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Yogi Cabinet Expansion: UP के बड़े सियासी घराने से हैं जितिन प्रसाद, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से है ये रिश्ता...

Yogi Cabinet Expansion: जितिन प्रसाद के परिवार की तीन पीढ़ियां कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में रही हैं.

Yogi Cabinet Expansion: जितिन प्रसाद के परिवार की तीन पीढ़ियां कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में रही हैं.

UP News: 2 दशक पहले कांग्रेस पार्टी की यूथ विंग से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले जितिन प्रसाद ने बीजेपी ज्वाइन कर अपनी एक नई सियासी यात्रा का आगाज किया है.

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शाहजहांपुर. पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) को आज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री (Yogi Cabinet Expansion) बनाया जा रहा है. बीजेपी के इस कदम को यूपी में ब्राह्मण सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है. बता दें उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं. वैसे शाहजहांपुर (Shahjahanpur) के जितिन प्रसाद को राजनीति विरासत में मिली है. पिता राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार थे, खुद एचआरडी राज्यमंत्री रहे. कांग्रेस पार्टी के चर्चित चेहरे रहे जितिन प्रसाद अब बीजेपी के हिस्से आ गये हैं. जितिन प्रसाद के परिवार की तीन पीढ़ियां कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में रही हैं.

जितिन प्रसाद के बाबा ज्योति प्रसाद और पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस पार्टी के नेता थे. जितिन प्रसाद खुद मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री रह चुके हैं. 2 दशक पहले कांग्रेस पार्टी की यूथ विंग से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले जितिन प्रसाद ने बीजेपी ज्वाइन कर अपनी एक नई सियासी यात्रा का आगाज किया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा की मौजूदगी में जितिन प्रसाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं.

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जितिन प्रसाद को यूपी में कांग्रेस के चर्चित युवा चेहरों में से एक कहा जाता था. वो राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक रहे और प्रदेश में ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में कांग्रेस उन्हें एक बड़े चेहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी. प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व कांग्रेसी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे.

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जितिन प्रसाद का जन्म 29 नवंबर 1973 में यूपी के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले में हुआ था. जितिन प्रसाद के बाबा ज्योति प्रसाद भी कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता थे. जितिन की परदादी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी थीं. दून स्कूल और दिल्ली के प्रसिद्ध श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से शिक्षा हासिल करने वाले जितिन प्रसाद ने साल 2001 में कांग्रेस की यूथ विंग का जनरल सेक्रेटरी बनकर अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी.

मनमोहन सरकार में कई विभागों के मंत्री रहे

2004 में जितिन प्रसाद ने पहली बार धौरहरा सीट से चुनाव लड़ा और इसके बाद वो 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में इस्पात राज्यमंत्री बने. 2009 में शाहजहांपुर के सुरक्षित लोकसभा सीट होने के बाद जितिन ने धौरहरा सीट से चुनावी दावेदारी की और विजयी हुए.

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यूपीए-2 में उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया. इस दौरान उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए यूपीएससी में अवसरों की संख्या बढ़वाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई.

2014 में हारे लोकसभा चुनाव, लेकिन बने कांग्रेस महासचिव

2014 के लोकसभा चुनाव में जितिन प्रसाद मोदी लहर में चुनाव हार गए. उन्हें बीजेपी की रेखा वर्मा ने पराजित किया. बाद में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें दल का महासचिव बनाया और फिर वह 2020 में पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए. हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस लेफ्ट से गठबंधन के बावजूद कोई खास प्रदर्शन ना कर सकी. इसी दौरान प्रियंका गांधी की यूपी में सक्रियता के वक्त में जितिन प्रसाद कई महत्वपूर्ण मौकों पर उनके सारथी बने दिखे. हाथरस के रेप कांड से लेकर लखनऊ में योगी सरकार के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शनों के दौरान जितिन ने प्रियंका के साथ सक्रिय भूमिका निभाई. इसके अलावा वो ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में भी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे.

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इससे पहले राहुल के ही सबसे करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया था. भाजपा ने सिंधिया को राज्यसभा भेजा था. भाजपा में शामिल होने पर जितिन ने कहा था कि कांग्रेस में रह कर वह जनता के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे थे इसलिए वहां बने रहने का कोई औचित्य नहीं था. उन्होंने कहा, “अब भाजपा वह माध्यम बनेगी. भाजपा में एक सशक्त संगठन और मजबूत नेतृत्व है, जिसकी जरूरत आज देश को है.”

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