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1965 के भारत-पाक युद्ध में गंवाई आंख, अब कोरोना ने छीने 2 बेटे, सुनिए War Hero की गुहार

1965 के भारत-पाक युद्ध में गंवाई आंख, अब कोरोना ने छीने 2 बेटे, सुनिए War Hero की गुहार

शामली में 85 साल के पूर्व फौजी चहिराम अपने पोता-पोती के साथ डीएम कार्यालय पहुंचे हैं.

शामली में 85 साल के पूर्व फौजी चहिराम अपने पोता-पोती के साथ डीएम कार्यालय पहुंचे हैं.

Shamli News: कोरोना वायरस के चलते बर्बाद हुए परिवार को बचाने के लिए एक फौजी चहिराम आज 85 साल की उम्र में शामली के डीएम ऑफिस की चौखट पर पहुंचा है.

शामली. उत्तर प्रदेश के शामली (Shamli) जनपद के एक परिवार पर कोरोना (COVID-19) ने कहर बरपा दिया है. यह 1965 का एक नेत्रहीन वॉर हीरो (War Hero) डीएम से अपने परिवार के भरण पोषण की गुहार लगा रहा है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के साथ हुई 1965 की जंग (1965 Indo-Pak War) में फौजी चहिराम की दोनों आंखे चली गईं लेकिन उसके हौसले पस्त नहीं हुए थे. लेकिन कोरोना के चलते आज फौजी चहिराम सरकार के सामने झोली फैलाकर गिड़गिड़ाने को मजबूर है. कोरोना महामारी की काली परछाई में दो बेटे खो देने के  बाद अब परिवार में केवल बूढ़ा फौजी और उसके दो मासूम पोता-पोती ही बचे हैं. दोनों मासूम पढ़ लिखकर पुलिस ऑफिसर बनना चाहते हैं. लेकिन परवरिश के लिए इनके सामने जिंदगी की परेशानियां मुंह फाड़े खड़ी हुई हैं.

दरअसल शामली जनपद के गांव लिसाढ़ के रहने वाले 85 वर्ष के फौजी चहिराम वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई जंग में लड़ चुके हैं. सेना की आर्डिनेंस कोर में तैनात फौजी चहिराम की जंग के दौरान स्मॉग बम समय से पहले फटने के चलते दोनों आंखे चली गई थीं. इसके बाद 1970 में मेडिकल बोर्ड द्वारा उन्हें घर भेज दिया गया था. फौजी चहिराम बताते हैं कि तीन बेटों में से उनका सबसे बड़ा बेटा देवेंद्र अविवाहित था, जो उनके साथ ही रहता था. दूसरा बेटा रविंद्र अपने परिवार के साथ अलग रहता है. तीसरे बेटे राजीव की पत्नी तीन साल पहले अपने पति और दो बच्चों बेटे अंशुल मलिक (12) और बेटी धनाक्षी (6) को छोड़कर घर से चली गई थी.

25 मार्च 2020 को बेटे राजीव की कोरोना के चलते मेरठ मेडिकल में मौत हो गई थी. इसके बाद बड़ा भाई देवेंद्र अपने पिता और भाई राजीव के दोनों बच्चों के लिए मेहनत मजदूरी कर परिवार चला रहा था. लेकिन 14 जून 2021 को कथित तौर पर कोरोना महामारी के चलते वह भी चल बसा. इसके बाद अब परिवार में सिर्फ नेत्रहीन फौजी और उसके दो पोता-पोती ही बचे हैं.

डीएम ने दिया मदद का आश्वासन

कोरोना महामारी के दौरान कई परिवारों के सामने जिंदगी और मौत की मुश्किलें आ खड़ी हुई हैं. फौजी चहिराम ने बताया कि आंखे चले जाने के बाद उसे बेटों का सहारा था. बेटों के चले जाने के बाद अब वह खुद पर ही बोझ बन गया है. ऐसे में बेटे के दोनों मासूम बच्चों की परवरिश, पढ़ाई और सामाजिक सुरक्षा भी उनके लिए चुनौती बन रही है. फौजी चहिराम इन्हीं सब परेशानियों को लेकर डीएम शामली जसजीत कौर के कार्यालय पर पहुंचे थे. यहां पर डीएम से मिलने का इंतजार कर रहे फौजी अपनी चिंताओं को लेकर रोते-गिड़गिड़ाते हुए नजर आए. डीएम जसजीत कौर ने उनकी समस्याओं को समझते हुए प्रशासनिक तौर पर आवश्यक मदद का रास्ता तैयार करने का आश्वासन दिया.

डीएम आफिस पर अपने बाबा के साथ पहुंचे 12 साल के अंशुल ने बताया कि तीन साल पहले मां उन्हें छोड़कर चली गई है. इसके बाद 25 मार्च 2020 को उसके पापा और बाद में बड़े ताऊ जी भी उन्हें छोड़कर चले गए. जबकि दूसरे ताऊजी परिवार से अलग रहते हैं. अंशुल ने बताया कि वह पढ़ लिखकर पुलिस अफसर बनना चाहता है. अगर सरकार उनकी कोई मदद नहीं करती है तो वह मेहनत करके फिर भी अपना सपना पूरा करेगा.

डीएम ने गठित की टीम

डीएम जसजीत कौर ने प्रोबेशन अधिकारी व एसडीएम की टीम गठित कर इस परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया है. वहीं गांव लिसाड़ में रहने वाले इस परिवार की देखरेख के लिए गार्जियन बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि इस परिवार के रहन-सहन एवं खानपान के इंतजाम को कमी न आये. अब देखना होगा कि नन्हे-मुन्ने मासूम बच्चों की पढ़ाई लिखाई और उनकी सुरक्षा सरकार किस तरह से करा पाती है?

Tags: Corona deaths, COVID 19, Shamli news, UP news, Uttarpradesh news

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