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Lucknow Al Qaeda Module: फरार आतंकियों को पकड़ने के लिए Indo Nepal Border पर अलर्ट

फरार आतंकियों की तलाश में सिद्धार्थनगर स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर पोस्ट पर जांच कड़ी कर दी गई है.

फरार आतंकियों की तलाश में सिद्धार्थनगर स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर पोस्ट पर जांच कड़ी कर दी गई है.

UP News: सिद्धार्थनगर में 43वीं एसएसबी वाहिनी के प्रभारी कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि इंडो नेपाल बॉर्डर पर जवानों की सक्रियता को बढ़ा दिया गया है. हर आने जाने वाली की सघन जांच की जा रही है. शक होने पर उनसे पूछताछ भी कर रहे हैं.

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सिद्धार्थ नगर. यूपी एटीएस (UPATS) ने लखनऊ (Lucknow) से 2 आंतकियों को पकड़ा है और इनके दो साथी अभी भी फरार हैं. उन्हें पकड़ने के लिए भारत नेपाल सीमा (Indo Nepal Border) पर एसएसबी के जवान अलर्ट हो गए हैं. उन्हें पकड़ने के लिए पूरा तंत्र लग गया है. नेपाल जाने वाले हर रास्ते पर नाकाबंदी की जा रही है, किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जा रही है. सिद्धार्थनगर में 43वीं एसएसबी वाहिनी के प्रभारी कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि बॉर्डर पर जवानों की सक्रियता को बढ़ा दिया गया है. हर आने जाने वाली की सघन जांच की जा रही है. शक होने पर उनसे पूछताछ भी कर रहे हैं.

बता दें यूपी में इंडो नेपाल बॉर्डर के जुड़े लखीमपुर, बहराइच समेत कई जिलों पर बॉर्डर पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. लखीमपुर खीरी के इंडो नेपाल बॉर्डर के 62 किलोमीटर और सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्ना हो गई है और साथ ही पुलिस फोर्स भी काफी मुस्तैद हो गया है. आशंका है कि नेपाल से भारत की खुली सीमा का फायदा उठाकर आतंकी नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में फरार हो सकते हैं.



लखीमपुर जिले में इंडो-नेपाल बॉर्डर पर गौरीफंटा बॉर्डर पर तैनात एसएसबी कमांडेंट मुन्ना सिंह ने न्यूज़ 18 से खास बातचीत में बताया कि लखनऊ की घटना के बाद सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां काफी चौकन्ना हैं, जितने भी रास्ते नेपाल को जाते हैं, उन रास्तों पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. हर आने जाने वाले आदमी की तलाशी की जा रही है. फिलहाल इंडो नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी गई है. डॉग स्कवाड, सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से बॉर्डर इलाके की सघन चेकिंग की जा रही है. साथ ही सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल और सीसीटीवी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, पुलिस के जवान बॉर्डर इलाके में हर आने-जाने वाले वाहन और व्यक्तियों की सघन जांच कर रहे हैं.

लखीमपुर खीरी की सीमा पर इंडो नेपाल बॉर्डर का 62 किलोमीटर का बॉर्डर लगता है. जिस पर आतंकियों के बॉर्डर पार करने के अंदेशे से सशस्त्र सीमा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की और टीमें गठित कर उनके ग्रस्त को बढ़ा दिया है. हम लोग पूरी तरीके से मुस्तैद हैं. बॉर्डर हर संदिग्ध की जांच की जा रही है.

घुसपैठ का सबसे आसान रास्ता भारत नेपाल सीमा

बता दें पिछले कुछ वर्षों में 4 बड़े आतंकी विभिन्न राज्यों से लगी नेपाल सीमा आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. ये इस प्रकार हैं-

1991 में भारत-नेपाल के बढ़नी सीमा पर खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट की भागा सिंह एवं अजमेर सिंह की गिरफ्तारी हुई.

1991- खालिस्तान एरिया फोर्स का डिप्टी कमांडर सुखबीर सिंह

1993- टाइगर मेनन

1995- आईएसआई एजेंट यासिया बेगम

2000- आसिम अली सहित चार आतंकी

2002- बिहार नेपाल सीमा पर कारतूस का बड़ा जखीरा बरामद किया गया

2007- आतंकवादी नूरबख्श एवं इश्तियाक उर्फ शैतान की गिरफ्तारी

2009- आतंकवादी लियाकत अली शाह

2013- यासीन भटकल

अब्दुल करीम टुंडा को उत्तराखंड नेपाल सीमा से किया गया गिरफ्तार.

इसी को देखते हुए सिद्धार्थनगर जिले से सटे नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया है. रविवार से ही निगरानी बढ़ा दी गई है. सीमा के 5 थानों की फोर्स को सीमा की रखवाली के लिए मुस्तैद कर दिया गया है. देर रात तक विशेष जांच अभियान भी चलाया गया, जिसके तहत हर आने जाने वालों की चेकिंग की गई. 18 स्थानों पर नाका लगाकर सुबह से ही हर आने जाने वाले लोगों की जांच की जा रही थी. बगैर जांच के किसी को भी प्रवेश पर नहीं दिया जा रहा था. गैर परंपरागत मार्गों पर पेट्रोलिंग की जा रही थी जिससे कोई प्रवेश ना कर सके.

पुलिस अधीक्षक राम अभिलाष त्रिपाठी ने कहा है कि सीमा पर गैर परंपरागत मार्गों पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है हर परिस्थिति के लिए प्रशासन सतर्क है. शासन के निर्देश पर अलीगढ़वा, खुनवां, बढ़नी, ककरहवा, ठोठरी बॉर्डर पर एसएसबी एवं पुलिस के जवान पूरी तरह से मुस्तैद हैं.

बता दें पिछले कुछ दिनों में भारत नेपाल सीमा से गैर परंपरागत रास्तों पर लोगों की आवाजाही बढ़ गई है. चाहे इसकी वजह दवाइयां खरीदनी हो, इलाज कराना हो या कोई और जरूरी कार्य, ऐसे में पुलिस प्रशासन एवं एसएसबी असमंजस की स्थिति में आते हैं कि उन्हें मानवता के लिए कार्य करने दें या पूरी तरह से नियम का पालन करें.

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प्रधानाध्यापक की चप्पल से पिटाई: महिला शिक्षामित्र का रोका गया मानदेय, 2 शिक्षक निलंबित

सिद्धार्थनगर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नाराज महिला शिक्षामित्र प्रधानाध्यापक को चप्पल से पिटाई करती दिख रही है.

Sidharthanagar News: प्रधानाध्यापक की चप्पल से पिटाई मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बीईओ की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की है. दो शिक्षक निलंबित किए गए हैं, वहीं पीटने वाली महिला शिक्षामित्र से स्पष्टीकरण तलब किया गया है.

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सिद्धार्थ नगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर (Sidharthanagar) में खुनियांव विकासखंड प्राथमिक विद्यालय अगरडीह की महिला शिक्षा मित्र द्वारा प्रधानाध्यापक को चप्पल से पीटने से जुड़े प्रकरण में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. विभाग ने 2 शिक्षकों को निलंबित कर महिला शिक्षामित्र का अग्रिम आदेश तक वेतन रोक दिया है.

वहीं प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज यादव को बीआरसी, भनवापुर से संबद्ध किया गया. उनके ऊपर शिक्षामित्र से छेड़छाड़ करने एवं जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करना, शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं.

वहीं सहायक अध्यापक तेजपाल को महिला शिक्षामित्र से हुए विवाद का वीडियो बनाने एवं उसे वायरल करने, उपस्थित पंजिका पर फर्जी हस्ताक्षर बनाने, प्रभारी प्रधानाध्यापक के साथ मारपीट करने एवं सहायक अध्यापकों व उच्च अधिकारियों पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए निलंबित किया गया है. निलंबन के दौरान उन्हें बीआरसी, लोटन पर अटैच कर दिया गया है.

इसके अलावा वायरल वीडियो में चप्पल से प्रभारी प्रधानाध्यापक को पीटती दिखने वाली महिला शिक्षा शिक्षामित्र को स्पष्टीकरण देने को कहा है और साथ ही अगले आदेश तक उसका मानदेय रोक दिया गया है. बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बीईओ कुंवर विक्रम पांडे की जांच रिपोर्ट के आधार पर ये कार्रवाई की है.

ये है पूरा मामला
सिद्धार्थनगर की इटवा तहसील के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में महिला शिक्षा मित्र ने प्रधानाध्यापक पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. शिक्षा मित्र की शिकायत का संज्ञान लेकर बीएसए ने जांच के आदेश दिये हैं. शिकायत के अनुसार आगरडीह प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने गुरुवार सुबह शिक्षामित्र को अपने कार्यालय में बुलाया और उसे परेशान करने की कोशिश की. जब उसने विरोध किया तो अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे कार्यालय से भगा दिया.

वीडियो में प्रधानाध्यापक को स्कूल परिसर में दौड़ते हुए देखा जा सकता है और शिक्षा मित्र हाथ में सैंडल (चप्पल) लिए उनके पीछे दौड़ रही है. प्रधानाध्यापक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

सिद्धार्थनगर में महिला शिक्षामित्र ने प्रधानाध्यापक को दौड़ा-दौड़ाकर चप्पल से पीटा, VIDEO VIRAL

सिद्धार्थनगर का एक वीडियो  वायरल हो रहा है, जिसमें नाराज महिला शिक्षामित्र प्रधानाध्यापक को चप्पल से पिटाई करती दिख रही है.

Social Media Viral Video: वायरल वीडियो में नाराज महिला शिक्षा मित्र, प्रधानाध्यापक को चप्पल से पिटाई करती दिख रही है. वीडियो में प्रधानाध्यापक को स्‍कूल परिसर में दौड़ते हुए देखा जा सकता है और शिक्षा मित्र हाथ में सैंडल (चप्पल) लिए उनके पीछे दौड़ रही है.

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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की इटवा तहसील के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक को एक महिला शिक्षिका (शिक्षा मित्र) द्वारा चप्पल से पीटने का मामला सामने आया है. महिला शिक्षा मित्र ने प्रधानाध्यापक पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है जिसका संज्ञान लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं. प्रधानाध्यापक की पिटाई का वीडियो बृहस्पतिवार की शाम को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

शिक्षा मित्र की शिकायत का संज्ञान लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने जांच के आदेश दिये हैं. शिकायत के अनुसार आगरडीह प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने बृहस्पतिवार की सुबह शिक्षा मित्र को अपने कार्यालय में बुलाया और उसे परेशान करने की कोशिश की. जब उसने विरोध किया तो अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे कार्यालय से भगा दिया.

स्कूल परिसर में दौड़ते देखे जा सकते हैं प्रधानाध्यापक
वायरल वीडियो में नाराज महिला शिक्षा मित्र, प्रधानाध्यापक को चप्पल से पिटाई करती दिख रही है. वीडियो में प्रधानाध्यापक को स्‍कूल परिसर में दौड़ते हुए देखा जा सकता है और शिक्षा मित्र हाथ में सैंडल (चप्पल) लिए उनके पीछे दौड़ रही है. शिक्षा मित्र ने बीएसए राजेंद्र सिंह से शिकायत की और उन्होंने प्रखंड शिक्षा अधिकारी को जांच सौंपी है. बीएसए ने कहा है कि जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

UP: 4 जिलों के SP सहित 7 आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर, देखें लिस्ट

यूपी में 7 आईपीएस अफसरों के तबादले हुए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

UP News: यूपी सरकार ने 7 आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर कर दिए हैं, इनमें सिद्धार्थनगर, जालौन, कासगंज और हमीरपुर के एसपी भी बदल दिए गए हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 आईपीएस अफसरों (7 IPS Transfer) के ट्रांसफर कर दिए हैं. इनमें 4 जिलों के कप्तान भी बदले गए हैं. जिन जिलों में एसपी पद पर फेरबदल किया गया है, उनमें सिद्धार्थनगर, जालौन, कासगंज और हमीरपुर शामिल हैं. गृह विभाग द्वारा जारी ट्रांसफर लिस्ट के अनुसार यशवीर सिंह एसपी सिद्धार्थनगर बनाए गए, यहां अब तक तैनात रहे राम अभिलाष त्रिपाठी को एसपी, ग्रामीण अभिसूचना, गोरखपुर भेज दिया गया है. बता दें यशवीर सिंह अभी तक जालौन में एसपी पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, वहां अब उनकी जगह  रवि कुमार को एसपी जालौन भेजा गया है.

इनके अलावा बोत्रे रोहन प्रमोद एसपी कासगंज होंगे, जबकि कमलेश कुमार दीक्षित एसपी हमीरपुर बने. इनके अलावा राम अभिलाष त्रिपाठी एसपी अभिसूचना गोरखपुर बनाए गए हैं, जबकि मनोज सोनकर सेनानायक 12वीं पीएसी फतेहपुर और नरेंद्र कुमार सिंह सेनानायक 15वीं पीएसी आगरा भेजे गए हैं.

ट्रांसफर लिस्ट

यशवीर सिंह- एसपी जालौन से एसपी सिद्धार्थनगर

रवि कुमार- पुलिस उपायुक्त, लखनऊ से एसपी जालौन

बोत्रे रोहन प्रमोद- अपर पुलिस अधीक्षक, नगर आगरा से एसपी कासगंज

कमलेश कुमार दीक्षित- एसपी ग्रामीण, अभिसूचना, गोरखपुर से एसपी हमीरपुर

7 आईपीएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट

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आईपीएस ट्रांसफर लिस्ट


राम अभिलाष त्रिपाठी- एसपी सिद्धार्थनगर से एसपी ग्रामीण अभिसूचना, गोरखपुर

मनोज सोनकर- एसपी, कासगंज से सेनानायक, 12वीं वाहिनी पीएसी, फतेहपुर

नरेंद्र कुमार सिंह- एसपी हमीरपुर से सेनानायक, 15वीं वाहिनी पीएसी, आगरा

इनपुट: ऋषभ मणि त्रिपाठी

UP चुनाव से पहले PM मोदी देंगे बड़ी सौगात, 30 जुलाई को एक साथ 9 मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण

यूपी चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी प्रदेश को मेडिकल कॉलेजों की बड़ी सौगात देने जा रहे हैं. (वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम Photo; PTI)

UP News: पीएम नरेंद्र मोदी यूपी के 9 जिलों देवरिया, एटा, फतेहपुर, गाजीपुर, हरदोई, जौनपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेजों की सौगात देंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थनगर में 30 जुलाई को होगा.

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लखनऊ. यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) एक बड़ी सौगात प्रदेश को देने जा रहे हैं. जानकारी के अनुसार पीएम मोदी यूपी के 9 जिलों मेडिकल कॉलेजों (9 Medical College Inauguration) की सौगात देंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थनगर (Sidharthanagar) में 30 जुलाई को होगा. पीएम मोदी यहां से एक साथ 9 मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण करेंगे. कार्यक्रम तय हो गया है और अब अगले एक से दो दिन में सीएम योगी आदित्यनाथ सिद्धार्थनगर जाकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा ले सकते हैं.

जानकारी के अनुसार जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन होना है, उनमें देवरिया, एटा, फतेहपुर, गाजीपुर, हरदोई, जौनपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर जिले शामिल हैं.

अभी तक की जानकारी के अनुसार इन मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल स्टाफ की भर्ती की प्रकिया भी चल रही है. योजना है कि उद्घाटन के मौके पर खुद पीएम नरेंद्र मोदी 450 लोगों को नियुक्ति पत्र सौंपें. माना जा रहा है कि एक हफ्ते में इन अस्पतालों में कामकाज शुरू हो जाएगा. यही नहीं सरकार की योजना है कि इस साल 13 और मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिए जाएं.

बता दें इन 9 जिलों के अलावा अयोध्या, बहराइच, बस्ती, फिरोजाबाद और शाहजहांपुर में जिला अस्पताल को ही अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है. वहीं मेडिकल कॉलेज झांसी, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, कानपुर और आगरा में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बनाकर इनका विस्तार किया गया है.

इनपुट: अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर: संदिग्ध हालत में महिला टीचर मौत, कमरे में कुंडे से लटकी मिली लाश

सिद्धार्थनगर में संदिग्ध हालत में महिला टीचर मौत (प्रतीकात्मक फोटो)

ब्लॉक एजुकेशन अधिकारी (BLO) अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि घटना के पीछे की वजह अभी तक साफ नहीं हुई है. शिक्षिका के घरवालों को सूचना दे दी गई है.

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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) जिले में शुक्रवार सुबह बर्डपुर ब्लॉक क्षेत्र में तैनात एक प्राइमरी स्कूल की महिला टीचर (Women School Teacher) का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है.

घटना बर्डपुर ब्लॉक क्षेत्र की है. जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्कूल बनकटवा में तैनात एक शिक्षिका प्रतिभा सिंह (30) का शव घर के अंदर कुंडी से लटकता पाया गया. घटना के बारे में मृतका के पति ने जानकारी दी कि मैं शाम को जब घर लौटा तो देखा कि मेरी पत्नी कमरे में फांसी लगाकर छत के कुंडे से लटकी हुई है. तत्काल उसे उतारा गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी. तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी.

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बता दें कि मृतक शिक्षिका प्रतिभा सिंह फतेहपुर जिले की निवासी थी और पलटा देवी रोड पर किराए के मकान में अपने पति व बच्चे के साथ रहती थी. और जिले के बर्डपुर ब्लॉक क्षेत्र के बनकटवा प्राईमरी स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर तैनात थी. ब्लॉक एजुकेशन अधिकारी अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि घटना के पीछे की वजह अभी तक साफ नहीं हुई है. शिक्षिका के घरवालों को सूचना दे दी गई है. उनके आने पर और स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. फिलहाल पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी में जुट गई है. घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

सिद्धार्थनगर: नेपाल में 25 रुपए तक सस्ता मिल रहा डीजल-पेट्रोल, बॉर्डर पर बढ़ गई तस्करी

भारत में तेल की कीमतों में उछाल के बाद नेपाल से पेट्रोल-डीजल की तस्करी बढ़ गई है.

Indo-Nepal Border News: एसएसबी के प्रभारी कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि हम 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं. स्थानीय नागरिक इन पेट्रो पदार्थों की तस्करी कर ले जाते हैं. हमने कई लोगों को पकड़ा भी है बावजूद इसके लोग तस्करी में होने वाले लाभ को देखते हुए धंधा छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

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सिद्धार्थ नगर. देश में डीजल-पेट्रोल की कीमतों (Diesel-Petrol Price) में आग लगी हुई है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में डीजल और पेट्रोल दोनों 100 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच गए हैं. लेकिन पड़ोसी देश नेपाल (Nepal) में इसकी कीमत अभी भी कम ही है. ऐसे में पेट्रोलियम पदार्थों की तस्करी बॉर्डर एरिया में फिर से शुरू हो गई है. इंडो-नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण इसका फायदा तस्कर उठाने लगे हैं. जानकारी के अनुसार नेपाली क्षेत्र से डीजल-पेट्रोल लेकर लोग भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं और सीमावर्ती भारतीय क्षेत्र में इन्हें बेचकर मालामाल हो रहे हैं.

यह गोरखधंधा स्थानीय पुलिस एवं भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के नाक के नीचे ही हो रहा है. हालांकि कई तस्कर इनके हाथ भी लगे हैं लेकिन खुली सीमा होने के कारण तस्कर आसानी से नेपाल से पेट्रोलियम पदार्थों की तस्करी कर ले जाते हैं सीमावर्ती भारतीय बाजारों में बेच रहे हैं.

68 किलोमीटर की एक खुली सीमा

भारत नेपाल के बीच कुल 1750 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से सिद्धार्थनगर जनपद में 68 किलोमीटर की खुली सीमा है. भारत नेपाल में कुल 70 बॉर्डर पोस्ट हैं. जहां से छोटी बड़ी गाड़ियों का आवागमन होता है. 68 किलोमीटर खुली सीमा में बढ़नी, खुनवां, अलीगढ़वा और ककरहवा बॉर्डर हैं, जहां से छोटी-बड़ी गाड़ियों का आवागमन होता है. इसके अलावा बॉर्डर पर बड़ी तादाद में ऐसे रास्ते हैं, जहां से आवागमन फुटपाथ के रास्ते हो सकता है. पिछले कुछ समय से तेल तस्करी के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है.

केस-1

एसएसबी की टीम ने रविवार को भारत-नेपाल सीमा से 50 लीटर डीजल के साथ एक व्यक्ति को अलीगढ़वा बॉर्डर से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार तस्कर नेपाल के चाकरचौड़ा गांव का निवासी है और तेल की तस्करी करके भारत बेचने आया था.

केस-2

लोटन पुलिस ने रविवार को 100 लीटर नेपाली डीजल के साथ एक व्यक्ति को ठोठरी बॉर्डर से गिरफ्तार किया था. पकड़ा गया आरोपी भी नेपाल से पेट्रोलियम पदार्थ खरीद कर भारत में बेच रहा था.

सीमावर्ती इलाकों में बहुत सारे लोग साइकिल से पैदल वाले रास्तों पर नेपाल राष्ट्र चले जाते हैं और वहां से गैलन में डीजल या पेट्रोल भरकर बहुत ही आसानी से भारत में प्रवेश कर जाते हैं. ज्यादातर तस्कर सीमावर्ती इलाकों के ही नागरिक हैं और उन्हीं सभी रास्तों का ज्ञान होता है. दबी-जबान से लोग पुलिस से सेटिंग की भी बात करते हैं.

नेपाल में भारत से सस्ता है पेट्रोलियम पदार्थ

पेट्रोल व डीजल की कीमतों पर गौर करें तो भारत और नेपाल में कीमतों में 25 से 30 रुपए का अंतर है भारत में बढ़ती कीमतों की वजह से सीमा पर नेपाल से धड़ल्ले से तेल की तस्करी शुरू की गए हो गई है. भारतीय क्षेत्रों में पेट्रोल की कीमत ₹97.29 पैसे एवं डीजल ₹90.30 पैसे प्रति लीटर है, जबकि नेपाल में पेट्रोल ₹78 (125 नेपाली करेंसी) में व डीजल ₹66 (107 नेपाली करेंसी) प्रति लीटर मिल रहा है. इस तरह से नेपाली क्षेत्र में डीजल एवं पेट्रोल खरीदने पर 25 से 30 रुपए प्रति लीटर की आसानी से बचत हो जाती है.

पकड़े गए तस्कर धंधाे छोड़ने को तैयार नहीं: एसएसबी

एसएसबी के प्रभारी कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि हमारे जवान सीमावर्ती क्षेत्रों पर 24 घंटे निगरानी करते हैं और कई जगहों पर मौजूद भी रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी स्थानीय नागरिक आसानी से इन पेट्रो पदार्थों की तस्करी कर ले जाते हैं. हमने कई लोगों को पकड़ा भी है बावजूद इसके लोग तस्करी में होने वाले लाभ को देखते हुए यह धंधा छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

पुलिस प्रशासन पेट्रोलिंग कर रहे हैं: एसपी

सिद्धार्थनगर जिले के पुलिस अधीक्षक राम अभिलाष त्रिपाठी ने बताया कि पेट्रोलियम पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार सीमावर्ती क्षेत्रों में पेट्रोलिंग कर रही है. तस्करों को पकड़ा भी जा रहा है. हालांकि पुलिस प्रशासन एवं एसएसबी अपनी तरफ से कोशिश कर रही है लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग स्थानीय क्षेत्रों से पूरी तरह से वाकिफ है और तस्करी करने के नए-नए रास्ते खोज लेते हैं.

UP News:सिद्धार्थनगर में बड़ा सड़क हादसा, खड़े ट्रक में घुसी पिकअप, तीन की मौत, 6 गंभीर

सिद्धार्थनगर सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत

Siddharthnagar Road Accident: घटना सोमवार रात लगभग 9:00 बजे उस समय घटी जब एनएच 233 पर स्थित करही मस्जिदिया के समीप मौरंग लदा ट्रक यूपी 51 एटी 6418 खराब होने की वजह से खड़ा था. इसी बीच बस्ती से सवारी लेकर यूपी 51 टी 4300 महिंद्रा मैक्स पिकअप सवारी गाड़ी ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दिया.

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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) जनपद में सोमवार देर शाम हुए सड़क हादसे (Road Accident) में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य घायल हैं. घायलों में सभी की हालत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट कराया गया है. हादसा उस वक्त हुआ जब बांसी में ख़राब होने की वजह से खड़ी ट्रक में सवारियों से भरी पिकअप जा टकराई। हादसा इतना जबरदस्त था कि तीन की मौत मौके पर ही हो गई. हादसे की सूचना पर कोतवाली प्रभारी छत्रपाल सिंह दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और घायलों को इलाज के लिए स्थानीय चिकित्सालय तिलौली पहुंचाया, जहां सभी की हालत चिंताजनक बनी हुई है.

घटना सोमवार रात लगभग 9:00 बजे उस समय घटी जब एनएच 233 पर स्थित करही मस्जिदिया के समीप मौरंग लदा ट्रक यूपी 51 एटी 6418 खराब होने की वजह से खड़ा था. इसी बीच बस्ती से सवारी लेकर यूपी 51 टी 4300 महिंद्रा मैक्स पिकअप सवारी गाड़ी ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दिया. इस हादसे में पिकअप में सवार तीन लोगों की घटनास्थल पर मौत हो गई, जबकि छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. जिनकी हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है. घायलों को कोतवाली प्रभारी छत्रपाल सिंह ने इलाज हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तिलौली में एडमिट कराया.

ये हुए घायल
घायलों की पहचान बांसी आजाद नगर निवासी देवदत्त त्रिपाठी 55 वर्ष, नचनी निवासी बलराम उपाध्याय 65 वर्ष  सर्की नानकार खेसरहा निवासी 45 वर्ष घिसायवन, बेलोहा बाजार निवासी राजकुमार पुत्र राघव राम, 50 वर्षीय सूरज पुत्र राजकुमार, सेहरी सेवक निवासी सोनू तिवारी 35 वर्ष के रूप में हुई है. पुलिस ने तीनों शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है.

धनबाद में थाने के पास पेट्रोलपंप से ढाई लाख की लूट, कुछ नहीं कर पाई पुलिस

अपराधियों ने पेट्रोल भराने के बहाने लूट को अंजाम दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

Dhanbad News: पेट्रोल भराने के बहाने अपराधियों ने कर्मियों को सोने से जगाया. उसके बाद अचानक हमला कर सभी को बंधक बना लिया. और पंप में रखे ढाई लाख लेकर फरार हो गये.

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रिपोर्ट- संजय गुप्ता

धनबाद. झारखंड के धनबाद में थाने से चंद कदम की दूरी पर पेट्रोलपंपकर्मियों को बंधक बनाकर लूट (Loot) को अंजाम दिया गया. अपराधियों ने दो लाख पचास हजार रुपये लूट लिये. घटना सोमवार अहले की है. दरअसल पेट्रोल भराने के बहाने अपराधियों ने कर्मियों को सोने से जगाया. उसके बाद अचानक हमला कर सभी को बंधक बना लिया. और पंप में रखे ढाई लाख लेकर फरार हो गये. अपराधी हथियार से लैस थे.

पम्पकर्मियों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी. जिसके बाद कतरास थाने की पुलिस पेट्रोल पंप पर पहुंचकर छानबीन की. कर्मियों से पूछताछ किया. कतरास थाना प्रभारी ने बताया कि अहले सुबह पेट्रोलपंप में लूट को अंजाम दिया गया. ढाई लाख रुपये लूट लेने की बात सामने आई है. जांच चल रही है.

थानाप्रभारी ने कहा कि घटना के वक्त पुलिस ड्यूटी पर तैनात थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि कैसे थाने के पास अपराधी लूट की घटना को अंजाम दे दिया. बता दें कि हाल के दिनों में जिले में आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ है. कतरास थाना क्षेत्र में ही शनिवार को अपराधियों ने कोयला कारोबारी के घर बमबाजी की घटना को अंजाम दिया. जिससे इलाके में दहशत फैल गई. अपराधियों ने धमकी भरा पत्र छोड़कर कारोबारी से रंगदारी की मांग की है. नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी है. इस घटना में अमन सिंह के गिरोह का नाम सामने आया है.

Covishield-Covaxin के कॉकटेल पर अखिलेश यादव का तंज, सरकार से पूछा- वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर किसका चित्र होगा?

सिद्धार्थनगर में 20 लोगों को अलग अलग वैक्‍सीन लगने को लेकर सपा ने यूपी सरकार को घेरा है.

सिद्धार्थनगर के बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 20 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज कोविशील्‍ड और दूसरी डोज कोवैक्सीन (Covaxin) की लगाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस को लेकर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने योगी सरकार पूछा है कि वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर किसका चित्र होगा?

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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में इस समय 18 से 44 साल के लोगों के वैक्‍सीनेशन का काम चल रहा है. इस बीच यूपी के सिद्धार्थनगर में कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है. दरअसल, स्वास्थ्यकर्मियों ने कुछ लोगों को पहली डोज के तौर पर कोविशील्ड (Covishield) और दूसरी डोज के रूप में कोवैक्सीन (Covaxin) की लगा दी है. इस वजह से न सिर्फ वैक्सीन लगवा चुके लोग डरे हुए हैं बल्कि योगी सरकार पर विपक्ष भी हमलावर हो गया है.

समाजवादी पाीर्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है. उन्‍होंने कहा कि यूपी के सिद्धार्थनगर में 20 ग्रामीणों को कोरोना की पहली व दूसरी डोज में कोवीशील्ड व कोवैक्सीन के अलग-अलग टीके लगाया जाना, भाजपा सरकार की लापरवाही का निकृष्ट उदाहरण है. इससे प्रभावित लोगों को डॉक्टरी निगरानी में रखा जाए. साथ ही उन्‍होंने योगी सरकार पर तंज कसते हुए पूछा है कि इस तरह के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर किसका चित्र होगा?

यहां का है पूरा मामला
यह पूरा मामला सिद्धार्थनगर के बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र का है, जहां औदही कलां समेत एक अन्‍य गांव में लगभग 20 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज कोविशील्‍ड की लगाई गई थी. इसके बाद 14 मई को दूसरी डोज लगाते समय स्वास्थ्यकर्मियों ने भारी लापरवाही बरतते हुए कोवैक्‍सीन लगा दी. जब ये बात स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों को पता चली तो हड़कंप मच गया. यही नहीं, वैक्‍सीन लगाने वाले कर्मी एक दूसरे पर इस गलती का आरोप लगाने लगे. लेकिन जब वैक्‍सीन के कॉकटेल की जानकारी वैक्सीन लगवा चुके लोगों को हुई तो दहशत में आ आ गए. हालांकि अभी तक किसी को कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या नहीं हुई है, लेकिन वैक्‍सीन लगवाने वाले लोग और पूर्व सीएम अखिलेश यादव इस घोर लापरवाही में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों और जिम्‍मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

जांच के बाद होगा एक्‍शन
इस मामले में सीएमओ संदीप चौधरी ने विभागीय लापरवाही स्वीकार करते हुए कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों ने करीब 20 लोगों को लापरवाही बरतते हुए कॉकटेल वैक्सीन लगा दी है. हमारी टीम इन सभी लोगों पर नजर बनाए हुए है और अभी तक किसी को कोई दिक्‍कत नहीं हुई है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि हमने जांच टीम बना दी है और रिपोर्ट आते ही दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

UP: पहली डोज Covishield, दूसरी डोज Covaxin; वैक्सीन 'कॉकटेल' पर हंगामा

बढ़नी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में वैक्सीनेशन को लेकर भारी लापरवाही...

मीडिया से बात करते हुए सिद्धार्थ नगर सीएमओ संदीप चौधरी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को एक ही वैक्सीन के दोनों डोज दिए जाने चाहिए. बढ़नी मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं.

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सिद्धार्थ नगर. जिले के बढ़नी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में वैक्सीनेशन को लेकर भारी लापरवाही सामने आई है. बढ़नी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में 20 ग्रामीणों को पहली डोज कोविडशील्ड (Covidshield) की लगाने के बाद दूसरी डोज कोवैक्सीन (Covaxin) की लगा दी गई. सीएमओ संदीप चौधरी ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही है. बढ़नी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में औदही कला गांव के 20 लोगों को पहली डोज कोविडशील्ड की दी गई लेकिन 14 मई को दूसरी डोज कोवैक्सीन की दी गई. हालांकि जिन लोगों को वैक्सीन का ‘कॉकटेल’ दिया गया, वो सब ठीक है.

मीडिया से बात करते हुए सिद्धार्थ नगर सीएमओ संदीप चौधरी ने कहा, “वैक्सीन के 'कॉकटेल' की किसी भी प्रकार की गाइडलाइन भारत सरकार की ओर से जारी नहीं की गई है. इसलिए ये मामला लापरवाही का है. किसी भी व्यक्ति को एक ही वैक्सीन के दोनों डोज दिए जाने चाहिए."

सीएमओ संदीप चौधरी ने स्वीकार किया कि लगभग 20 लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों ने लापरवाही बरतते हुए 'कॉकटेल वैक्सीन' लगा दी है. हमारी टीम इन सभी लोगों पर नजर बनाए हुए है. अभी तक किसी व्यक्ति में कोई समस्या नहीं देखने को नहीं मिली है. इस गंभीर लापरवाही के लिए हमने जांच टीम बना दी है. हमारे पास जांच रिपोर्ट आ गई है. इसमें जो भी विभागीय कर्मचारी दोषी हैं, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिन पर आरोप सिद्ध हो चुके हैं. उन पर विभागीय कार्यवाही की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा, "हमारी टीम ने गांव का दौरा किया था और उन लोगों से बात की, जिन्हें वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज अलग-अलग दी गई. सभी लोग ठीक हैं और फिलहाल उन्हें किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है. हालांकि पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं."

इसी बीच, औदही कला गांव के एक ग्रामीण रामसूरत ने कहा, "मुझे 1 अप्रैल को पहली डोज कोविडशील्ड की दी गई जबकि 14 मई को दूसरी डोज कोवैक्सीन की दी गई. किसी ने मुझसे यह नहीं पूछा कि मुझे पहली डोज कौनसी लगी थी. मुझे कोविडशील्ड के बजाय कोवैक्सीन दी गई. मुझे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन डर जरूर है कि मेरे शरीर के भीतर कुछ हो ना जाए. अभी तक कोई भी हमसे पूछताछ करने नहीं आया है. मेरे गांव में 20 लोगों को गलत वैक्सीन दी गई."

UP: बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से दिया इस्तीफा, EWS कोटे से हुई थी भर्ती

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री  डॉ सतीश द्विवेदी ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से दिया इस्तीफा

Lucknow News: डॉ अरुण द्विवेदी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया है. गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के भाई की गरीब कोटे से नियुक्ति की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुयी थी.

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लखनऊ/सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी (Basic Education Minister Dr Satish Dwivedi) के भाई डॉ अरुण द्विवेदी (Dr Arun Dwivedi) ने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी (Siddhartha University) में मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से इस्तीफा दे दिया है. डॉ अरुण द्विवेदी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया है. गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के भाई की गरीब कोटे से नियुक्ति की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुयी थी. जिसके बाद राजभवन ने  मामले का संज्ञान लिया था. नियुक्ति के बाद यह बात चर्चा में थी कि शिक्षा मंत्री ने  रसूख का इस्तेमाल करते हुए भाई की नियुक्ति ईडब्लूएस कोटे से करवाई है.

मामला सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी से लेकर तमाम विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी. हालांकि सतीश द्विवेदी ने पूरे प्रकरण से खुद को दूर रखने की भी कोशिश की थी. बुधवार को सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति ने इस बात की पुष्टि कि डॉ अरुण द्विवेदी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है.

उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बानी हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे से हुई. इस पोस्ट पर लोग जमकर चुटकी भी ले रहे थे. साथ ही नियुक्ति पर सवाल भी उठा रहे थे.

अरुण द्विवेदी की पत्नी भी हैं असिस्टेंट प्रोफेसर
अरुण द्विवेदी की पत्नी डॉ.विदुषी दीक्षित मोतिहारी जनपद के एमएस कॉलेज में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. पत्नी की सैलरी 70 हजार से ज्यादा है. अरुण द्विवेदी खुद वनस्थली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे. वहां से इस्तीफा देकर उन्होंने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में ज्वाइन किया था.

2019 में जारी हुआ था ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र 
अरुण द्विवेदी का ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र 2019 में जारी हुआ था. इस पर उन्हें 2021 में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नौकरी मिली। इस संबंध में डीएम दीपक मीणा ने बताया कि 2019-20 के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जो मार्च 2020 तक मान्य था.

गरीब कोटे से नियुक्ति सोशल मीडिया पर बनी थी चर्चा का विषय
दरअसल, डॉ अरुण द्विवेदी की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर यह बात जमकर हुई थी कि मंत्री के भाई की गरीब कोटे से नियुक्ति हुई है. इस पोस्ट को कई सारे लोगों ने शेयर तो किया ही, इसके साथ ही फेसबुक पर तरह तरह के कमेंट भी करने लगे. सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी के कोटे में नियुक्ति होना लोगों के मन में कई तरह के सवाल पैदा कर रहा था. सिद्धार्थनगर जिले इटवा तहसील से विधायक डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी गत शुक्रवार को ही सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ज्वाइन किए थे. उनके ज्वाइन करने के बाद से ही सोशल मीडिया पर तरह तरह की पोस्ट वायरल होने लगी थी.

कुलपति ने कही थी ये बात
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे से बात करने पर उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान में लगभग डेढ़ सौ आवेदन आए थे. मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों का चयन किया गया. इनमें अरुण कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद भी थे. इन्हीं 10 लोगों का इंटरव्यू हुआ तो अरुण दूसरे स्थान पर रहे. इंटरव्यू एवं एकेडमिक तथा अन्य अंको को जोड़ने पर अरुण पहले स्थान पर आए. इस वजह से इनका चयन हुआ है. ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रशासन जारी करता है. शैक्षिक प्रमाण पत्र सही था. इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है. सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी हुई कि वह मंत्री जी के भाई हैं. अगर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो वह निश्चित रूप से दंड के भागी हैं.

Siddharthnagar News: पंचायत चुनाव जीत कर भी 376 प्रधान नहीं चला सकेंगे 'गांव की सरकार'

सिद्धार्थनगर में आज नवनिर्वाचित प्रधान लेंगे शपथ

Gram Pradhan Oath Taking Ceremony: 376 ग्राम पंचायतों में दो तिहाई बहुमत की औपचारिक संख्या सीट के सापेक्ष नहीं आने की वजह से यहां के प्रधान शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो सकते.

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सिद्धार्थनगर. जिले में ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats) की संख्या 1136 है, जिसमें से 760 ग्राम प्रधान 25 और 26 मई को शपथ लेंगे. इसके लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है. जिन ग्राम पंचायतों के प्रधान शपथ लेंगे  उनकी पहली बैठक 27 मई को होगी. इस दौरान वे सदस्यों के साथ बैठक करेंगे और गांवों के विकास की रूपरेखा तैयार कर समितियों का गठन करेंगे. जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चुनाव हुआ था, इनमें से दो उम्मीदवारों की चुनाव के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, इन सीटों पर 9 मई को दोबारा मतदान कराया गया था. लेकिन 376 ग्राम पंचायतों में दो तिहाई बहुमत की औपचारिक संख्या सीट के सापेक्ष नहीं आने की वजह से यहां के प्रधान शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो सकते. जब तक औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जाती तब तक प्रशासक ही इन गांव की कार्यवाही को देखेंगे. बाकी 760 ग्राम प्रधान 2 दिन के अंदर शपथ ले लेंगे.

लिहाजा जीत कर भी जिले के 376 ग्राम प्रधानों से प्रधानी फिलहाल तब तक दूर रहेगी जब तक उनके गांव के दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्य चुनकर नहीं आ जाते. ऐसे में 25 एवं 26 मई को हो रहे प्रधान पद की शपथ के लिए एवं गांव की सरकार चलाने के लिए दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्यों का होना जरूरी है, लेकिन पद रिक्त रह गए हैं और कई जगहों पर ग्राम पंचायत सदस्यों ने पर्चा भी नहीं भरे थे. ऐसे में अब इन ग्राम पंचायतों में छह महीने के भीतर फिर से उपचुनाव कराकर पंचायत सदस्य चुने जाएंगे.

130363 में से 8000 सदस्य चुने गए
जिले में ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या 13,363 है. इसमें से 8000 ही चुनाव जीतकर या निर्विरोध चुन कर आए हैं. प्रधानों की शपथ में इन पंचायत सदस्यों की संख्या का पूरा होना जरूरी है. अन्यथा ग्राम प्रधान जीतकर भी गांव की सरकार नहीं चला सकेंगे.

DPRO ने कही ये बात
जिला पंचायत राज अधिकारी आदर्श ने कहा है कि जिले में 1136 प्रधान पद हैं जिसमें से 760 ग्राम प्रधान शपथ ले सकेंगे. ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायत सदस्यों के दो तिहाई संख्या पूरी होने के बाद ही शपथ दिलाई जाएगी. रिक्त पदों की सूची तैयार कर चुनाव आयोग को भेज दी जा रही है. जब तक दो तिहाई बहुमत की संख्या पूरी नहीं हो जाती तब तक ये ग्राम प्रधान शपथ नहीं ले सकते.

मेरे भाई का चयन निष्पक्ष रूप से हुआ, किसी को परेशानी है तो जांच कराए: सतीश द्विवेदी

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी अपने भाई अरुण द्विवेदी के साथ।

UP की योगी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

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सिद्धार्थ नगर. उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों के बीच यह हंसी का पात्र बन रहा है कि मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे में कैसे हो गई. वहीं मंत्री सतीशचंद्र द्विवेदी ने अपने भाई के चयन को निष्पक्ष ठहराया है. उन्होंने सोनभद्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि सभी को बोलने का अधिकार है. लेकिन मेरे भाई का चयन निष्पक्ष है. 

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट को कई सारे लोगों ने ट्वीट तो किया ही इसके साथ ही फेसबुक पर तरह तरह के कमेंट भी करने लगे. सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी के कोटे में नियुक्ति होना लोगों के मन में कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है. सिद्धार्थनगर जिले इटवा तहसील से विधायक डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी शुक्रवार को ही सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ज्वाइन कर लिए और उसके ज्वाइन करने के बाद से ही सोशल मीडिया पर तरह तरह की पोस्ट वायरल होने लगी थी.

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे से बात करने पर उन्होंने बताया कि कि मनोविज्ञान में लगभग डेढ़ सौ आवेदन आए थे मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों का चयन किया गया. इनमें अरुण कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद भी थे. इन्हीं 10 लोगों का इंटरव्यू हुआ तो अरुण दूसरे स्थान पर रहे इंटरव्यू एवं एकेडमी तथा अन्य अंको को जोड़ने पर अरुण पहले स्थान पर आकर इस वजह से इनका चयन हुआ है. ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रशासन जारी करता है. शैक्षिक प्रमाण पत्र सही था इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है. सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी हुई कि वह मंत्री जी के भाई हैं अगर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो वह निश्चित रूप से दंड के भागी हैं.

इधर, मंत्री ने कहा कि मेरे भाई का चयन निष्पक्ष 
सोनभद्र में एक प्रेस कांफ्रेंस में बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश दिवेदी ने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मेरे भाई का चयन निष्पक्ष रूप से हुआ है यह महज दुर्भाग्य है कि वह मेरा भाई है, इस संविधान में सभी को बोलने का हक है और जिन किसी को परेशानी है वह जांच करा सकते हैं. सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मेरे भाई के चयन में मेरा कोई हाथ नहीं है, ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेशन प्रशासन का मामला है.

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की 2 पद खाली था जिसमें से एक पद ओबीसी कैटेगरी में था तथा दूसरा पद आर्थिक रुप से गरीब सामान्य वर्ग के लिए था, जिनमें से आर्थिक रुप से गरीब एवं सामान्य वर्ग के अंतर्गत चयन डॉ अरुण द्विवेदी का हुआ है और उन्हें गृह जनपद भी दिया गया है. लोगों के मन एक सवाल बना हुआ है कि मंत्री के भाई गरीब कैसे हो सकते हैं.

UP: बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई गरीब कोटे से बने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर

सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी गरीब कोटे से बने असिस्टेंट प्रोफेसर

Siddharthnagar News: सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे से हुई. इस पोस्ट पर लोग जमकर चुटकी भी ले रहे हैं. साथ ही नियुक्ति पर सवाल भी उठा रहे हैं.

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सिद्धार्थ नगर. उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) में बेसिक शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे डॉ सतीश द्विवेदी (Dr Satish Dwivedi) के भाई डॉ अरुण द्विवेदी (Dr Arun Dwivedi) का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय (Siddhartha University) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बानी हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे से हुई. इस पोस्ट पर लोग जमकर चुटकी भी ले रहे हैं. साथ ही नियुक्ति पर सवाल भी उठा रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट को कई सारे लोगों ने शेयर तो किया ही, इसके साथ ही फेसबुक पर तरह तरह के कमेंट भी करने लगे. सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी के कोटे में नियुक्ति होना लोगों के मन में कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है. सिद्धार्थनगर जिले इटवा तहसील से विधायक डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी शुक्रवार को ही सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ज्वाइन कर लिए और उसके ज्वाइन करने के बाद से ही सोशल मीडिया पर तरह तरह की पोस्ट वायरल होने लगी थी.

कुलपति ने कही ये बात
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे से बात करने पर उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान में लगभग डेढ़ सौ आवेदन आए थे. मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों का चयन किया गया. इनमें अरुण कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद भी थे. इन्हीं 10 लोगों का इंटरव्यू हुआ तो अरुण दूसरे स्थान पर रहे. इंटरव्यू एवं एकेडमिक तथा अन्य अंको को जोड़ने पर अरुण पहले स्थान पर आए. इस वजह से इनका चयन हुआ है. ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रशासन जारी करता है. शैक्षिक प्रमाण पत्र सही था. इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है. सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी हुई कि वह मंत्री जी के भाई हैं. अगर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो वह निश्चित रूप से दंड के भागी हैं.

उठ रहे ये सवाल
गौरतलब है की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की 2 पद खाली था. जिसमें से एक पद ओबीसी कैटेगरी में था तथा दूसरा पद आर्थिक रुप से गरीब सामान्य वर्ग के लिए था. जिनमें से आर्थिक रुप से गरीब एवं सामान्य वर्ग के अंतर्गत चयन डॉ अरुण द्विवेदी का हुआ है और उन्हें गृह जनपद भी दिया गया है. लोगों के मन एक सवाल बना हुआ है कि मंत्री के भाई गरीब कैसे हो सकते हैं?

(रिपोर्ट: शरद त्रिपाठी)

UP: कोरोना काल में काम कर रहे पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने उठाया ये कदम

कोरोना काल में काम करने वाले पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत (File photo)

यूपी के कुछ जनपदों के पुलिस विभाग (UP Police Department) ने अपने संसाधनों से अधिक संख्या में बेडों की व्यवस्था की है.

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लखनऊ. कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के खिलाफ जंग में बड़ी भूमिका निभाने वाली यूपी पुलिस, पीएसी के जवान और जीआरपी कर्मियों को बीमारी से बचाने के लिये योगी सरकार (Yogi Government) शुरुआत से बड़े प्रयास कर रही है. सरकार के निर्देश पर पुलिसकर्मियों और संक्रमित होने वाले पीएसी के जवानों को तत्काल इलाज की सुविधा दी जा रही है. प्रदेश के 66 जनपदों की पुलिस लाइनों में और पीएसी की कुल 34 वाहिनियों में कोविड केयर सेंटर की स्थापना की गई है.

सरकार के निर्देश पर फ्रंटलाइन पर काम करने वाले 'कर्मयोगियों' (पुलिसकर्मी और पीएसी जवान) के इलाज के लिये पुलिस लाइनों में कुल 2993 बेड के कोविड केयर सेंटर बनाए गये हैं, जिनमें से 299 ऑक्सीजन वाले बेड हैं. जबकि पीएसी वाहिनियों में जवानों को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिये कुल 628 बेड उपलब्ध कराए गये हैं. इनमें से 45 ऑक्सीजनयुक्त बेड हैं. कोविड केयर-सेंटर में कुल 589 पुलिसकर्मी भर्ती हुए जिनमें से 244 पुलिसकर्मी निगेटिव होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं.

जबकि 322 पुलिसकर्मी वर्तमान में इलाज प्राप्त कर रहे हैं. जीआरपी की ओर से 107 बेडों और प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा 236 बेडों का कोविड केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है. सरकार के निर्देशों पर तत्काल दी जा रही इलाज की सुविधा से पुलिसकर्मी और पीएसी जवानों बीमारी को मात देकर स्वस्थ हो रहे हैं.

हमीरपुर, सिद्धार्थनगर, उन्नाव में बने आइसोलेशन वार्ड
सरकार के निर्देश पर यूपी पुलिस की ओर से बनाए गये कोविड केयर सेंटरों के लिये पुलिस लाइन में जगह नहीं मिलने पर उनको कमिश्नरेट पुलिस लाइनों या फिर स्टेडियमों में संचालित जा रहा है. हमीरपुर, सिद्धार्थनगर व उन्नाव में पुलिस लाइन्स के बैरकों को आइसोलेशन वार्ड के रूप में स्थापित किया गया है. वाराणसी ग्रामीण में पुलिस लाइन न होने के कारण कमिश्नरेट पुलिस लाइन में कोविड केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है.

गोरखपुर, अलीगढ़ और हरदोई में 110 बेड के कोविड सेंटर
यूपी के कुछ जनपदों के पुलिस विभाग ने अपने संसाधनों से अधिक संख्या में बेडों की व्यवस्था की है. इनमें गोरखपुर में 200 बेड, अलीगढ़ में 120 बेड, हरदोई में 110 बेड, गाजियाबाद में 40 ऑक्सीजनयुक्त सहित 90 बेड बढ़ाए गये हैं. बहराइच में 60 बेड, मुजफ्फरनगर में 16 ऑक्सीजनयुक्त सहित 66 बेड, लखनऊ कमिश्नरेट में 20 ऑक्सीजन वाले बेड सहित 57 बेड हो गये हैं. मेरठ में सभी 30 ऑक्सीजनयुक्त बेड, गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में 10 ऑक्सीजनयुक्त सहित 52 बेड, कानपुर कमिश्नरेट में सभी 16 ऑक्सीजनयुक्त बेड और वाराणसी कमिश्नरेट में 54 बेडों का कोविड केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है.

Viral Video: महिला मरीज को फेंककर भाग रहे थे एंबुलेंस कर्मी, लोगों के विरोध पर दोबारा चढ़ाया

सिद्धार्थनगर में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एम्बुलेंस कर्मी का अमानवीय व्यवहार सामने आया है.

Sidharthanagar News: जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों के ऊपर मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है. जिलाधिकारी ने बताया कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त बताई जा रही है, रोज जिला अस्पताल के सामने बैठी रहती थी.

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सिद्धार्थनगर. एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग (Health Department) लोगों की स्वस्थ करने अपनी पुरजोर कोशिश कर रहा है, वहीं ब्लड बैंक के एंबुलेंस कर्मी (Ambulance) मरीज को कहीं पर भी फेंक कर भागने की कोशिश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो (Viral Video) में ब्लड बैंक के एम्बुलेंस कर्मी का अमानवीय व्यवहार सामने आया है. वायरल वीडियो में एंबुलेंस कर्मी महिला को एंबुलेंस से फेंककर भागते हुए दिख रहा है. मौके पर मौजूद कस्बावासियों के विरोध करने पर वापस एम्बुलेंस में महिला को लादा गया.

इस पूरी घटना का लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. ये वीडियो आज ही का बताया ज रहा है. सदर थाना क्षेत्र के मालगोदाम का ये वायरल वीडियो बताया जा रहा है.

वायरल वीडियो ने मचाया बवाल



उधर मामले में वीडियो वायरल होने के बाद जिलाधिकारी ने इसका संज्ञान ले लिया है. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों के ऊपर मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त बताई जा रही है, रोज जिला अस्पताल के सामने बैठी रहती थी.

सिद्धार्थनगर में लगभग 100 कौवों की रहस्यमय मौत, बर्फ फ्लू की आशंका से ग्रामीण भयभीत

ग्रामीणों ने बातचीत में बताया कि कई मृत कौवों को जानवर उठा कर ले गए जबकि कई अभी भी खेतों में मरे पड़े हुए हैं

इतनी बड़ी संख्या में कौवों के मृत (Crows Dead) पाए जाने की सूचना मिलने पर वन विभाग (Forest Department) हरकत में आ गया है. विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आसपास के क्षेत्र का मुआयना किया. वन विभाग द्वारा कुछ मृत कौवों के सैंपल को लैब भेजने की कार्रवाई की जा रही है

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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) जिले में रहस्यमय तरीके से 100 के लगभग कौवों की मृत्यु (Crows Dead) हो गई. इतनी बड़ी संख्या में कौवों की मौत होने से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है. घटना कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के मजिगवा गांव के पास की है जहां तकरीबन सौ कौवों की रहस्यमय मौत हो गई है. ग्रामीणों ने देखा कि कौवों के झुंड खेतों में चारों तरफ मृत पड़े हैं. यह स्थान भारत नेपाल बॉर्डर (India Nepal Border) के नजदीक है.

इतनी बड़ी संख्या में कौवों के मृत पाए जाने की सूचना मिलने पर वन विभाग हरकत में आ गया है. विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आसपास के क्षेत्र का मुआयना किया. इलाके की कांबिंग कर विभाग अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाने में जुट गया है. वन विभाग द्वारा कुछ मृत कौवों के सैंपल को लैब भेजने की कार्रवाई की जा रही है. गांववालों से बातचीत में पता चला कि कुछ मृत कौवौं को जानवर उठा ले गए हैं बाकी यहीं खेत में पड़े मिले हैं.

करोना संक्रमण या बर्ड फ्लू की आशंका से भयभीत ग्रामीण

इस बारे में डीएफओ आकाश दीप वधावन ने कहा कि कौवा का आईक्यू लेवल बहुत हाई होता है, और ऐसे में ओलावृष्टि के कारण इनकी मृत्यु असामान्य है. बच्चों की मौत तो हो सकती है लेकिन वयस्क कौवों की मौत नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि मौसम में अचानक बदलव के कारण ऐसा संभव है, साथ ही बर्ड फ्लू की भी आशंका है.

वहीं, सोशल मीडिया में फैली खबर (अफवाह) जिसमें यह कहा जा रहा है कि 5जी के ट्रायल रेडिएशन से पक्षियों की मौत हो रही है. ग्रामीण कौवों की रहस्यमय तरीके से हो रही मौत को इससे जोड़कर देख रहे हैं. इस संबंध में पूछे जाने पर डीएफओ ने बताया कि यह शोध का विषय है. उन्होंने कहा कि लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही इसके कारणों का पता चलेगा.

कोरोना टीकाकरण के बारे में अफवाह फैलाने पर 3 व्यक्ति गिरफ्तार, SDM ने सुनाई अनोखी सजा

यूपी के सिद्धार्थनगर में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर अफवाह फैलाने वाले तीन युवकों को एसडीएम ने अनोखी सजा सुनाई है.

Sidharthanagar News: एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने अनोखा फैसला सुनाते ही कोरोना वैक्सीनेशन के खिलाफ अफवाह फैलाने वाले तीनों व्यक्तियों से कहा कि आपको 100-100 व्यक्तियों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना होगा और लगवाना भी होगा. लोगों को जागरूक भी करना होगा.

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सिद्धार्थ नगर. एक तरफ जहां प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार कोरोना (COVID-19) से बचाव के लिए टीकाकरण (Vaccination) को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ असामाजिक व्यक्ति व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर इससे जुड़े तमाम अफवाहों को हवा दे रहे हैं. ताजा मामला डुमरियागंज के यूसुफपुर गांव का है. यहां तीन व्यक्ति कोरोना से बचाव के टीकाकरण को लेकर तरह-तरह की अफवाह फैला रहे थे. फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए अफवाह फैलाने की सूचना जब एसडीएम एवं पुलिस को मिली तो तीनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया.

नियमानुसार तीनों व्यक्तियों को जेल भेज देना चाहिए था, लेकिन एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने एक अनोखा फैसला लिया. उन्होंने तीनों व्यक्तियों को बुलाया और उनकी काउंसलिंग की. उन्हें समझाया कि कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र रास्ता है, और इस तरह की अफवाह फैलाना कानूनन जुर्म है. उन्होंने तीनों व्यक्तियों से कहा कि आपको 100-100 व्यक्तियों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना होगा और उन्हें जाकर लगवाना भी होगा. इसके साथ लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक भी करना होगा इसके फायदे के बारे में लोगों को समझाना होगा.

एसडीएम के सामने तीनों लोगों ने स्वीकार किया कि वे बहकावे में आकर व्हाट्सएप या फेसबुक पर भ्रामक सूचना फैला रहे थे. तीनों व्यक्तियों ने एसडीएम को भरोसा दिलाया कि वे कम से कम 100 लोगों का टीकाकरण  करवाएंगे और अन्य लोगों को भी जागरूक करेगे.



थानाध्यक्ष डुमरियागंज सहित समस्त थानाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि गांव में चौकीदार अपना स्वयं टीकाकरण करा ले तथा ग्राम वासियों को जो 45 वर्ष से ऊपर है. कम से कम 100 टीकाकरण प्रत्येक गांव में कराने का लक्ष्य दिया जाए. प्रत्येक थाना इसी बिंदु पर समीक्षा चौकीदारों की सुनिश्चित करें, परंतु पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि सभी चौकीदारों ने टीकाकरण करवा लिया है अथवा नहीं क्योंकि टीकाकरण ही कोरोना से बचने का एकमात्र उपाय है

सिद्धार्थनगर: ग्राम प्रधानी जीते पर जिंदगी से हारे जंग, अब दुबारा होगा चुनाव  

ग्राम प्रधानी का चुनाव जीतने वाले राजेश की मौत

Siddharthnagar Panchayat Chunav Results 2021: मृतक राजेश चौधरी 224 मतों से चुनाव जीते. उन्हें कुल 308 मत मिले और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी को कुल 184 मत प्राप्त हुए.

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सिद्धार्थनगर. मिठवल विकासखंड के ग्राम पंचायत बरगदवा से चुनाव लड़े राजेश चौधरी उर्फ गुड्डू चौधरी एक तरफ चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) जीते तो दूसरी तरफ जिंदगी से जंग हार गए. उनके परिवारजनों पर भी ग्राम प्रधानी जीतने की कोई खुशी नहीं दिखाई थी. वहीं गांव वाले भी गमगीन दिखाई दिए. इस गमगीन गांव में भी जीत की कोई खुशी दिखाई नहीं थी. नियम के मुताबिक यहां पर दोबारा चुनाव होगा और इस बार मृतक की पत्नी उमा चौधरी चुनाव लड़ सकती हैं.

मृतक राजेश चौधरी 224 मतों से चुनाव जीते. उन्हें कुल 308 मत मिले और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी को कुल 184 मत प्राप्त हुए.

कोरोना के थे लक्षण
परिवार जनों के मुताबिक 28 अप्रैल को हुए मतदान के बाद से ही राजेश चौधरी की तबीयत खराब होने लगी. हल्का बुखार, गले में खरास एवं सांस फूलने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसके बाद तबीयत अधिक खराब हुई तो परिजन इलाज के लिए लखनऊ ले जाने लगे. रास्ते में फैजाबाद में हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल भर्ती कराने पहुंचे और वहीं पर उनकी मृत्यु हो गई. परिजन के अनुसार मौत के बाद उन्हें घर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया. रविवार को मतगणना में जब उनकी जीत की खबर उनके समर्थकों को मिली तो पूरा गांव शोक में डूब गया.

दुबारा होगा चुनाव
परिवारजनों के मुताबिक उन्होंने अपनी तबीयत पर खासा ध्यान नहीं दिया नहीं तो यह नौबत नहीं आती और समय रहते ही उन्हें किसी हॉस्पिटल में एडमिट करा सकते थे. गांव वालों का कहना है कि  कोरोना वायरस के लक्षण थे जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई. नियम के अनुसार चुनाव तो दोबारा होगा लेकिन पूरा गांव अभी भी शोक में डूबा हुआ है.
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