India-Nepal Border: सिद्धार्थनगर में 1 साल में मानव तस्करी के 43 केस, SSB की सख्ती बेअसर

सिद्धार्थनगर स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर (File Photo)
सिद्धार्थनगर स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर (File Photo)

सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 43 बटालियन ने वर्ष 2019 से अभी तक मानव तस्करी (Human Trafficking) के कुल 39 मामले पकड़े हैं. इनमें से 21 महिलाएं और 18 बच्चे शामिल हैं. अभी तक कुल 32 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है. लेकिन अवैध तस्करी का सिलसिला लगातार जारी है.

  • Share this:
सिद्धार्थ नगर. उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर स्थित भारत-नेपाल बॉर्डर (Indo Nepal Border) पर सशस्र्त्र सीमा बल (SSB) की लगातार कार्रवाई के बावजूद मानव तस्करी (Human Trafficking) के मामले कम नहीं हो रहे हैं. स्थिति ये है कि एसएसबी 43 बटालियन ने वर्ष 2019 से अभी तक मानव तस्करी के कुल 39 मामले पकड़े हैं. इनमें से 21 महिलाएं और 18 बच्चे शामिल हैं. अभी तक कुल 32 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है. लेकिन अवैध तस्करी का सिलसिला लगातार जारी है.

बता दें कि नेपाल से भारत के रास्ते तस्करी कर युवतियों को दूसरे देश भेजने का का मानव तस्करी रूट (Human Trafficking Root) काफी पुराना है. भारत-नेपाल की खुली सीमा इसके लिए सबसे मुफीद साबित होती रही है. सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल के बीच 68 किलोमीटर की खुली सीमा होने के कारण मानव तस्करों (Human Traffickers) का काम काफी आसान हो जाता है. हालांकि एसएसबी (SSB) इन आने जाने वाले रास्तों पर नजर रखे रहती है और हमेशा अलर्ट मोड में रहती है.

नौकरी, प्यार और शादी का झांसा देकर फंसाई जाती हैं लड़कियां
नेपाल के पहाड़ियों से युवतियों को काम दिलाने का झांसा, प्यार में फंसाने का झांसा और शादी करने का झांसा देकर बहला-फुसलाकर भारत के रास्ते खाड़ी देशों में पहुंचाया जाता है. पिछले कुछ दिनों में एसएसबी ने भारतीय सीमा से नेपाली युवतियों को पकड़ा और उन्हें उन्हें नेपाल पुलिस को सौंप दिया. बता दें पहले भी कई नेपाली युवतियां अवैध तरीके से सीमा पार करते हुए पकड़ी गई हैं.
ये है तस्करी का रूट


नेपाल के सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव तस्करों ने अपना नेटवर्क तैयार कर रखा है. यहां की जीवन शैली दुरुह है. आर्थिक तंगी से लोग जूझते रहते हैं. ऐसे में मानव तस्कर गिरोह के सदस्य नेपाली किशोरियों को नौकरी बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी का झांसा देकर उन्हें देश के विभिन्न कोनों में पहुंचा देते हैं. जांच में पता चला है कि मानव तस्कर इन्हें ज्यादातर दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ पहुंचाते हैं.



खुनवां बॉर्डर पर सबसे ज्यादा केस
सबसे ज्यादा मामले शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा के खुनवां बॉर्डर पर पकड़े गए हैं. सबसे अधिक खुली सीमा होने की वजह से ये लड़कियां खेतों के बीच व पगडंडियों के सहारे भारतीय सीमा में अवैध तरीके से प्रवेश कराई जाती हैं. यहां भारतीय एजेंट उनका इंतजार करते हैं और उन्हें देश के मेट्रो सिटीज में विभिन्न रास्तों से पहुंचा देते हैं. आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर युवतियों को मुक्त कराया जाता है. महिलाएं एवं नाबालिग बच्चों को एनजीओ के माध्यम से नेपाल पुलिस को सौंप दिया जाता है.

एसएसबी लगातार कर रही है कार्रवाई: कमांडेंट अमित कुमार सिंह
एसएसबी कमांडेंट अमित कुमार सिंह ने बताया कि एसएसबी सीमा पर पूरी तरह से मुस्तैद है. मानव तस्करी के मामलों को गंभीरता से ले रही है. सभी संदिग्धों पर नजर रखी जाती है. कई मामले पकड़े गए हैं. ऐसे में पीड़िता से प्राथमिक स्तर पर पूछताछ की जाती है. उसके बाद परिजनों को सूचित कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से उन्हें घर भेजा जाता है. मानव तस्करों को रोकने का कार्य सिर्फ एसएसबी का ही नहीं बल्कि उन तमाम एनजीओ का है, जो यह वादा करते हैं कि हम मानव तस्करी को रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज