीय 15 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने उनके पास से 19 लाख की ज्वेलरी, लग्जरी कार, बाइक, 10 तमंचे और कारतूस बरामद किये हैं. बताया जा रहा है कि यह शातिर बदमाश बिहार, हरियाणा, दिल्ली, यूपी के कई जिलों में सैकड़ों लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं. इन शातिर अपराधियों ने नकबजनी कर पुलिस को लगातार चुनौती दे रहे थे.

मामला थाना कटरा इलाके का है. जहां एसओजी और कटरा पुलिस की संयुक्त टीम ने पुलिस मुठभेड़ में अंतरराज्यीय 15 बदमाशों को गिरफ्तार किया है. घुमंतू पंखियां नाम का यह गिरोह बिहार, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के कई जिलों में चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दे रहे थे. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के अपराधिक रिकार्ड है. इन सभी अपराधियों पर कई जिलों में 10 मुकदमे दर्ज हैं.

UP Board Results 2021: सीएम योगी ने लिया बड़ा फैसला, छात्रों को प्रमोट करने के फॉर्मूले को दी मंजूरी

शाहजहांपुर के एसपी एस.आनंद ने बताया कि कटरा पुलिस ने इन शातिर अपराधियों के पास से चोरी के करीब 19 लाख रुपए के सोने- चांदी के जेवर बरामद किये हैं. बताया जा रहा है कि यह पूरा गैंग सड़कों पर चलते ही भाप लेता था कि कहां पर रात में चोरी करनी है. गैंग घर में पहुंचकर सीधे जेवरों पर ही हाथ साफ कर रफूचक्कर हो जाता था. एसपी के मुताबिक बिहार, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के सैकड़ों जिलों में नकबजनी और चोरी कर करोड़ों रुपए के जेवरों पर हाथ साफ कर चुके हैं.

सर्राफा कारोबारी धर्मेंद्र गिरफ्तार
घुमंतू, पंखिया नाम का यह गिरोह थाना गढ़िया रंगीन के एक सर्राफा व्यापारी कल्लू उर्फ धर्मेंद्र को चोरी के जेवरों को बेचता था. पुलिस ने सर्राफा कारोबारी धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा है. बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र भी शातिर अपराधी है और क्राइम कर आड़ में सर्राफा व्यवसाय कर रहा था. चोरी के जेवरातों को छुपाने के लिए वह अपना व्यवसाय कर रहा था. बता दें कि शाहजहांपुर में थाना मदनापुर गढ़िया रंगीन और तिलहर इलाकों में यह गैंग परिवार सहित रहता है. इस गैंग की महिलाएं तो घरों में दिखती हैं लेकिन सभी घरों के आदमी कई राज्यों में सक्रिय होकर चोरी की घटना को अंजाम देते है.

UP: जितिन प्रसाद ने सीएम योगी से की मुलाकात, बोले- जीवन भर BJP का एक कार्यकर्ता बनकर करूंगा काम

जितिन प्रसाद ने सीएम योगी से की मुलाकात

पहली बार लखनऊ (Lucknow) पहुंचे बीजेपी नेता जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने कहा कि देश का भला एक ही व्यक्ति पीएम मोदी ही कर सकते हैं. प्रसाद ने कहा कि भाजपा से मिला प्यार-सम्मान को मैं कभी नहीं भूलूंगा.

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लखनऊ. बीजेपी (BJP) में शामिल होने के बाद शनिवार को पहली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) लखनऊ पहुंचे हैं. जितिन भाजपा प्रदेश कार्यालय से निकल कर सीधे मुख्यमंत्री आवास पर सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से मुलाकात की. बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच शिष्टाचार भेंट थी. इस मौके पर जितिन प्रसाद ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के कुशल निर्देशन में जो योजनाएं प्रदेश में चल रही हैं उन सभी योजनाओं तक जनमानस तक पहुंचने का काम करूंगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी पार्टी देश की पार्टी है और राष्ट्रीय पार्टी है और सिर्फ यही देश की एक पार्टी रह गई है. इस पार्टी में एक आम आदमी भी रह सकता है और काम कर सक सकता है यहां पर कार्यकर्ताओं को भी सुना जाता है.

जितिन प्रसाद ने कहा है कि मुझे कार्यकर्ता के तौर पर बड़ी ज़िम्मेदारी देने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं. मैं कार्यकर्ता के रूप सरकार के कामकाज को आगे बढ़ाने का काम करूंगा. प्रसाद ने कहा कि मैंने अपने समर्थकों से विचार करके ये फैसला लिया है. यहां जब मैं आ रहा था तो लोगों ने बहुत उत्साह और सम्मान दिया. मैं जीवन भर एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करूंगा.

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पहली बार लखनऊ पहुंचे बीजेपी नेता जितिन प्रसाद ने कहा कि देश का भला एक ही व्यक्ति पीएम मोदी ही कर सकते हैं. प्रसाद ने कहा कि भाजपा से मिला प्यार-सम्मान को मैं कभी नहीं भूलूंगा. जितिन प्रसाद को अपने पाले में करने के पीछे ब्राह्मण पॉलिटिक्स ही माना जा रहा है. गौरतलब है कि बीजेपी के राष्ट्रीय महामंंत्री संंगठन बीएल संतोष और यूपी प्रभारी राधामोहन सिंह 21 जून को लखनऊ पहुंच रहे हैं. बैठकों का दौर चलेगा जिसमें दिल्ली के निर्देश पर रुपरेखा तय की जाएगी और जितिन प्रसाद की जिम्मेदारियां भी निर्धारित होंगी. कहा जाता है कि बीएल संतोष के लखनऊ दौरे के बाद ही जितिन प्रसाद के ज्वाइनिंग पर मुहर लगी थी. (इनपुट- अजीत सिंह/ अनामिका सिंह)

केदारनाथ दर्शन के लिए प्रयागराज से 1100 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़ा है ये युवा

UP: प्रयागराज के धीरज मिश्रा पैदल ही 1100 किलोमीटर दूर केदारनाथ की यात्रा पर निकल पड़े हैं.

Shahjahanpur: प्रयागराज के रहने वाले धीरज मिश्रा केदारनाथ की यात्रा पैदल चलने की ठानी है. वह सुबह और शाम करीब 40 किलोमीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं. 10 दिन बाद वह शाहजहांपुर पहुंचे हैं.

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शाहजहांपुर. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. प्रयागराज (Prayagraj) के रहने वाले धीरज मिश्रा ने ऐसा ही कुछ करके दिखा रहे हैं. उन्होंने अपने हौसले से प्रयागराज से केदारनाथ (Kedarnath) की यात्रा शुरू की है. पिछले 10 दिनों के बाद वह शाहजहांपुर (Shahjahanpur) पहुंचे हैं. देर शाम को एक बार फिर शाहजहांपुर से केदारनाथ की यात्रा पर निकल पड़े हैं. उनका कहना है कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ अपने अंदर छिपी प्रतिभा दिखाने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं.

प्रयागराज के रहने वाले धीरज मिश्रा केदारनाथ की यात्रा पैदल चलने की ठानी है. वह सुबह और शाम करीब 40 किलोमीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं. 10 दिन बाद वह शाहजहांपुर पहुंचे हैं. धीरज मिश्रा का कहना है कि वह प्रकृति और अपने अंदर छिपी प्रतिभा को दिखाने के लिए यह मुहिम शुरू की है हर इंसान के अंदर प्रतिभा छुपी होती है. यदि इंसान कुछ करने की ठान ले तो हर किसी का संकल्प पूरा होता है. इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रकृति को नजदीक से समझ रहे हैं. वहीं अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शन करने का एक प्लेट फॉर्म भी मिल रहा है.

दरअसल धीरज मिश्रा अपनी गाड़ी से कई बार केदारनाथ की यात्रा कर चुके हैं. उन्हें भगवान शिव से प्रेरणा मिली कि एक बार वह पैदल यहां जरूर आएं. इस संकल्प लेकर धीरज मिश्रा ने यह पदयात्रा शुरू कर लोगों के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है. अपने हौसलों को दिखाकर वह लगातार पैदल यात्रा कर रहे हैं. करीब 1107 किलोमीटर की यात्रा वह 1 महीने में पूरी कर पाएंगे. रोजाना 40 किलोमीटर चलने के बाद विश्राम करते हैं. इस दौरान उनकी सारी थकान भी मिट जाती है.

रेलवे में सिग्नल ऑपरेटर के बेटे धीरज मिश्रा धूमनगंज के रहने वाले हैं. उन्होंने यह यात्रा 4 जून की सुबह से शुरू की थी. धीरज मिश्रा स्पोर्ट्स के सामान का कारोबार करते हैं और वह खेलो से भी जुड़े हुए हैं. ऐसे में उन्होंने अपने शरीर में स्टैंमिना भी विकसित किया है. इसी ताकत के चलते वह अपने संकल्प को पूरा कर पा रहे हैं. अपनी इस यात्रा के जरिए वह लोगों को संदेश दे रहे हैं कि वह प्रकृति के साथ जुड़े. जिसके चलते न केवल वह है अपने शरीर और मन को प्रसन्न रख सकेंगे बल्कि अपने हर संकल्प को पूरा करने में सक्षम भी हो सकेंगे.

UP: जितिन प्रसाद को यूपी में मंत्री बनाये जाने की हैं सिर्फ अटकलें, या फिर भाजपा की कोई मजबूरी?

जितिन प्रसाद को यूपी में मंत्री बनाये जाने की हैं सिर्फ अटकलें (File photo)

दूसरे दलों से आये दूसरे नेता पहले से ही लाइन में लगे हैं. नरेश अग्रवाल और अमेठी के डॉ. संजय सिंह (Dr. Sanjay Singh) अभी उम्मीद ही लगाये बैठे हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मिशन-2022 की तैयारियों में जुटी बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेल है. कांग्रेस और ब्राम्हणों के कद्दावर नेता जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) बुधवार को कांग्रेस और गांधी परिवार से अपने 3 पीढ़ियों पुराना नाता तोड़ बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया है. जितिन के भाजपा में आते ही उनके मंत्री बनाये जाने की अटकलें तेज हो गयी हैं. कहा ये जा रहा है कि जितिन प्रसाद जल्दी ही होने वाले मंत्रिमण्डल विस्तार में शपथ लेंगे. अगले महीने होने वाले एमएलसी के चुनाव में वे विधायक भी बन जाएंगे. तर्क ये दिया जा रहा है कि यूपी में नाराज ब्राह्मणों को साधने के लिए पार्टी ऐसा कर सकती है.

अब सवाल ये उठता है कि जितिन को मंत्री बनाने की सिर्फ अटकलें तेज हुई हैं या फिर वास्तव में भाजपा ऐसा करने को मजबूर है. वरिष्ठ पत्रकार किशोर निगम ने कहा कि जितिन प्रसाद का भाजपा ने इतनी जल्दी समायोजन हो पाये, ये फिलहाल संभव नहीं दिखाई देता. दूसरे दलों से आये दूसरे नेता पहले से ही लाइन में लगे हैं. नरेश अग्रवाल और अमेठी के डॉ. संजय सिंह अभी उम्मीद ही लगाये बैठे हैं. जितिन की ये उम्मीद हो सकती है कि पार्टी उन्हें 2022 में होने वाले राज्यसभा के चुनाव के बाद दिल्ली भेज दे. एक बार दिल्ली की जो राजनीति कर लेता है उसे स्टेट पॉलिटिक्स में मजा नहीं आता है.

UP: 2024 तक पूरा हो जाएगा अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, तीन तरह के पत्थरों का होगा प्रयोग

उधर, भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने इस मामले पर गोलमोल जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संगठन ये तय करता है कि किसी भी कार्यकर्ता का कैसा उपयोग करना है. जितिन के मंत्री बनाये जाने से पार्टी को दूसरे ब्राह्मण नेता क्या नाराज नहीं हो जाएंगे? इस सवाल के जवाब में शुक्ला ने कहा कि संगठन जो भी फैसला लेता है उससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता ही है.



पीएम नरेंद्र मोदी के खास AK शर्मा
दूसरी तरफ मऊ वाले अरविंद शर्मा तो एमएलसी भी बन गये. उनके मंत्री बनने की अटकलें उनके यूपी आने से पहले ही शुरु हो गयी थीं जो अभी भी जारी हैं. उन्हें प्रधानमंत्री का खास माना जाता है क्योंकि वे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात भी रहे और दिल्ली भी. अभी तो उन्हें ही समायोजित नहीं किया जा सका है. कुछ और बातों पर गौर करते हैं. मौजूदा योगी सरकार के ढ़ाचे को देखकर ऐसा नहीं लगता कि सत्ता में ब्राह्मणों की हिस्सेदारी में कोई कमी है. मंत्रिपरिषद हो या फिर नौकरशाही, ब्राह्मण वर्ग का दबदबा बरकरार है. बात सबसे पहले मंत्रियों की करते हैं.

ब्राह्मण वर्ग को मिला सम्मान
बता दें कि योगी मंत्रिपरिषद में कुल 53 मंत्री अभी हैं. इनमें से 9 मंत्री पदों पर ब्राह्मण वर्ग के नेता विराजमान हैं. दिनेश शर्मा डिप्टी सीएम के पद पर हैं. नौकरशाही में ही ब्राह्मण वर्ग को किनारे नहीं रखा गया है. मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी और डीजीपी एचसी अवस्थी ब्राह्मण वर्ग से हैं. इनके अलावा योगी सरकार में सबसे मजबूत अफसर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ही माने जाते हैं जो एक ब्राह्मण हैं.

राम प्रसाद 'बिस्मिल' जयंती विशेष: मिट जाए जब मिटने वाला फिर सलाम आए तो क्या…

अमर शहीद राम प्रसाद 'बिस्मिल' का जन्‍म 11 जून 1897 को उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था और उन्‍हें 19 दिसम्‍बर 1927 को फांसी दे दी गई थी.

मैनपुरी व काकोरी काण्ड जैसी कई घटनाओं के प्रमुख किरदार राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ स्‍वतंत्रता आंदोलन में क्रांति की धारा के प्रमुख अंग थे तो दूसरी तरफ कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी व इतिहासकार के रूप में उनका परिचय गहरा और विराट है.

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30 वर्ष की छोटी सी उम्र में देश की आजादी के लिए फांसी चढ़ गए अमर शहीद राम प्रसाद 'बिस्मिल' की 11 जून को जयंती है. उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 11 जून 1897 में जन्‍मे राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ को 19 दिसम्‍बर 1927 को फांसी दे दी गई थी. मैनपुरी व काकोरी काण्ड जैसी कई घटनाओं के प्रमुख किरदार राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ स्‍वतंत्रता आंदोलन में क्रांति की धारा के प्रमुख अंग थे तो दूसरी तरफ कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी व इतिहासकार के रूप में उनका परिचय गहरा और विराट है.

बिस्मिल उनका उर्दू तखल्लुस (उपनाम) था मगर वे ‘राम’ और ‘अज्ञात’ के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे. वे ‘बिस्मिल’ थे. जिसका हिन्दी में अर्थ होता है आहत या जख्‍मी. जिसे आमतौर प्रेमी का पर्याय माना जाता है. बिस्मिल यानि आजादी के प्रेमी. क्‍या ही उपनाम है और क्‍या ही है उससे जुड़ा एक संयोग है. बिस्मिल की एक चर्चित और अंतिम रचना सिर्फ इसलिए जेल के बाहर जा सकी थी कि जज ने उसे प्रेमी का ख्‍याल समझा, जबकि वह तो अमर क्रांतिकारी का अपने साथियों को उलाहना था.

यह काकोरी कांड में गिरफ्तार होने के बाद की बात है. क्रांतिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' पर मुकदमा दायर हो चुका था. बिस्मिल ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध क्रांति जारी रखना चाहते थे. इसके लिए उनका जेल से बाहर आना आवश्‍यक था. उन्हें जेल से छुड़ा लेने के प्रयासों में देरी देख बिस्मिल ने जेल के भीतर से एक ग़ज़ल लिख कर उलाहना भेजा था. मजिस्ट्रेट ने इसे इश्क़ का पैगाम समझ कर बाहर भेजने की अनुमति दे दी थी. उनकी यह अंतिम रचना थी :

मिट गया जब मिटने वाला फिर सलाम आया तो क्या,
दिल की बर्बादी के बाद उनका पयाम आया तो क्या?

मिट गईं जब सब उम्मीदें मिट गए जब सब ख़याल,
उस घड़ी गर नामावर लेकर पयाम आया तो क्या?

ऐ दिले-नादान मिट जा तू भी कू-ए-यार में ,
फिर मेरी नाकामियों के बाद काम आया तो क्या?

काश! अपनी जिंदगी में हम वो मंजर देखते,
यूँ सरे-तुर्बत कोई महशर-खिराम आया तो क्या?

आख़िरी शब दीद के काबिल थी 'बिस्मिल' की तड़प ,
सुब्ह-दम कोई अगर बाला-ए-बाम आया तो क्या?


इस रचना के माध्‍यम से खुद को छुड़ाने की कोशिशों को तेज करने का संदेश इस उलाहने के साथ भेजा गया था कि देरी से हुए प्रयास किस काम आएंगे?

राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने सन् 1916 में 19 वर्ष की आयु में क्रांति मार्ग पर कदम रखा था. 30 वर्ष की उम्र तक 11 सालों के दौरान उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित किया. उल्‍लेख किया जाता है कि अपनी किताबों के विक्रय से मिले पैसों से उन्‍होंने ब्रिटिश राज में क्रांति जारी रखने के लिए हथियार खरीदे. राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के पूरे जीवन का उद्देश्‍य केवल आजादी था.

वे अपने अन्‍य साथियों की तरह आजादी की तमन्‍ना में जिये और फिर उस चाहत को पूरा करने की दिशा में प्राण न्‍योछावर कर दिए. शहादत के 94 सालों बाद आज जब उनकी जयंती पर याद करते हैं तो कुछ सवाल सोचने पर विवश कर देते हैं. हम ठहर कर विचार करना होगा कि राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ जैसे अनगिनत शहीदों ने जिस आजादी की उम्‍मीद और कल्‍पना की थी उसे पा कर हम अभी कहां हैं?

आजादी के लिए बेकरार राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने अपनी गजल ‘क्रांति गीतांजली’ में लिखा था :



मादरे-हिन्द गमगीन न हो अच्छे दिन आने वाले हैं,
आज़ादी का पैगाम तुझे हम जल्द सुनाने वाले हैं.

हिन्दू औ' मुसलमाँ मिलकर के जो चाहें सो कर सकते हैं,
अय चर्खे-कुहन हुशियार हो तू पुरजोर हमारे नाले हैं.

(चर्खे-कुहन=कालचक्र, नाले=इरादे)


मग्लूब हैं जो होंगे ग़ालिब महकूम हैं जो होंगे हाकिम,
कब एक-सा दौर रहा किसका कुदरत के तौर निराले हैं.
(मग्लूब=निर्धन, ग़ालिब=शक्तिशाली, महकूम=नौकर/दास, हाकिम=अफसर)


मग्‍लूब के गालिब बनाने के लिए कितने ही नारे लगे, कितने ही अभियान चले मगर खुद पूछिए क्‍या वे गालिब हो पाए? क्‍या महकूम हो पाए हैं हाकिम?

अमीर शहीद बिस्मिल के मशहूर उर्दू मुखम्मस बहुत चर्चित हैं. माना जाता है कि मुखम्मस की उत्पत्ति फ़ारसी भाषा से हुई है. इसमें प्रत्येक चरण 5-5 पंक्ति का होता है. बिस्मिल अपने मुखम्मस ‘जज्वये-शहीद’ यानि बिस्मिल की तड़प में लिखते हैं :

हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रह कर,
हमको भी पाला था माँ-बाप ने दुःख सह-सह कर ,
वक्ते-रुख्सत उन्हें इतना भी न आये कह कर,
गोद में अश्क जो टपकें कभी रुख से बह कर ,
तिफ्ल उनको ही समझ लेना जी बहलाने को!


यूं तो हमें स्‍वतंत्र हुए 75 वर्ष होने को आए हैं मगर आजाद ख्‍यालों और सत्‍ता पर उठते सवालों के बीच अभिव्‍यक्ति को कैद करने के प्रयास सतत हो रहे हैं. विडंबना यह है कि कई लोग हैं जो लोकतंत्र को अनुपयुक्‍त करार देते हुए सैन्‍य अनुशासन की पैरवी करते हैं. कहा जाता है कि आजादी हम से संभाली नहीं जा रही है. प्रतिबंध ही हमें सलीके में रख सकता है. बल प्रयोग से ही अनुशासन आता है. इस सोच को विकसित कर नैपथ्‍य में विरोध के स्‍वरों पर लगाम लगाने के भरसक प्रयोग होते हैं. क्‍या यह वह ढंग नहीं है जिसके लिए राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने लिखा था :

सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी,
वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं.


‘बिस्मिल’ ने लिखा था – ‘काश! अपनी जिंदगी में हम वो मंजर देखते...’. क्‍या यह वह मंजर है जिसके लिए वे जिये और शहीद हुए? देश के हालातों को देख कर कई बार सवाल उठता है क्‍या इस आजादी के लिए लाखों शहीदों ने जीवन आहूति दी थी? क्‍या हमारा समाज इस लोकतांत्रिक मूल्‍यों को वहन करने में समर्थ है? बीते दिनों कोरोना महामारी के दौरान मौत के तांडव के बीच हमने लूट, मुनाफाखोरी और अमानवीयता को हदें पार करते देखा है. क्‍या इस माहौल के बीच शहीदों ने यह न सोचा होगा – ‘हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रह कर…’.

आह के कातर स्‍वरों के बीच उम्‍मीद की महीन ही सही मगर उजली रेख यह थी कि कई युवाओं ने मिल कर या एकल प्रयत्‍नों के जरिए सहायता के हाथ बढ़ाए. शायद ऐसे ही युवाओं के लिए बिस्मिल ने लिखा था :

नौजवानो! यही मौका है उठो खुल खेलो,
खिदमते-कौम में जो आये वला सब झेलो,
देश के वास्ते सब अपनी जबानी दे दो,
फिर मिलेंगी न ये माता की दुआएँ ले लो,
देखें कौन आता है ये फ़र्ज़ बजा लाने को?


लोकतंत्र हमें सवाल उठाने का मौका देता है और इस बहाने सही और गलत का फैसला व्‍यापक बहस से किया जा सकता है. आजादी के दीवानों को उनकी जयंती पर याद रखने का इससे बेहतर तरीका क्‍या हो सकता है कि हम खुद को और अपने तंत्र को टटोलें. देखें कि हम किस दिशा में जा रहे हैं? भविष्‍य के लिए कौन सी इबारत लिख रहे हैं?

जितिन प्रसाद का कांग्रेस छोड़ना, क्या पार्टी के दूसरे ब्राह्मण नेताओं पर पड़ेगा असर?

जितिन प्रसाद के भाजपा ज्वाइन करने के बाद क्या कांग्रेस के ब्राह्मण नेताओं पर असर पड़ेगा?

UP News: कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा मोना ने जितिन प्रसाद पर जबरदस्त हमला बोला है. मोना मिश्रा कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता भी हैं. उन्होंने कहा कि जितिन ने उस भाजपा को ज्वाइन किया है, जिसे वे ब्राह्मण विरोधी करार देते रहे हैं.

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लखनऊ. कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं. उनकी गिनती ऊंची हैसियत वाले ब्राह्मण नेताओं में होती रही है. हालांकि उनकी इस हैसियत के पीछे उनके पिता की राजनीतिक विरासत ज्यादा जिम्मेदार रही है. लम्बे समय से ब्राह्मणों की राजनीति करने वाली कांग्रेस से एक ब्राह्मण नेता अलग हो गया है. पिछले एक साल से जितिन यूपी में ब्राह्मणों को गोलबन्द करने के लिए ब्राह्मण चेतना परिषद को सक्रिय किये थे. अब उनके जाने के बाद कांग्रेस के दूसरे ब्राह्मण नेता क्या सोचते हैं?

कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा मोना ने जितिन प्रसाद पर जबरदस्त हमला बोला है. मोना मिश्रा कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता भी हैं. उन्होंने कहा कि जितिन ने उस भाजपा को ज्वाइन किया है, जिसे वे ब्राह्मण विरोधी करार देते रहे हैं. यूपी में कमलेश तिवारी हत्याकांड के साथ साथ कई मौकों पर जितिन ने यूपी की योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी करार दिया था. अब उन्हीं के खेमे में खड़े हैं. जितिन को कांग्रेस पार्टी से जितना लेना था, ले चुके हैं. अब पार्टी की उन्हें क्या जरूरत? जिस ब्राह्मण चेतना परिषद के जितिन प्रसाद संरक्षक हैं, उसके ट्विटर हैंडल पर अनगिनत ऐसे ट्वीट पड़े हैं, जिसमें इस बात का जिक्र है कि सूबे की योगी सरकार में ब्राह्मणों पर अत्याचार थम नहीं रहा है. अब सवाल उठता है कि जितिन प्रसाद अपने इस अभियान को आगे कैसे बढ़ायेंगे? जाहिर है उन्हें अपना स्टैण्ड बदलना पड़ेगा.

कांग्रेस से एक ब्राह्मण नेता के चले जाने से पार्टी  के बाकी ब्राह्मण नेताओं में तो खुशी ही होगी. इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि जितिन के जाने-आने से कोई फर्क थोड़ी पड़ता है. वे अपने काम से काम रखते थे. कौन सा वो पार्टी का काम करते थे. वे लम्बे समय से शरीर से कांग्रेस के साथ थे लेकिन मन से नहीं. वे पिछले एक साल से ब्राह्म्णों को गोलबन्द करने के लिए ब्राह्मण चेतना परिषद चला रहे हैं. लेकिन, जब सत्ता में थे तब ब्राह्मणों के लिए क्या कर लिये? जितिन साल भर से ये सारा कुछ इसलिए कर रहे थे जिससे अपनी कुछ राजनीतिक ताकत दिखाकर किसी पार्टी को अपनी ओर खींच सके. बाकी वो कभी पॉलिटिकल व्यक्ति लगे ही नहीं. बीजेपी ने उन्हें इसलिए थाम लिया क्योंकि योगी सरकार पर लगते रहे ब्राह्मण विरोधी के आरोपों को थोड़ा हल्का किया जा सके.

लगातार हार के बाद कांग्रेस में हाशिए पर थे

जितिन प्रसाद दो बार के सांसद रहे हैं. उन्हें मनमोहन सिंह सरकार में चार मंत्रालयों में केन्द्रीय मंत्री रहने का सौभाग्य भी मिला था. संकट ये खड़ा हो गया कि 2009 के बाद से वे कोई चुनाव नहीं जीत पाये. 2009 लोकसभा हारे. 2017 यूपी विधानसभा हारे. फिर 2019 लोकसभा हारे. जितिन कांग्रेस में भले ही थे लेकिन पिछले दो सालों के दरम्यान उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में सक्रियता से नहीं देखा गया.

बीजेपी का दांव, क्या जितिन प्रसाद नाराज ब्राह्मणों को एक साथ ला पाएंगे?

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है. इसे लेकर कई सवाल चर्चा में हैं.

Lucknow News: जितिन प्रसाद ब्राह्मण चेतना परिषद के बैनर तले कानपुर के बिकरु कांड में जेल में बंद खुशी दुबे के लिए अभियान भी चला रहे थे. सवाल ये है कि क्या उस अभियान को अब भी चलाएंगे?

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में जिन्होंने ब्राह्मणों को न्याय दिलाने के लिए ब्राह्मण चेतना परिषद बनाया. अब उन्हीं जितिन प्रसाद के हाथ में कमल का फूल है. सवाल ये है कि क्या जितिन उन ब्राह्मणों को न्याय दिला पाएंगे? क्या जितिन प्रसाद बीजेपी से नाराज ब्राह्मणों को एक साथ ला पाएंगे?  एक समय था, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने ब्राह्मणों पर उत्तर प्रदेश में अत्याचार होने की बात कही थी. उनको न्याय दिलाने के लिए प्रसाद ने जब कमल का फूल थामा तो राष्ट्रवाद की बात कर रहे थे. इससे पहले तक वे केवल ब्राह्मणों की बात कर रहे थे.

ब्राह्मण चेतना परिषद के बैनर तले जितिन प्रसाद बिकरु कांड में जेल में बंद खुशी दुबे के लिए अभियान भी चला रहे थे. सवाल ये है कि क्या उस अभियान को अब भी चलाएंगे? बीजेपी के प्रवक्ता हीरो वाजपेयी कहते हैं कि यहां केवल ब्राह्मणवाद की बात नहीं है बल्कि राष्ट्रवाद की बात है. बीजेपी सभी वर्ग धर्म जाति संप्रदाय को लेकर चलती है और यही कारण है कि बीजेपी का नारा है- सबका साथ, सबका विकास. उन्होंने कहा कि जब जितिन प्रसाद जनता के लिए काम करेंगे तो वे केवल ब्राह्मणों के लिए नहीं बल्कि सबका साथ सबका विकास करेंगे.

बीजेपी के दूसरे प्रवक्ता मनीष शुक्ला कहते हैं कि जिस भी व्यक्ति के लिए नेशन फस्ट होगा, जिसकी सोच में राष्ट्र होगा. जिसकी सोच में समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचे, वो समाया होगा, उसके लिए भारतीय जनता पार्टी ही एक मात्र प्लेटफार्म है. य़ही कारण है कि जितिन प्रसाद ने बीजेपी ज्वाइन किया है कि क्योंकि उन्होंने अपना सोच बदल दिया है. सोच बदलने के कारण ही वे पार्टी में शामिल हुए हैं.

यानी कि अब जितिन प्रसाद के लिए राष्ट्रवाद पहले है, तो फिर क्या होगा ब्राह्मण चेतना परिषद का? क्या जितिन प्रसाद की ब्राह्मणों को न्याय दिलाने की गाड़ी उसी स्पीड से दौड़ेगी? जिस स्पीड से कांग्रेस में रहने के दौरान दोड़ रही थी. जितिन प्रसाद ब्राह्मणों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे? देखना ये भी होगा कि उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण पॉलिटिक्स में जितिन प्रसाद का क्या रोल रह जाता है?
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