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श्रावस्ती लोकसभा सीट पर महागठबंधन ने फंसाया पेंच, मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा के लिए राह नहीं आसान

श्रावस्ती से बीजेपी के मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा.

श्रावस्ती से बीजेपी के मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा.

श्रावस्ती लोकसभा सीट पर लड़ाई दिलचस्प है और सपा-बसपा के साथ आने से BJP के सांसद मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा को इस बार जीत के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा.

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इतिहास के पन्नों में सत्य, अहिंसा और प्रेम का संदेश देने वाली कहानियां श्रावस्ती के खाते में दर्ज है. पौराणिक मान्यता कहती है कि भगवान श्रीराम के पुत्र लव ने श्रावस्ती को राजधानी बनाया था. जबकि बौद्ध मान्यता कहती है कि गौतम बुद्धकाल में कौशल देश की राजधानी हुआ करती थी श्रावस्ती. वर्तमान में श्रावस्ती की पहचान गोंडा-बहराईच की सीमा पर स्थिति एक बौद्ध तीर्थ स्थान के रूप में हैं. यहां बौद्ध मठ और हिंदू मंदिर मौजूद हैं.

लेकिन पर्यटन और धार्मिक मान्यताओं से परे हिमालय की तलहटी पर बसे श्रावस्ती की सियासी पहचान सिर्फ 11 साल पुरानी है. साल 2008 में श्रावस्ती लोकसभा सीट वजूद में आई. साल 2009 में पहली बार श्रावस्ती लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा गया जिसमें कांग्रेस के डॉक्टर विनय कुमार पांडे ने जीत दर्ज की.

इस बार श्रावस्ती की सियासत जातीय समीकरणों और राष्ट्रवाद के ईर्द-गिर्द बुनी नजर आ रही है. एक तरफ बीजेपी यहां भी पीएम मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़ रही है तो दूसरी तरफ मैदान में एसपी-बीएसपी के महागठबंधन की वजह से लड़ाई दिलचस्प हो गई है.

कौन हैं प्रत्याशी?

श्रावस्ती लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा बीजेपी के उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस की तरफ से धीरेंद्र प्रताप सिंह उम्मीदवार हैं. जबकि एसपी-बीएसपी गठबंधन ने यहां से रामशिरोमणि वर्मा उम्मीदवार हैं.

कांग्रेस उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह


वर्तमान में श्रावस्ती की लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दद्दन मिश्रा ने बाहुबली अतीक अहमद को चुनाव में हराया था. अतीक अहमद समाजवादी पार्टी के टिकट से चुनाव लड़े थे.

कौन हैं दद्दन मिश्रा?

51 साल के दद्दन मिश्रा की पहचान मृदुभाषी, सरल और सहज सांसद की है. पांच साल में श्रेत्र के विकास के कामों के बूते दद्दन मिश्र एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. दद्दन मिश्र पॉलिटकिल साइंस से एमए हैं. श्रावस्ती सीट से पहली बार लोकसभा पहुंचे दद्दन मिश्र की संसद में उपस्थिति 92 फीसदी रही है और उन्होंने एक बार प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किया है.

कौन हैं धीरेंद्र प्रताप सिंह?

कांग्रेस उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह जनता के बीच अपनी मिलनसार छवि की वजह से लोकप्रिय हैं. हालांकि वो बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. वो बलरामपुर से बीएसपी के पूर्व विधायक रहे हैं.

कौन हैं सपा-बसपा महागठबंधन उम्मीदवार?

महागठबंधन उम्मीदवार राम शिरोमणि वर्मा


श्रावस्ती की संसदीय सीट बीएसपी के खाते में गई है. बीएसपी ने रामशिरोमणि वर्मा कुर्मी को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया है. रामशिरोमणि वर्मा कुर्मी को जातीय समीकरण साधने के लिए उतारा गया है. साथ ही उनके समर्थन में मुस्लिम वोटों के लिए सपा नेता मोहम्मद रिजवान प्रचार कर रहे हैं क्योंकि यहां के चुनावी समीकरण में मुस्लिम वोट बड़ी भूमिका निभाते हैं. यहां की एक विधानसभा सीट पर मुस्लिम विधायक है तो तीन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे हैं.

जातीय समीकरण

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जहां बीजेपी को 19 प्रतिशत वोट मिले थे तो वहीं समाजवादी पार्टी को 14 फीसदी और बहुजन समाजपार्टी को 10 फीसदी वोट मिले थे. ऐसे में इस बार श्रावस्ती सीट से जातीय गणित को देखते हुए महागठबंधन का पलड़ा भारी लग रहा है.

साल 2011 की जनगणना के आधार पर श्रावस्ती की जनसंख्या 11.2 लाख है. इसमें 83% आबादी सामान्य वर्ग के लोगों की है जबकि 17% अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं. यहां पर 68.87% आबादी हिंदुओं की और 31% मुस्लिम समाज की है. यहां कुल 1,788,080 मतदाता हैं जिसमें 811,613 महिला मतदाता तो 976,415 पुरुष मतदाता हैं.

श्रावस्ती लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीट भींगा, श्रावस्ती, तुलसीपुर, ज्ञानसारी और बलरामपुर आती हैं. 5 विधानसभा सीटे में से 4 पर बीजेपी और एक पर बीएसपी का कब्जा है. श्रावस्ती विधानसभा सीट पर बीजेपी के राम फेरन का कब्जा है जिन्होंने पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी के मोहम्मद रिजवान को हराया था.
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UP News: श्रावस्ती जिला हुआ कोरोना मुक्त, सीएम योगी ने जिले की टीम को दी बधाई

कोरोना मुक्त होने पर सीएम योगी आदित्यनाथ श्रावस्ती जिले को करेंगे पुरस्कृत

Shrawasti District Becomes Corona Free: अगले एक सप्ताह तक जिले में संक्रमण का कोई नया केस नहीं मिलने पर सीएम योगी आदित्यनाथ श्रावस्ती जिले को पुरस्कृत करेंगे.

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लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के कुशल प्रबंधन और सफल निर्णयों से श्रावस्ती (Shrawasti) जिले ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी (Covid Pandemic) से मुक्ति पा ली है. यहां अब एक भी संक्रमित मरीज सामने नहीं आया है. कोरोना संक्रमित सभी मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं. प्रदेश के अन्य जिलों में भी कोरोना के एक्टिव केस आना कम हो गया है. बीमारी पर नियंत्रण के लिये लगातार किये जा रहे प्रयासों से प्रत्येक दिन सरकार को नई सफलता मिल रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावस्ती जिले की इस उपलब्धि को अन्य जनपदों के लिये प्रेरणास्पद बताया है. उन्होंने जिले में एग्रेसिव टेस्टिंग को जारी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय श्रावस्ती के जन प्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंट लाइन वर्करों, निगरानी समितियों, स्थानीय  प्रशासन को दिया है. उन्होंने जनपद के लोगों से संयम और जागरूकता के क्रम को सतत बनाए रखने के लिये कहा है.

DM ने भी दी बधाई
जिलाधिकारी टीके शीबू ने बताया कि सरकार के निर्देशों पर बीमारी पर नियंत्रण के लिये निगरानी समितियों ने तेजी से कार्य किया. निगरानी के लिये जिले में नोडल अफसर बनाए गये. उनकी देखरेख में स्वास्थ्य सुविधाओं को जनपद के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का काम किया गया. उन्होंने श्रावस्ती की इस उपलब्धि के लिये लेखपालों के साथ-साथ स्वस्थयकर्मियों और उनके साथ बीमारी से लड़ाई में साथ देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बधाई दी है.

योगी सरकार श्रावस्ती जनपद को करेगी पुरस्कृत
अगले एक सप्ताह तक जिले में संक्रमण का कोई नया केस नहीं मिलने पर सीएम योगी आदित्यनाथ श्रावस्ती जिले को पुरस्कृत करेंगे. गौरतलब है कि सरकार के लगातार किये जा रहे प्रयासों से महामारी की दूसरी लहर की स्थिति पर यूपी ने नियंत्रण पाया है. शहरी क्षेत्रों में 73441 और ग्रामीण अंचलों में स्थापित 60569 निगरानी समितियों के 04 लाख से अधिक सदस्यों ने कोरोना की चेन तोड़ने में सरकार की बड़ी मदद की है. ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट की रणनीति पर तेजी से काम किया है. प्रत्येक संक्रमित मरीजों की ट्रेसिंग करने, उनकी आरआटी से जांच करवाने के प्रयास किये गये. इसी का नतीजा है कि प्रदेश के कई जिले कोरोना मुक्त होना शुरू हो गये हैं.

UP Weather News: लखनऊ, आगरा सहित इन 20 जिलों में जोरदार बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने यूपी के 20 जिलों में आज बारिश का अनुमान लगाया है. (सांकेतिक फोटो)

Weather Update: मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक आगरा, मथुरा, लखनऊ, सीतापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, श्रावस्ती, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और फर्रूखाबाद जिलों में दोपहर बाद तेज बारिश हो सकती है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग (Meteorological Department) के ताजा अनुमान के मुताबिक दोपहर बाद तक लगभग 20 जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है. कुछ जिलों में तो बौछारें पड़ भी रही हैं. लखनऊ (Lucknow) और इसके आसपास के जिलों में भी हवा के तेज झोंकों के साथ बरसात की संभावना है. इसके अलावा तराई के जिले और ब्रज क्षेत्र के जिलों में भी बौछारों से सुकून मिलने वाला है.

ताजा अनुमान के मुताबिक जिन जिलों में दोपहर बाद तेज बारिश हो सकती है वे जिले हैं- आगरा, मथुरा, लखनऊ, सीतापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, श्रावस्ती, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और फर्रूखाबाद. इन जिलों में बारिश के दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चल सकती है. साथ ही बारिश वाले जिलों में बिजली गिरने के खतरे के प्रति भी लोगों को आगाह किया गया है. लखनऊ के कई इलाकों में तो हल्की बारिश भी हुई है. सुकून देने वाली बात ये है कि सुबह से ही उमस भी कम हुई है. जिन इलाकों में बारिश हो जा रही है वहां तो ठण्डा हो ही जा रहा है, लेकिन बाकी इलाकों में ठंडी हवाओं के चलने से राहत है.

इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट
इसके अलावा कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, फतेहपुर, हरदोई, बाराबंकी, रायबरेली, गोंडा और बस्ती के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में 87 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा के साथ तेज बारिश हो सकती है.

आगरा सबसे गर्म
लगातार बारिश होने और हवाओं के चलने से गर्मी से राहत मिली है. प्रदेश के तीन-चार जिलों को छोड़ दें तो बाकी सभी शहरों में बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के नीचे ही दर्ज किया गया था. सबसे ज्यादा आगरा में 41.1 डिग्री सेल्सियस जबकि झांसी में 40.7 डिग्री सेल्सियस दिन का तापमान दर्ज किया गया.

प्रदेश में अगले चार दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है. हालांकि ये भी सच है कि मॉनसून के शुरुआती दौर में जितनी बारिश हुई थी, अब उसकी रफ्तार बहुत सुस्त हो गयी है. पिछले 24 घण्टे के दौरान प्रदेश के बहुत कम इलाके में बारिश दर्ज की गयी है. प्रदेश के सिर्फ 7 जिलों में ही बारिश दर्ज की गयी है. सबसे ज्यादा बारिश 13.2 मिलीमीटर वाराणसी में बारिश हुई. इसके अलावा बहराइच में 10 जबकि गोरखपुर में 8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी.

ODOP: मार्जिन मनी स्कीम में गोरखपुर सहित पूर्वांचल के ये 10 जिले फिसड्डी, अधिकारियों पर गाज की तैयारी

UP: ODOP स्कीम के तहत खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों के अधिकारियों के खिलाफ यूपी के एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सख्त निर्देश जारी किये हैं

UP News: सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की प्राथमिकता वाली ODOP मार्जिन मनी स्कीम में प्रदेश के 32 जिलों का खराब प्रदर्शन है. इनमें से सबसे खराब प्रदर्शन वाले 10 जिले और 5 मंडल के अधिकारियों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जिसके जरिये यूपी सरकार का ये प्रयास था कि जिलों में धीरे पहचान खो रहे उत्पादों को खास पहचान मिले. इसके लिए यूपी सरकार ने खासतौर पर एक कार्ययोजना भी बनाई. जिसके चलते ना सिर्फ एक तरफ जिलों के उत्पादों को नयी पहचान मिली बल्कि उनकी डिमांड में तेजी आयी है. लेकिन इस कार्ययोजना को कई जिलों में अधिकारी पलीता लगा रहे हैं. यही कारण है कि 32 जिलों का प्रदर्शन बेहद खराब आया है.

इसी को देखते हुए यूपी के एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सख्त निर्देश जारी किये हैं. इन निर्देशों के तहत एक जिला एक उत्पाद मार्जिन मनी स्कीम में खराब प्रदर्शन करने वाले इन जिलों के अधिकारियों को हटाने का फैसला किया गया है.

दरअसल सीएम की प्राथमिकता वाली ODOP मार्जिन मनी स्कीम में प्रदेश के 32 जिले फिसड्डी साबित हुए हैं. इनमें से सबसे खराब प्रदर्शन वाले 10 जिले और 5 मंडल के अधिकारियों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी गई है. खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में कुशीनगर, श्रावस्ती, गोरखपुर, गाजीपुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, जौनपुर, सौनभद्र, चित्रकूट और गोंडा शामिल हैं.

जानकारी के अनुसार इन जिलों में दिए गए लक्ष्य के सापेक्ष 8.18 प्रतिशत से लेकर 29.95 प्रतिशत राशि ही वितरित कर सकी. अब सरकार ने इस खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों के खिलाफ नजरें टेढ़ी कर ली है. MSME मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि सिर्फ फील्ड में अच्छा काम करने वाले अधिकारी ही तैनात रखे जायेंगे इसीलिए समीक्षा करके खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को जल्द हटाने के लिए कह दिया गया है. इससे अन्य अधिकारियों में ये संदेश जाना चाहिए कि वो जिलों लक्ष्य के सापेक्ष कार्य करें अन्यथा उन पर भी कार्यवाही की जायेगी.

UP Panchayat Chunav: पहले चरण में 18 जिलों में 71 फीसदी मतदान, जानिए कहां कितने पड़े वोट?

ताज नगरी आगरा से मतदाताओं ने सोशल डिस्टेंसींग का पालन नहीं किया.

UP Panchayat Chunav Voting: यूपी पंचायत चुनाव के पहले चरण में कई जगह मारपीट की घटनाएं भी हुईं. इस दौरान झांसी में सबसे ज्यादा 80 फीसदी मतदान हुआ.

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आगरा. उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण (COVID-19 Infection) को देखते हुए कई जिलों में 11 घंटे का नाइट कर्फ्यू लगाया गया है. वाराणसी में तो वीकेंड कर्फ्यू का भी ऐलान कर दिया गया है. इस बीच प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Pabchayat Chunav) में वोटिंग का दौर भी शुरू हो गया है. कोरोना संकट के बावजूद गांवों में मतादाताओं ने मतदान में अच्छी खासी दिलचस्पी दिखाई है. गुरुवार को पंचायत चुनाव के पहले चरण (First Phase Polling) में 18 जिलों में 71 प्रतिशत मतदान हुआ.

पहले चरण में सबसे ज्यादा झांसी में 80 फीसदी मतदान हुआ. वहीं 78 फीसदी मतदान के साथ महोबा दूसरे और 75-75 फीसदी के साथ कानपुर नगर व प्रयागराज संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा. देर शाम तक मतदान जारी था, लिहाजा मतदान प्रतिशत का वास्तविक आंकलन बाद में पता चलेगा. वैसे मतदान के दौरान कई जगह मारपीट और झगड़ों की घटनाएं भी हुई हैं.

गुरुवार सुबह से ही प्रदेश के सभी 18 जिलों में मतदाताओं की कतार देखी गई. इस दौरान कई जगह ऐसी भी तस्वीरें आईं जहां कोविड-19 गाइडलाइन का खुलेआम उल्लंघन देखा गया. दोपहर बाद मतदान में खासी तेजी देखी गई.

जानिए कहां कितने पड़े वोट

झांसी- 80 फीसदी

महोबा- 78 फीसदी

कानपुर नगर- 75 फीसदी

प्रयागराज- 75 फीसदी

सहारनपुर- 74.53 फीसदी

गाजियाबाद- 74.33 फीसदी

बरेली- 73.30 फीसदी

आगरा- 71.6 फीसदी

रामपुर- 71 फीसदी

हाथरस- 70.55 फीसदी

अयोध्या- 70 फीसदी

गोरखपुर- 70 फीसदी

संत कबीरनगर- 70 फीसदी

हरदोई- 70 फीसदी

रायबरेली- 68 फीसदी

श्रावस्ती- 64 फीसदी

भदोही- 63.81 फीसदी

जौनपुर- 63.15 फीसदी

UP Weather Update: उत्‍तर प्रदेश के 17 जिलों में बारिश के आसार, शनिवार से पूरे प्रदेश में खुल सकता है मौसम

उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में आज दिन भर बारिश की संभावना जताई गई है.

UP Weather Update: मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, सीतापुर, कानपुर, लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, अयोध्या, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और बाराबंकी.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को पूर्वी पूर्वांचल के ज्यादातर जिलों में बारिश (Rainfall) होने की संभावना जताई गई है. वैसे तो रात से ही मध्य और पूर्वी यूपी के कई जिलों में बारिश जारी है, लेकिन दिन में भी कई जगहों पर छिटपुट बारिश हो सकती है. राजधानी लखनऊ में रात 12 बजे के बाद से अचानक मौसम बदल गया. तेज हवाओं के साथ बारिश का सिलसिला चलता रहा.

मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर तक प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. ये जिले हैं- सीतापुर, कानपुर, लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, अयोध्या, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और बाराबंकी. यहां दोपहर तक बारिश का अनुमान लगाया गया है. बारिश हल्की से मध्यम होने की संभावना है. बहुत संभव है कि बीच-बीच में धूप भी निकल जाए.

शनिवार से मौसम खुलेगा
मौसम विभाग के अभी तक के अनुमान के मुताबिक मौसम के बदले मिजाज में 6 फरवरी को फिर चेंज देखने को मिल सकता है. शनिवार से प्रदेश के सभी इलाकों में मौसम खुल जाएगा. पश्चिमी यूपी में गुरुवार को बारिश रही, लेकिन अब पश्चिमी यूपी के ज्यादातर जिलों में मौसम खुल गया है. यह जरूर है कि पिछले तीन-चार दिनों से हो रही तेज धूप से दिन और रात के तापमान में अच्छा उछाल आ गया था, अब तापमान में थोड़ी गिरावट देखने को मिलेगी.

कुछ जगहों पर फिर से कोहरे की स्थिति पैदा हो सकती है. हालांकि, दिन में धूप निकलने से राहत जारी रहेगी. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक ज्यादातर शहरों में दिन का तापमान 25 डिग्री के आसपास और रात का तापमान 10 डिग्री के आसपास दर्ज किया जाएगा.

UP Weather Update: बहराइच रहा सबसे ठंडा, मुजफ्फरनगर सहित 15 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट

लोगों को सर्दी का एहसास हो रहा है. सर्दी से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं. (सांकेतिक फोटो)

UP Weather Update: मौसम विभाग के अनुसार, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, हरदोई, बलरामपुर, गोण्डा और सिद्धार्थनगर में घना कोहरा जारी रह सकता है.

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लखनऊ. धूप निकलने के कारण उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के ज्यादातर हिस्सों में गलन लगभग न के बराबर रह गई है. दिन में तेज धूप होने के कारण तापमान में अच्छा उछाल आया है, लेकिन तराई और पूर्वांचल के जिलों को ये राहत अभी नसीब नहीं हुई है. तराई में भीषण ठण्ड अभी भी जारी है. गुरुवार को प्रदेश का सबसे ठंडा शहर बहराइच रहा. यहां दिन का अधिकतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, गोरखपुर में 17.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.

प्रदेश के बाकी सभी शहरों में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा. ये अलग बात है कि हवाओं के कारण ठण्ड का एहसास बरकरार रहा. उत्तर पश्चिमी ठण्डी हवाओं के कारण गुरुवार को एकाएक दोपहर के बाद गलन बढ़ी है. इस बात की पूरी संभावना है कि हवाओं के कारण अगले एक दो दिनों में तापमान में थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है. फिलहाल पूरे प्रदेश में रात का तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है. रायबरेली का फुर्सतगंज इलाका सबसे ठण्डा रहा. यहां रात का न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. अब हवाओं के कारण बाकी शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखी जा सकती है.

क्या 23 जनवरी से फिर बदलेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का एक सिस्टम फिर से सक्रिय हो रहा है. इसके चलते यूपी के सीमावर्ती राज्य उत्तराखण्ड में 23-24 जनवरी को बारिश की संभावना जताई गयी है. अब सवाल उठता है कि क्या इसका असर यूपी के शहरों पर भी देखने को मिलेगा? अभी तक के मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक यूपी के किसी भी शहर पर इसका असर नहीं होगा. यानी बारिश की फिलहाल कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है. ये जरूर है कि बारिश के बाद ठण्डी हवाओं के चलते ठण्ड में थोड़ा इजाफा हो जाये.



15 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट
मौसम विभाग ने कई शहरों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है. अनुमान के मुताबिक मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, हरदोई, बलरामपुर, गोण्डा और सिद्धार्थनगर में घना कोहरा जारी रह सकता है.

भोजपुरी में पढ़ें: बाराती लोगन से पहिले शास्त्रार्थ होत रहल ह

समय- समय के फेर बा, अब हर चीज खातिर पइसा लागी.

दुनिया भर में शादी बियाह के मौका पर नाच - गाना त होवे करेला, लेकिन भोजपुरी समाज में शादी के मौका पर एगो अलगे रिवाज है. इहां शादी के मौका पर बाकायदा शास्त्रार्थ होला. यही परंपरा के याद करत हवें लेखक

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जु के नवका पीढ़ी के मालूम नइखे. आजु से चालीस साल पहिले भोजपुरिया समाज में जब शादी होखे त बाराती में अइसन लोग जासु जे शास्त्रार्थ क सके. शास्त्रार्थ माने? पहिले जब बारात केहू किहां जाउ त द्वारपूजा का बाद, बारात ठहरे वाला जगह पर दुलहिन पक्ष के लोग आवसु आ दूल्हा पक्ष के लोगन से साहित्य, धर्मशास्त्र आदि विषय पर प्रश्न पूछसु (एकरे के शास्त्रार्थ कहाउ). एसे कि तनी देखीं त दूलहा पक्ष के लोग पढ़ल- लिखल आ विचारक बा लोग कि ना. ई बहुत पुरान परंपरा रहे. हमहूं कई गो बारात में शास्त्रार्थ कइले बानी. अचानके ई परंपरा गायब हो गइल. आ ओकर जगह जयमाल/ बरमाल ले लिहलस. जयमाल के परंपरा खर्चा बढ़ावे वाला बनि गइल. शास्त्रार्थ ठीक रहल ह. ओमें ज्ञान- विज्ञान के बात होखत रहल ह. अचानक ई परंपरा लुप्त एसे हो गइल कि लोगन के पढ़ाई आ ज्ञान वाला प्रसंग अच्छा ना लागल. तड़क- भड़क अच्छा लागल, एही से जयमाल के परंपरा शुरू भइल.

त परंपरा नया शुरू भइला में देरी ना लागेला. देखा- देखी में कौनो परंपरा स्थापित हो जाले. अब त जयमाल ना होखे तो सिकाइत होखे लागी. लोग कहे लगिहें- अरे जयमाल ना भइल ह? ई काहें? त ई हाल बा. अब सुंदर लय में गारी गावे वाली मेहरारुरुओ नइखी सन. ना त पहिले- “अगुआ के बहिनी छिनार, कइली चारि गो भतार” आ “बात बंद करो साले, सुनो अब गारी”, “देखला में भसुरा भंटा, एकदमे नाटे बा”, “रोल गोल्ड गहना ले अइल, ए भसुरा ई का तू कइल”, “हाथी, हाथी सोर कइल, गदहो ना लेअइल हो”, जइसन गारी अब नइखे सुनात. जेकरा के गारी दिहल जात रहल ह, ऊहो खुस होके सुनत रहल ह. बल्कि ऊ इंतजार करत रहल ह कि गारी गीत सुने के मिलो. अब त कौनो- कौनो गांव में भले कहीं- कहीं एकर झलक भले मिल जाता. बाकिर अब पुरनका जमाना के गारी लुप्त हो रहल बा. अइसना गारी के लोग बड़ाई करी. जे गावता ऊहो खुस, आ जेकरा के गारी दियाता, ऊहो खुस. अब त गारी के जगह पर कान फारे वाला संगीत आ गइल बा.

भोजपुरी में पढ़ें: कुंवर सिंह के कहानी बहुते तूफानी 

एगो अउरी बात बा. पहिले बारात में धोती- कुर्ता आ पैंट- शर्ट दूनो तरह के पोसाक लउकत रहल ह. अब धोती- कुर्ता कहीं लउकते नइखे. सब पैंट- शर्ट में रहता. ई कौनो सिकाइत के बात नइखे, बदलाव के निसानी बा. पहिले गांव में घरे- घरे गाय पोसात रहली ह स. दूध- दही के कौनो कमी ना रहत रहल ह. बाकिर अब सानी- पानी के दुखे, केहू गाय नइखे राखत, कीनिए के मंगावता. आ हम त महानगर में रहतानी, एहिजा “अमूल” के आधा किलो पैकेट वाला दूध खूब मिलता. ओही से काम चलेला. टोंड दूध, माने अइसन दूध, जवना के मलाई निकालि के पैकेट में भरि दिहल जाला. हमनी के टोंड दूध किनेनी जा. त अब दूध कइसन बा ई रउवां नइखी जानत. बस कंपनी बढ़िया बिया, त दूध ठीके होई, मानि के चले के बा. महानगर में सबकरा खातिर गाय पालल भी संभव नइखे. जे तीन कमरा, भा दू कमरा के फ्लैट में रहता, ऊ खुद रही कि गाय के राखी. आ एहिजा लेहना (चारा) कहां से मिली, ईहो समस्या बा. आफिस में काम करे वाला आदमी आफिस आ घर के कामे में अझुराइल रहता त गाय कहां से पाली, खरी- खुदी कहां से ले आई. त ई कुलि देखि के पैकेट के दूध कीनल ढेर बढ़िया बा.

जब बारात के बात चलल त एगो किस्सा मन परि गइल. हमरा जिला में एक जना बाबू साहेब रहले. नांव रहे खखोरन सिंह. अब ई मत पूछीं कि खखोरन कौन नांव ह. किस्सा ई बा कि ऊ कौनो बरात में जासु त 50 गो पूड़ी के पहिले उनकर पेट ना भरे. पूरा खखोरि के खासु. त नांवे परि गइल खखोरन सिंह. उनुकर असली नांव लोग भुला गइल. इहे नांव प्रसिद्ध हो गइल. त एक बेर हमरो गांवे बरात में खखोरन सिंह अइले. पहिलहीं से हल्ला हो गइल कि खखोरन सिंह आवतारे. जेकरा घरे बरात आवत रहे ऊ खियावे के सौकीन आदमी रहले. भगवान उनुका के धन- दौलत भी देले रहले. तय भइल कि खखोरन सिंह के अलग कमरा में बइठा के पसन से खियावल जाई. बारात आइल. खखोरन सिंह तय समय पर खाये बइठले. पहिले उनुका पत्तल पर दू गो पूड़ी रखाइल तो ऊ हंसे लगले. खियावे वाला हाथ जोरि के पुछले कि कौनो गलती भइल होखे त माफ करीं. खखोरन सिंह कहले कि गलती नइखे भइल. रउवां हमरा बगल में एगो स्टूल पर पचास गो पूड़ी राखि दीं, एगो बड़का पत्तल में तरकारी, हर तरकारी खातिर अलग पत्तल. अंत में दही- बुंदिया देब. दही एक जग, आ बुंदिया एक किलो राखीं.

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ऊहे भइल. अब लोगन के उत्सुकता कि खखोरन सिंह खात कइसे बाड़े. सब देखल कि उनुकर एक कौर आधा पूड़ी के बराबर होता. हमरा जिला में हाथी के कान नियर बड़े- बड़े पूड़ी बनेली सन. त आधा कौर के अंदाज लगा लीं. सब खड़े रहे आ एक घंटा में सब पूड़ी- सब्जी खाइ के अब दही- बुंदिया पर टूटि परले. खाना से तृप्त होके जब उठि के डकार लिहले तो लोगन के खुशी भइल. चले के बेर खखोरन सिंह कहले कि शादी- बियाह में हम तनि कम खानी. ई हमार सिद्धांत ह. दुलहिन के चाचा हाथ जोड़ि के कहले कि कवनो कमी रहि गइल होखे त माफ करब. त खखोरन सिंह हंसि के कहले- एतना स्वादिष्ट खाना रहल ह कि मन खुस हो गइल. लेकिन उनुकरा एह बाति से लोग चकित हो गइल कि ऊ शादी- बियाह में कम खाले. जब कम खइला पर ई हाल. त भर पेट कतना खात होइहें. लोग चकित भइल तो होखो, खखोरन सिंह दुआर पर पान लेके बइठे वाला से पान लगववले आ मुंह में डालि के आनंद से बारात ठहरे वाली जगह पर चलि गइले.

बाकिर उनुकर पराक्रम के किस्सा भी बा. एक हाली उनुका गांव के एगो घर में चोर ढुकले सन. घर के लोग जागि गइल. चुपके से एगो घर के आदमी खखोरन सिंह के खबर कइलसि. बस खखोरन सिंह लहेटि के चोरन के ध लिहलन. दूनों हाथ से दू गो चोरन के ध  लिहले तो चोर कतनो हात छोड़ाव सन, खखोरन सिंह के हाथ लोहा नियर मजबूत रहे. चोरन के एगो खंभा में बान्हि के सबेरे के इंतजार भइल. पुलिस के बोलावल गइल आ चोर लोगन के सौंपि दिहल गइल. कतहीं शारीरिक शक्ति के जरूरत बा त खखोरन सिंह असंभव के संभव बना देत रहलन ह. अब ओइन लोग ना खाए वाला बा, ना शक्तिशाली बा. पहिले गांव में अखाड़ा रहत रहल ह. अब त गांव से अखाड़ा आ पहलवानी लुप्त हो गइल बा. छोटे- छोटे शहर में जिम खुलि गइल बा. रुपया जमा करीं आ मशीन पर व्यायाम करीं. फ्री के गांव के अखाड़ा आ कुश्ती- व्यायाम सिखावेवाला अब ना मिली केहू. पहिले के जमाना गइल. अब हर चीज खातिर पइसा लागी. समय- समय के फेर बा. हमनी के मानहीं के परी.

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एगो जानकारी इहो बा कि जार्ज पंचम भारत क साधु संतन क समझे क खातिर 1911 म यहा आकर बाबा से  मुलाकात कईलन.

देवरहवा बाबा हिंदी पट्टी में बहुत पूज्य रहनी हां. बारहो महीने बिना कउनो कपड़ा मचान पर रहे वाला बाबा के दरशन करे वाला लोगन में बाबू राजेदर परसाद से लेकर मदन मोहन मालवीय. लाल बहादुर शास्त्री. इंदिरा गांधी सब रहल हा. लेखक बाबा के सादा जीवन के याद करत बाने.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 15, 2020, 12:15 IST
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लेखक: चंद्र प्रकाश सिंह

ईकाई गाँव म गुजरल. देवरिया जिले क मईल नामक जगह वही पासे में आपन गाँव देवसिया. गाँव से सटल घाघरा नदी बहत रहल. जिनकर एगो दूसर नाम सरयू हउए. नदियन क लागल जगह देवार के नाम से जानल जाला. ई जगह साल के आधा त पानी म डूबल रहल. यही छोटे पर एगो संत देखनी. देवार में रहले के कारण लोग उनका के देवरहवा बाबा के नाम से जानत रहलस. बहुते सादा जीवन. पूरे देह पर खाली एगो मृगछाला. खाये क फल. दूध बस.घासफूस के झोपड़ी उचे मचान पर. बाबा राम और किशन दोनो लोगन क उपासक रहनी. उ दुनो क एके मानत रहनी उ कहत रहनी.

"एक लकड़ी हृदय को मानो दूसर राम नाम पहिचानो
राम नाम नित उर पर पे मारो ब्रह्म दिखे संशय न जानो।"

उनकर कृष्णमन्त्र बहुते प्रसिद्ध रहल जेकराके उ आपन सब भक्तन क देत रहन.

"ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतः क्लेशनाशाय . गोविन्दाय नमो नमः."

उ सभन के जीवन म ईमानदारी भगवान के भक्ति क जानकारी देत रहन. उनकाके खेचरी मुद्रा क सिध्दि रहल जौने से उनका अपने भूख प्यास और आयु पर अधिकार रहल. उनके पास कौनो गाड़ी घोड़ा नाही. आशीर्वाद देले क अलग ढंग कोउ भी रहे आपन पैर मचान से लटका देत रहन और लोगबाग ओकरा के अपने माथ से सटा लेत रहनल. बाबू राजेन्द्र प्रसाद. जवाहरलाल नेहरू. लालबहादुए शास्त्री. इंदिरा गांधी. मदन मोहन मालवीय. पुरुषोत्तमदास टंडन जी. सब बड़का नेता वहा आवत रहन लेकिन कौनो पद क लालसा नाही. कौनो जेड प्लस नाही. कौनो हुड़दंगई नाही. सबकर विषय मे सोचत रहन.

बाबू राजेन्द्र प्रसाद क गाँव उहा से कुछ ही दूरी पड़ बिहार क जीरादेई म था. उ उनकर दर्शन करत रहन. उ बाबा क विषय मे लिखने हउन की उ उनके हमेशा ऐके जइसन देखले हउअन. उ त उनकर उमर सैकड़न बरस बतावले हउअन. कही सैकड़न बरस आजकल क संत जी जइतन त का होई. कई पीढ़ी क लोग त ताकते रह जाइतन. प्रयाग हाईकोर्ट के एगो वकील साहब ई बतावत रहन की उनकर सात पीढ़ीयन क लोग बाबा क आशीर्वाद लेत रहनस. एतना नेता मिलन केहू के साथ उनकर फ़ोटो नाही. कौनो एगो पार्टी क बात नाही. सबकर भला चाहे क विचार. बाबू राजेन्द्र प्रसाद जब लड़िकाई में अपना माई क साथ से बाबा से मिलनह बाबा बताईन ई लईका बड़वन होकर ऊँच कुरसी पर बइठि.

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राष्ट्रपति बनला के बाद राजेन्द्र बाबू एगो पाती लिखाकर उनकरा क धन्यवाद करनह. बाबा अष्टांग योग म माहिर रहनी ह. लेकिन कौनो प्रचार प्रसार और ब्रांड नाही. कई सौ करोड़ क मालिक नाही. कौनो नात रिश्तेदार नाही जेके आश्रम क मालिक बनाकर दे गईल होखे. 1977 क चुनाव हरले क बाद इंदिरा जी बाबा से मिले की खातिर आईल रहली. बाबा आशीर्वाद देलन और हाथ के पंजा देखइलन. कहल जाला की वही के बाद ई कांग्रेस क निशान बनल. आज त ई सिम्बल की खातिर मुकदमा हो जाइत. बाबा भक्तन के प्रसाद हाथ घुमा लावत रहन. भक्तन के चकचोनी आवत रहल. जैसे आजकल चुनाव म ई वी एम क वोट देख कर होला.

कहल जाला की उ पनिवो पर चलत रहन. मन क बात जान लेत रहन. कही आवे जावे की खातिर कौनो वाहन नाही प्रयोग कईलन. जइसे नेता  जी लोग कौनो पार्टी म भोर से रात म आवत जात रहत बानी. और कहल बानी की ई त लोगन क मन रहल ह. मईल में बाबा साल क 8 महीना गुजारत रहन. बाकी समय अलग अलग जगहन पर साधना करत रहन. कब्बो उ कौनो चमत्कार क दावा नाही कईनन. चाहे गरीबन क धनी बनावेके होखे. चाहे स्मार्ट सिटी बनावेके होखे. चाहे कौनो नालायक क लायक पद पर बैठावेके होखे. कहल त इहो जाला की उ एक साथ दू जगह पर रहत रहन. जईसे नेता लोग कई ठो दल में रहत बान.

जौने समय बाबा ई जगह पर अइले न ई जगह बहुत पिछड़ल रहल लेकिन उनकर केहू से कौनो शिकायत नाही. जीवन कठिन रहल. जंगली जन्तु आपराधिक लोग भी रहल लेकिन उ यहा रहकर आपन काम करत रहनअ.  उनकर आश्रम क लग्गे बबूल का बहुत पेड़ रहनल लेकिन कौनो पेड़ म काटा नाही. उ बबुल भी शरीफ हो गईल. लोग कब आपन स्वभाव सुधारी. मथुरा म 1987 जून क महीना बाबा उहा दर्शन देत रहन. उस समय उहा राजीव गांधी आवेके रहन उ वो समय प्रधानमंत्री रहन. अफसर लोग वहा हेलीपैड बनावे के खातिर एगो बबूल क पेड़ काटे के कहन. बाबा अफसर के बुलाके पुछन्ह पेड़ काहे काटे के बा अफसर बतइलस ई हेलीकाप्टर क उतरे के खतिर जरूरी बा ये पर बाबा कहन तू लोग प्रधानमंत्री क लाइब लेकिन वोकर नुकसान त पेड़ उठाई उ पेड़ हमार साथी ह उ हमसे पूछी त हम का जबाब देइम. नाही ई पेड़ नाही कटी. अफसर बहुत ही परेशान हों गए त बाबा कहलन घबरा लोगन मत प्रधानमंत्री नाही आईहन और उहे भईल.

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कहल जाला की उ सब कुछ याद रखत रहन कई साल पुराना लोग उनकर के याद रहत रहल. नेतावन जइसन ना कि चुनाव बाद भूल गइलन. एगो जानकारी इहो बा कि जार्ज पंचम भारत क साधु संतन क समझे क खातिर 1911 म यहा आकर बाबा से  मुलाकात कईलन. कहल जाला की आपन देह त्यागले क बात उ पांच साल पहले ही बता देले रहनल. एक हफ्ते पहले से उ लोगन क दर्शन दिहल बंद कर देन. 19 जून 1990 मंगलवार को मथुरा में उ आपन शरीर छोड़ देन. इनकर समाधि स्थल वृन्दावन म यमुना नदी के वो पार तट पर बनल बा. कहल जाला कि इनकर दर्शन से जीवन बन जाला. अइसन दिव्य आत्मा के नमन.

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बिग बास जइसन रियल्टी सो में पहुंचाला के बाद भोजपुरी स्टार लोग गाबाड़ा जाता.

भोजपुरी से हर छेत्र में बड़ बड़ लोग निकल हा. कलाकारन के भी कमी नइखे, लेकिन बिग बॉस जइसन शो में काहें भोजपुरी कलाकारन के परफार्मेस बहुत अच्छा नइखे होत. अगर आम्रपाली दुबे एमे जात हई त उनके एकर खयाल राखे के होई... 

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जे बा कि सामाचार आइल बा कि आम्रपाली दुबे के बिग बास 14 के नेवता मिलल बा. बिग बास 14 बानावेवालन के तरफ से भोजपुरी एक्टर आम्रपाली दुबे से बातचीत के कोसिस हो रहल बा. स्पॉटबॉय वेबसाइट बातावले बिया कि आम्रपाली दुबे भोजपुरी फिलिमी दुनिया के जानल मानल एक्टर हई आ एहि से बिग बास वालन के नजर आम्रपाली दुबे के चाहे वालन पर बा.

अभी ले ना त आम्रपाली दुबे नेवता मिलला के बारे में बतवले बाड़ी आ नाहिंये बिग बास वाले कुछ कहले बाड़े स. अभी त ईहो नइखे पाता चलल कि आम्रपाली दुबे बिग बास रिअल्टी सो में जाये खारित हं कहले बाड़ी कि ना. बाकिर जावना हिसाब से आम्रपाली आपाना के सलमान खान के फैन बातावेली, लागत त ईहे बा कि नेवता मिलते दउरल पहुंचि जइहें. बातावल जाला कि आम्रपाली दुबे कहेली कि ऊ सलमान खान के एतना बड़ फैन हई कि उनुका से बिआह तक करे के तेयार रहली.

वइसे ई कवनों पहिल बार नइखे कि भोजपुरी फिलिमी दुनिया से केहू के बिग बास के घरे बोलावल जाता. ए से पहिले कइगो बाड़का बाड़का लोग बिग बास के घरे हो आइल बा, लेकिन अभी ले केहू ऊंहा देर तकटीकि नइखे पावल.

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कहे के त स्वेता तिवारी बिग बास के विनर तक भईल बाड़ी आ रस्मि देसाइओ ढेर दिन तक बिग बास के घर में रहल बाड़ी, बाकिर अइसन तब भइल बा जब ई दूनो लोग हिंदी के दुनिया में अपना गोड़ जामा ले ले बा. ए दूनों में से केहु के भोजपुरी के पहचान के चलते ऊंहा सोहरत नइखे मिलल. कवनो जामाना में स्वेता तिवारी आ रस्मी देसाई भोजपुरी फिलिम में खूबे काम आ नाम कइले रहली लोग, बाकिर जब बिग बास पहुंचली त ओ लोग पर से खांटी भोजपुरी कालाकार के ठाप्पा मिचकरि गइल रहे.

स्वेता तिवारी के साथे बिग बास सीजन 4 के घर में ग्रेट खली आ भोजपुरी गायक आ एक्टर मनोज तिवारी भी गइल रहले. बाकिर जब चारचा होखे त मनोज तिवारी के बारे में कम आ डाली बिंद्रा के संगे उनुकर झागड़ा के ढेर होखे. मनोज तिवारी बिग बास 4 के घर में पहलिके दिन घुसले आ 62 दिन तक जमल रहले. बिग बास सीजन चारि जीतली स्वेता तिवारी आ खली रनर अप कहइले. ऊ पहिल मोका रहे जब सलमान खान बिग बास के होस्ट बनले आ तबे से आजु ले ऊहे होस्ट करत आवतारे.

अभी ले 'बस जिनिगी झंड बा, फिर भी घमंड बा' वाले रवि किसने एगो बाड़े जे बिग बास में 'सेकंड रनर अप' तक पहुंचि पावेवाला काहाले. रवि किसन बिग बास के पहलिके सीजन में ओकरा घरे गइल रहले. ए घरि त रवि किसन गोरखपुर से एमपी हो गइल बाड़े. मनोजो तिवारी अब दोसारका बेरि दिली से एमपी के चुनाव जीतले बाड़े.

बिग बास 2 में भोजपुरी स्टार संभावना सेठ खूबे ऊधम मचवले रहली. हारल जीतल आपाना जगहि होला, बाकिर संभावना सेठ के हांगामा से एतना पारचार मिलल कि बिग बास के घर से बाहारा अइला के बाद खूबे नाम भइल आ खूबे कामो मिले लागल. समझल जाला कि बिग बास के घर संभावना सेठ के जिनिगी बहुते नीमन बाना देलेसि.

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संभवने सेठ लेखा निरहुओ के बिग बास के घरे गइला के फाएदा मिल रहे. निरहुआ जेकर नाव दिनेस लाल यादव हवे बिग बास के सीजन 6 में ऊंहा गइल रहले. बिग बास के चलते निरहुआ के भी खूबे पहचान मिलल आ ढेर लोग जाने लागल. बिग बास के घर में राहला के समे लो के उनकर सादगी खूबे नीमन लागल रहे.

ए रियल्टी सो से बाकि कालाकारन के जवन मिलल ऊ त मिलबे कइल, मोनालिसा खातिर सबसे आछा बात ई भइल कि ऊ बिग बास के घरे जाके आपन घर बासा ले ली. मोनालिसा बिग बास के सीजन 10 में घर के भीतर गइल रहली आ उहवें आपाना बॉयफ्रेंड से सादी कई ले ली.

अभी बिग बास के 13वां सीजन में भोजपुरी एक्टर खेसारी लाल यादव के बोलावल गइल रहे, लेकिन जलदिये उनुका के बेघर कई दीहल गइल. खेसारी लाल यादव के यूपी, बिहार आ झारखंड के चाहे वालन के तरफ से त खूबे सपोट मिलत रहे, लेकिन घर के भीतरवालन के ऊ ना पसन अइले. सलमानो खान कई बार खेसारी लाल यादव के कहले कि ऊ सो से ठीक से लउकत नइखन. मानल जात रहे कि खेसारी लाल यादव अपने में कुछु खोअल खोअल रहत रहले. तले घर के भीतरिये रहेवाले सब उनुका के बहरियावे खातिर ओट दे देले.

आम्रपाली के कुछु दिन टीवी में काम कइला के बाद भोजपुरी फिलिम में मोका मिलल आ फेरू ऊ कई गो भोजपुरी एल्बमो में काम कइले बाड़ी. आम्रपाली दुबे आ निरहुआ के हिट जोड़ी बहुते फिलिम में काम आ नाम कइले बा.

आम्रपाली दुबे के ए घरी निरहुआ के साथे एगो गाना खूबे हिट होखता - 'करेला मन की पट जाई'. भोजपुरी फिल्म 'आसिक आवारा' के ए गाना के बोल प्यारे लाल यादव लिखले बाड़े आ निरहुआ आ कल्पना मिलि के गवले बा लोग.

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आम्रपाली दुबे के एगो डांसो बीडिओ भी खूबे वाइरल भइल बा. ए बीडिओ में आम्रपाली दुबे एगो गांव में बाड़ी आ निरहुआ के दुलहिन बनल बाड़ी. एहि बीचे पवन सिंह के गाना 'लालीपाप लागेलू...' बाजता आ कान में आवाज पड़ते आम्रपाली दूबे कूदि कूदि के लापालप नाचे लाग तारी.

बिग बास सीजन 14 के बारे में पाता चलल बा कि अबकी 13 गो बड़ लोग त रहबे करिहें, आम लोगन के भी डिजिटल आडिसन से एंट्री दीहल जाई. सुनाता कि अबकि बारी अनू मलिक आ राधे मां से भी बिग बास वालन के बातचीत चलि रहल बा.

बाड़ा ताजुब के बात बा कि भोजपुरी इलाका के लोग देस के प्रधानमंत्री तक बनि जाता. प्रधानमंत्री चंद्रसेखर बलिये के रहले आ अबहिओं मनोज तिवारी आ रवि किसन संसद में बड़ले बा लोग. निरहुआ आजमगढ़ से अखिलेस यादव से हारि गइले ना त ऊहो नेता हो गइल रहिते - बाकिर का बात बा कि बिग बास जइसन रियल्टी सो में पहुंचाला के बाद भोजपुरी स्टार लोग गाबाड़ा जाता.

अब ई त नाहिये कहल जा सकेला कि भोजपुरी बेल्ट के लोग वोट देबे में कोताही करत होई बाकिर बिग बास में गइला के बाद भोजपुरी कालाकार लोग के भी सोचे के चाहीं कि आपाना ओरि से कवनो कसर बाकी ना राखे लोग – ए बात के ध्यान जरूर रहे के चाहीं कि बिग बास में आम्रपाली दुबे के हालि निरहुआ आ खेसारी जइसन ना होखे के चाहीं.

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बाबू कुंवर सिंह बीर अइसन के ओघरी दुश्मन देश के इतिहासकार भी बड़ाई करत बाड़नि.

पूर्वांचल में आजादी के लड़ाई के जब जिक्र होई त बाबू कुंवर सिंह के नाम जरूर रही. कुंवर सिंह के नाम पर पूर्वांचल के कई जिला में स्कूल कॉलोज त बनलेबा, उनका स्मृति में खूब साहित्य भी लिखल गइलबा.

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इसे ते देश के कोना-कोना आजादी के लड़ाई में एक से एक बलिदान कइले बा, पर वाह से भोजपुरिया माटी कि तरह तरह के रेकार्ड एहि धरती के लगे बाड़े. अठारह सौ सत्तावन के विदरोह में मंगल पांड़े अउर 1942 में जिला के आजाद करावे वाला नेता चित्तू पांड़े भोजपुरिया इलाका में एक ही जिला बलिया के रहे वाला रहले. इ दुनो लोगनि के बिना देश में आजादी के लड़ाई के कहानी ना लिखल जा सकेला. एहि लोगनि अइसन एगो अउरी क्रांतिकारी के नाम लिहल जाऊ, त उ हवुअन बीर कुंवर सिंह. बिहार में भोजपुर के जगदीशपुर के किलेदार के कहानी रोंगटा खड़ा करि देबे वाला बा. अठारह सौ सत्तावन के क्रांति में जब उ अपना सैनिकन के संगे मैदान में उतरले, ओ घरी उनकर उमिर अस्सी साल के रहे-

हड्डी ठोस, पेसानी दमकत, पुष्ट वृषभ-कंधा बा
अस्सी के बा उमर भईल, जे कहे बूढ़? अंधा बा
सिंह चलन, रवि जलत नयन, जुग सुगठित चंड भुजा बा
अईसन डोलेला ज़ईसे, डोलेला विजय पताका..

कवि कहत बाड़े कि अस्सी साल के उमिर के बावजूद जे उनके बूढ़ कहे, उ आन्हर होई. बाबू कुंवर सिंह सत्ताइस अप्रैल उनइस सौ सत्तावन के दिने आरा नगर पर कब्जा कइ लिहले. ए उमिर में गजब के घुड़सवारी अउर तलवारबाजी. देखीं ए गीति में-

रामा बोली उठे देवी दुरगवा हो ना...
कुंवर इहे हवे मानिक पलटनिया हो ना..
रामा घोड़वा नचावे कुंवर मैदनवा हो ना..

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इ कविता 1857 के आसपास लिखल ‘कुंवर विजयमल’ से लिहल गईल बा. एकर लेखक के नाम जानकारी में नइखे आ पावल. आरा नगर पर कब्जा खातिर अंगरेज सेना आइल त बीबीगंज अउर विहिया के जंगल में लड़ाई भइल. अंगरेज एकरा बाद कुंवर सिंह के गढ़ जगदीशपुर पर हमला कइ देहलसि. कुंवर सिंह के भाई अमर सिंह अंगरेजन के घेरत रहले अउर बीर बाबू कुंवर सिंह बांदा, रींवा, आजमगढ़,बनारस, बलिया, गाजीपुर आ गोरखपुर में विदरोह के आगि फूंके लगले. दुनो भाई कुंवर सिंह अउर अमर सिंह के बीचे गजब के तालमेल रहे. कुंवर सिंह पहिलवे से अपना छोटका भाई के हाल बतावत रहले –

लिखि लिखि पतिया भेजे कुंअर सिंह
सुनि ल अमर सिंह भाई हो राम.
चमवा के टोंटवा दांत से चलवावता
छत्री के धरम नसावे हो राम...

‘छत्री धरम’ माने अतियाचार के खिलाफ लड़ाई कुंवर सिंह के मंतर रहे. एहि से उ कबो विदेशी सरकार के ना सुनले. अंगरेजी सरकार उनकरा के तरह तरह के लालचि दिहलसि. बड़ सूबा बना के ओकर राजा बनावे के कहलसि, बाकिर वाह से कुंवर सिंह कि, अपना देश के कीमति पर उनकरा के कवनो जागीर ना चाहीं-

कप्ताम लिखे खुंवर सिंह
आरा के सूबा बनाइब ऐ.
तोहफा देबो, इनाम देबो
तोहके राजा बनाइब ऐ.
बाबू कुंवर सिंह भेजले सनेसवा
मोसे ना चली चतुराई ऐ.
जब तक प्रान रही तन भीतर
मारग नाही बदलाई ऐ.

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बाबू कुंवर सिंह एहि गीतिए को मोताबिक साबितो कइले. लड़ाई में उतरले त उ भयंकर तरीका से दुश्मन सेना पानी मांगे लागलि. कुंवर सिंह के समे के ही कवि तोफा राय लिख तारे-

देवता देखे लागल जोगनी भखे लगलि
गोरन के रक्त लाल पीके पेट भरल नू
ऊपर आकाश गरजे, नीचे बीर कुंवर गरजे
गोर फिरंग संग पावस होले खेलल नू

दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह के किताबि ‘भोजपुरी के कवि एवं काव्य’ में एगो भोजपुरी नाटक ‘कुंवर सिंह’ भी बा. युद्ध के वरणन ओहु किताबि में बा. एगो गीति के दुगो लाइन ह-

बाबू ग़जब फेंके तरुआरि, बाघे अस टूटि परे
टपाटप बाजे ओके टाप, छपा-छप मुड़ी गिरे…

बाबू कुंवर सिंह बीर अइसन के ओघरी दुश्मन देश के इतिहासकार भी बड़ाई करत बाड़नि. बिरटेन के लेखक होम्स कहत बाड़े कि उ बुजुर्ग राजपूत बिरटिस सत्ता से आन-बान-शान के साथ लड़ले. होम्स मान तारे कि गनीमत इहे रहे कि लड़ाई के समे कुंवर सिंह अस्सी साल के रहले. जदि उ जवान रहते त अंगरेज ओही घरी भारत छोड़ि देले रहतनि. बाबू कुंवर सिंह पर अउरी विदेशी विदवान लोग भी खूबे लिखले बा. जी. डब्ल्यू. फ़ॉरेस्ट के किताबि ‘अ हिस्ट्री ओफ़ इंडियन म्यूटिनी’; गिबर्न सिवेकिंग के पुसतक ‘अ टर्निंग प्वाइंट इन द इंडियन म्यूटिनी’; अउर जॉन जेम्स हॉल्ज़ की किताबि ’आरा इन 1857’ भी बहुते कुछ कह तारी सनि. एहि तरे पॉल ब्रोका के चिट्टी-पतरी, जॉर्ज ए ग्रियरसन के किताबि ‘बिहार पेज़ंट्स लाइफ़’ अउरी एलएसएस ओ मैली के भी ‘शाहाबाद के गज़ेटियर’ में कुंवर सिंह के वीरता के बारे में खूब कहले बाड़े.

अइसन बीर कुंवर घरे के भेदी के कारन आपन जान गंवा बइठले. तमाम जगहि से जीतत जब उ जगदीशपुर के ओरि फेरि लौटत रहले, ओही समे पर गंगा बीच अंगरेज सेना के सिपाहियन के गोली से उनकर एगो हाथ घाही हो गइल-

देसी अउर विदेसी के फरक कह राखल नाही
अपने में लड़ लड़ के विदेशी के जितौले बा
गोरा सिख सेना ले निडर जे चढ़ल आवे
घर के विभिखन भेद घरवे नू बतवले बा.

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बाबू कुंवर सिंह के रिश्ता में भाई लागे वाला नर्मदेशवर प्रसाद सिंह के ए गीति में घर के भेदिया के करतूत बतावल गइल बा. गोली लगला पर भी कुंवर सिंह ना रुकले. घाही हाथ काटि के गंगा जी के चढ़ा दिहले. जगदीशपुर पहुंचि के तेईस अप्रैल, अठारह सौ अठावन के फेरू से जगदीशपुर के आजादी के घोषणा कइले. नियति के कुछ अउरे मंजूर रहे. गोली लगला से शरीर में फइलल जहर के कारण अइसन बीर कुंवर सिंह तीन दिन बादे चलि बसले.

काली किंकर दत्त के कुंवर सिंह पर लिखल दुगो किताब के भी बड़ा चरचा होला. पहिलका ‘अनरेस्ट अगेंस्ट ब्रिटिश रुल इन बिहार, 1831-1859’ अउरी दुसरका ‘बायोग्राफी ऑफ़ कुंवर सिंह एंड अमर सिंह’ में बहुते विस्तार से लिखल गइल बा. एकरा बादो अइसन लागत बा कि जवन कहानी लोकगीत अउरी लोगन के बीच बा, ओह पर काम कइल जाउ त अउरी बढ़िया होई.
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