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सिद्धार्थनगर: पंचायत चुनाव लड़ने के लिए बनवाया था OBC का प्रमाण पत्र, अब प्रधानी पर लटकी तलवार

टीम ने लगभग 5 महीने तक जांच की जांच में पाया कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए यह कृत्य किया गया है.

टीम ने लगभग 5 महीने तक जांच की जांच में पाया कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए यह कृत्य किया गया है.

उनके तीन बेटे शहाबुद्दीन, गरीबुल्लाह और नजरूल्लाह है. उपाध्याय परिवार के नाम से जो भूमि थी वह मुस्लिम बेटों के नाम रजिस्ट्री हो गई है. लेकिन शाहबुद्दीन के प्रमाण पत्र बनवाने में धर्म परिवर्तन का कोई साक्ष्य नहीं है. पिता के ब्राह्मण जाति में जन्म लेने के कारण को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा सकता. पिता से मुस्लिम युवती से शादी करने के आधार पर पिछड़ी जाति के आरक्षण का लाभ लेकर ग्राम प्रधान बने शहाबुद्दीन की प्रधानी खत्म होने वाली है.

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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शहाबुद्दीन ने पिछड़ी जाति (OBC) के मुस्लिम युवती से पिता की शादी करने के आधार पर प्रमाण पत्र जारी कर लिया था. मामला डुमरियागंज क्षेत्र के ग्राम पंचायत चकमझारी का है. जहां उनके प्रमाण पत्र को लेकर गांव के निवासी ने चुनाव के बाद शासन में शिकायत की थी. शासन ने प्रकरण की जांच के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित करने का निर्देश दिया. टीम ने लगभग 5 महीने तक जांच की जांच में पाया कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए यह कृत्य किया गया है. शहाबुद्दीन के पिता दीन मोहम्मद पहले हिंदू धर्म के ब्राह्मण जाति में थे. उन्होंने मुस्लिम धर्म की जोगी जाति की युवती से शादी की थी और अपना नाम बदल लिया था.

उनके तीन बेटे शहाबुद्दीन, गरीबुल्लाह और नजरूल्लाह है. उपाध्याय परिवार के नाम से जो भूमि थी वह मुस्लिम बेटों के नाम रजिस्ट्री हो गई है. लेकिन शाहबुद्दीन के प्रमाण पत्र बनवाने में धर्म परिवर्तन का कोई साक्ष्य नहीं है. पिता के ब्राह्मण जाति में जन्म लेने के कारण को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा सकता. पिता से मुस्लिम युवती से शादी करने के आधार पर पिछड़ी जाति के आरक्षण का लाभ लेकर ग्राम प्रधान बने शहाबुद्दीन की प्रधानी खत्म होने वाली है.

पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निरस्त
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीम ने जांच के बाद उनका पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है. जोगी जाति की मुस्लिम युवती से 25 वर्ष पहले शादी करके रामदत्त उपाध्याय से दीन मोहम्मद बने, राम दत्त उपाध्याय के बेटे शहाबुद्दीन पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी करवा लिया था. जांच टीम ने पाया कि राम दत्त उपाध्याय पिछड़ी जाति मुस्लिम युवती से शादी करके दीन मोहम्मद तो बन गए, लेकिन मतांतरण का उनके पास कोई साक्ष्य नहीं है. इसलिए बेटे को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
जांच टीम ने सुप्रीम कोर्ट के नीता सिंह बनाम सुनीता सिंह और मोहम्मद सिद्दीकी बनाम दरबार सिंह के मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मात्र मतांतरण के आधार पर जाति परिवर्तन नहीं हो सकता. जिलाधिकारी संजीव रंजन ने कहा कि ग्राम प्रधान ने गलत ढंग से पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करा लिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले और जिला शासकीय अधिवक्ता के अभिमत के अनुसार प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है.

Tags: Election commission, Gram Panchayat, Gram Panchayat Elections, Siddharthnagar News, UP news, UP Police उत्तर प्रदेश, Yogi government

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