समलैंगिक शादी करना चाहती हैं दो युवतियां, पुलिस से मांगी सुरक्षा

समलैंगिक शादी करने की इच्‍छुक युवतियों ने एसएसपी के पास पहुंचकर सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है. उन्‍होंने दलील दी कि वे दोनों बालिग हैं, लिहाजा उन्‍हें अपने फैसले लेने का अधिकार है. दोनों के परिजन इस संबंध के खिलाफ हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 20, 2019, 4:24 PM IST
समलैंगिक शादी करना चाहती हैं दो युवतियां, पुलिस से मांगी सुरक्षा
थाने में सुरक्षा के लिए पहुंची दोनों युवतियां
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Updated: June 20, 2019, 4:24 PM IST
यूपी के शामली जिले में समलैंगिक (Homosexuality) संबंध का एक मामला सामने आया है. ऊन तहसील क्षेत्र के अलग-अलग गांव की दो युवतियां शादी के बंधन में बंधकर साथ रहना चाहती हैं, लेकिन परिवार से मिल रही जान से मारने की धमकी के बाद दोनों ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है.

साथ काम करती हैं दोनों


दोनों युवतियों ने सुरक्षा के लिए प्रार्थनापत्र लेकर शामली के एसएसपी के दरबार में पहुंचीं. दोनों युवतियां दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करती हैं और पिछले काफी समय से साथ रह रही हैं. अब दोनों शादी के बंधन में बंधना चाहती हैं, लेकिन दोनों के परिजन इस संबंध के खिलाफ हैं. युवतियों का कहना है कि वे बालिग हैं और साथ में रहकर घर चलाने में भी सक्षम हैं. इसीलिए प्रशासन से अपील है कि उन्हें एक साथ रहने दिया जाए और उनकी जानमाल की सुरक्षा प्रदान की जाए. दोनों युवतियों के इस फैसले से क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल गर्म है.

महिला थाने को सौंपी जांच

एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दो लड़कियों द्वारा एक प्रार्थनापत्र पुलिस को दिया गया है. दोनों साथ ही काम करती हैं और साथ रहना चाहती हैं. उन्होंने परिजनों के खिलाफ तहरीर दी है. मामले में महिला थाना प्रभारी को प्रार्थनापत्र सौंप कर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. दोनों के परिजनों से भी बात की जाएगी.

समलैंगिकता अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को लेकर ऐतिहासिक फैसला दिया था. धारा-377 की क़ानूनी वैधता पर फ़ैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि आपसी सहमति से दो समलैंगिकों के बीच बनाए गए संबंध को आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा. तत्‍कालीन चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है. समलैंगिको के भी वही मूल अधिकार हैं जो किसी सामान्य नागरिक के हैं. सबको सम्मान से जीने का अधिकार है.
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(रिपोर्ट: शाहनवाज राणा)

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