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शामली: मदरसे से म्यांमार के 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पुलिस को मिलीं कई चौंकाने वाली सूचनाएं

शामली: मदरसे से म्यांमार के 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पुलिस को मिलीं कई चौंकाने वाली सूचनाएं

पकड़े गए सभी आरोपी फर्जी तरीके से मदरसे में रह रहे थे. ( फाइल फोटो)

पकड़े गए सभी आरोपी फर्जी तरीके से मदरसे में रह रहे थे. ( फाइल फोटो)

पुलिस को कई दूसरे अहम इनपुट भी हासिल हुए हैं, जिनके आधार पर पुलिस आगे की रणनीति तय कर रही है.

    यूपी के शामली जिले में पुलिस ने चार संदिग्ध लोगों को एक मदरसे से गिरफ्तार किया है. पकड़े गए संदिग्धों के कब्जे से पुलिस ने 3 पासपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमाण पत्र, दो भारतीय आधार कार्ड, दो बैंक पासबुक, एक पैन कार्ड, 4 मोबाइल फोन व आठ हजार 30 रुपए की नगदी बरामद की है. पुलिस को कई दूसरे अहम इनपुट भी हासिल हुए हैं, जिनके आधार पर पुलिस आगे की रणनीति तय कर रही है.

    पकड़े गए सभी आरोपी फर्जी तरीके से मदरसे में रह रहे थे. पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर मदरसे में छापेमारी की. पकड़े गए सभी युवक म्यामांर के रहने वाले हैं. सभी संदिग्ध अपनी पहचान छिपाकर यहां रह रहे थे. पुलिस ने साथ ही तीन मदरसा संचालकों को भी हिरासत में लिया है. फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

    कई साल से रह रहा था मजीद
    मामला भवन थाना क्षेत्र के जलालाबाद कस्बे का है. छापेमारी के दौरान पुलिस ने खुशनुमा कॉलोनी से एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए युवक का नाम अब्दुल मजीद (रोहिंग्या) है, जो म्यांमार के गांव ओनेगान का रहने वाला है. उसने 2001 में अपने पिता और भाई के साथ बिना किसी दस्तावेज के बांग्लादेश के नाकूरा के रास्ते से बिलोनिया बॉर्डर पार कर कोलकाता में शरण ले ली थी. वहां पर कुछ दिन रहने के बाद अब्दुल मजीद उत्तर प्रदेश के शामली में आकर रहने लगा और 2004 में फर्जी सूचनाओं और दस्तावेजों के आधार पर पैन कार्ड और फिर बाद में आधार कार्ड बनवा लिए. जिनके आधार पर मजीद ने SBI और PNB बैंकों में खाते खुलवाए.

    यहां पर रहकर अब्दुल मजीद ने धार्मिक शिक्षा हासिल की और 2016 मदरसा दारुल उलूम जलालाबाद में बतौर उस्ताद बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. बाद में अब्दुल माजिद ने शामली के अलग-अलग मदरसों में बच्चों को तालीम दी. आरोप है कि इतने लंबे अरसे से रह रहे अब्दुल मजीद ने विदेशी पंजीकरण अधिकारियों को नहीं दिया और न ही अपने वहां रहने की कोई सूचना स्थानीय पुलिस विभाग को मुहैया कराई. इसी बीच अब्दुल मजीद 5 लाख 60 हजार रुपए की कीमत का एक मकान में खरीद कर रहने लगा.

    मजीद ने म्यांमार से तीन युवकों को बुलाया
    इसी क्रम में अब्दुल मजीद का संपर्क म्यांमार के रहने वाले तीन युवकों से हुआ. जो अपने पासपोर्ट और वीजा पर शामली तालीम के लिए पहुंचे थे और अवैध रूप से मदरसे में तालीम दे रहे अब्दुल मजीद के संरक्षण में पढ़ाई करने लगे. आरोपी तीन अन्य युवकों के नाम रिजवान, नोमान व फुरकान हुसैन है. पूछताछ में सामने आया कि पकड़े गए तीनों संदिग्ध युवक सगे भाई हैं. इनके पास से म्यांमार जारी पासपोर्ट हैं लेकिन वीजा की वेलिडिटी काफी पहले खत्म हो चुकी थी.

    पकड़े गए आरोपियों के मुताबिक वह तीनों म्यामार से मुफ्ती की डिग्री और धार्मिक तालीम लेने के लिए भारत आए थे. उन्होंने वीजा का समय खत्म होने के बाद नाम बदलकर शरणार्थी का प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया था. रिजवान का वास्तविक नाम SHINE KO KO, फुरकान का नाम WIN KO KO और नोमान का वास्तविक नाम SOE KO KO है.

    मदरसा संचालक भी गिरफ्तार
    पुलिस ने मदरसा चालकों को भी गिरफ्तार किया है. पकड़े गए मदरसा संचालकों का नाम हफीयुल्ला ( मदरसा मिफ्ता उल उलूम ), कारी अशरफ ( मदरसा अशरफिया थानाभवन ) और वासिफ अमीन मोहतमीम ( मदरसा दारुल उलूम जलालाबाद) है. 0

    ( शहनवाज राणा की रिपोर्ट )

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    Tags: Rohingya, Up news in hindi, UP police

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