मासूम बेटी को खोने का गम भूला नहीं पा रहीं सीमा, रो-रोकर पथरा सी गईं हैं आंखें
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मासूम बेटी को खोने का गम भूला नहीं पा रहीं सीमा, रो-रोकर पथरा सी गईं हैं आंखें
मासूम बेटी प्रियंका की मौत के बाद उसकी मां सीमा की आंखें पथरा सी गई हैं. (फाइल फोटो)

सीतापुर (Sitapur) की रहने वाली सीमा की आंखें पथरा सी गई हैं. मासूम बेटी प्रियंका की मौत के बाद वह उसके गम को सीने में दफन किए हुए बेसुध नजर आ रही हैं, उनका रो-रोकर बुरा हाल है.

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सीतापुर. सीतापुर (Sitapur) जिले के रामकोट कस्बा के बबुरी गांव की गलियों में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. मासूम बेटी प्रियंका की मौत के बाद उसकी मां सीमा की आंखें पथरा सी गई हैं. वह उसके गम को सीने में दफन किए हुए बेसुध नजर आ रही हैं, उनका रो-रोकर बुरा हाल है. लॉकडाउन (Lockdown) के चलते गुड़गांव से अपने गांव वापस आते समय मार्ग दुर्घटना में अपनी मासूम बेटी प्रियंका को खो देने के बाद पिता शिव कुमार बेसुध सा नजर आ रहा है. इस दर्दनाक घटना को शिवकुमार और उसकी पत्नी सीमा ने NEWS 18 से साझा किया. इस दौरान गांव की प्रत्येक महिलाओं की आंखें नम हो गईं.

बेटी की यादों को लेकर रो पड़ती हैं सीमा
बेटी की यादों को आंखों में संजोए मां सीमा सिसकियां लेती हुई बताती हैं कि वह और उनका पति शिवकुमार होली के बाद गुरुग्राम गए थे, जहां पर शिवकुमार एक सेनेटरी की दुकान पर काम करता था, जिसके बदले दुकानदार उसे ₹ 350 पगार देता था. वह उसके घर में झाड़ू पोछा का काम करती थी. लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया. जो पैसा था, वह खत्म हो गया. मजबूरी में सभी लोग घर के लिए पैदल ही चल दिए. सीमा का कहना है रास्ते में परिवार के अन्य सदस्यों के द्वारा एक ट्रैक्टर ट्राली वाले के हाथ पैर जोड़कर किसी तरह से उसमें सवार हो लिए और सभी लोग मैनपुरी आ गए.

इतना कहते ही सीमा की आंखें भर आई और गला भारी हो गया वह आगे कुछ कह पाती, इससे पहले फूट-फूटकर रोने लगी. भरे गले से सीमा ने बताया जब बॉर्डर पर पुलिस वालों ने उसे रोका और डॉक्टरी परीक्षण कराने को कहा तभी वह सभी लोग नीचे उतर आए. सिसकियां लेते हुए सीमा ने बताया कि इसी दौरान पीछे से आ रही एक डीसीएम ने उसकी मासूम बेटी प्रियंका को रौंद दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना को सुनकर आसपास मौजूद महिलाओं के आंख से आंसू छलक आए.
मासूम बच्ची को भी है बहन के जाने गम


सीमा के पास खड़ी उसकी बड़ी बेटी कविता (7) को भी अपनी बहन के जाने का गम है. मासूम कविता से जब बहन से बिछड़ने को लेकर बात की गई तो उसके मुंह से एक शब्द भी न निकल सका, अगर कुछ निकले तो आंख से आंसू और रोने की आवाज. जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि जनपद मैनपुरी में हुए हादसे में हुई मासूम प्रियंका की मौत का मंजर कितना भयावह था. प्रियंका की बड़ी बहन कविता उसे याद कर बस रोए ही जा रही थी.

अब कभी काम पर नहीं जाएंगे वापस: शिव कुमार
सड़क हादसे में प्रियंका की दर्दनाक मौत के बाद टूट चुके पिता शिवकुमार ने कहा कि वह अब कभी वापस काम पर नहीं जाएगा घटनाक्रम को बताते हुए शिवकुमार चुप हो जाता है लाख प्रयास करने पर भी उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी गले में पड़े गमछे से आंखों से निकल रहे आंसुओं को पूछते हुए अपने चेहरे को कैमरे से हटा लेता है कुछ देर तक चुप रहने के बाद शिवकुमार भरे हुए गले से बताता है कि पुत्री के शव का पोस्ट मार्टम होने के बाद गांव लाकर यही पर दफन कर दिया.

गांव की गलिया पड़ी हैं सुनी
बबुरी गांव की जिन गलियों में कुछ माह पहले प्रियंका की आवाज गूंजा करती थी. आज उन गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है. जिस घर में वह अपनी मां की अंगुलियां पकड़कर चलती थी उस घर में मातमी सन्नाटा है. हर कोई प्रियंका की ही बात कर रहा है.

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