सीतापुर: 84 लाख योनियों से मुक्ति के लिए नैमिषारण्य में शुरू हुई परिक्रमा
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सीतापुर: 84 लाख योनियों से मुक्ति के लिए नैमिषारण्य में शुरू हुई परिक्रमा
सीतापुर में शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा

नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा अपने आप में अत्यंत अद्भुत एवं दिव्य है. मान्यता है कि इस परिक्रमा की कथा महर्षि दधिची के देहदान से जुड़ी है.

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सीतापुर. फाल्गुन मास की प्रतिपदा से नैमिषारण्य (Naimisharnya) में होने वाली 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ सोमवार को हो गया. पहला आश्रम के महंत भरत दास ने डंका बजाकर 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ किया. डंका बजते ही लाखों की संख्या में साधु संतों ने पहले पड़ाव कोरौना के लिए कूच किया. इससे पहले एसडीएम मिश्रिख राजीव पांडे सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने साधु-संतों को माला पहनाकर व फूलों की वर्षा कर स्वागत किया.

आस्था की डुबकी लगाने कई प्रान्तों से आते हैं लोग

आस्था के महापर्व में डुबकी लगाने के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश सहित पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु परिक्रमा करने आते हैं. परिक्रमा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस के द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसे लेकर परिक्रमा करने वाले साधु-संतों के पग-पग पर सुरक्षा का साया रहेगा.



सबसे पहले महर्षि दधिची ने की थी परिक्रमा
नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा अपने आप में अत्यंत अद्भुत एवं दिव्य है. मान्यता है कि इस परिक्रमा की कथा महर्षि दधिची के देहदान से जुड़ी है. श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार एक बार इन्द्रलोक पर 'वृत्रासुर' नामक राक्षस ने अधिकार कर लिया और इन्द्र सहित देवताओं को देवलोक से निकाल दिया. दैत्य का वध केवल वज्र शक्ति से ही हो सकता था. इस पर इंद्र ने दधिची ऋषि के अस्थियों से वज्र का निर्माण हुआ. उसी वज्र से वृत्रासुर मारा जा सका.तभी दधिची ऋषि ने तीनों ऋणों से मुक्त होने के लिए सभी तीर्थों और देवों के दर्शन की इच्छा की और सभी तीर्थ और देव इस चौरासी कोसीय परिक्रमा में स्थान ले लिया. इस प्रकार दधिची ऋषि ने सबसे पहले यह परिक्रमा शुरू की ।

क्यों कहते हैं परिक्रमा को रामा दल?

बाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण का वध करने के उपरांत भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा था जिससे उनकी हथेली में बाल जम आए थे. तब कुल गुरु वशिष्ठ ने राम से कहा कि नैमिषारण्य जाकर चौरासी कोसी परिक्रमा करो. परिक्रमा भ्रमण के दौरान हत्या हरण तीर्थ में स्नान करने से ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी. तब भगवान राम ने नैमिषारण्य आकर यह परिक्रमा की. उनके साथ समस्त ऋषि मुनि देवताओं ने भी परिक्रमा की थी. भगवान राम के साथ इतने बड़े दल ने परिक्रमा की जिससे उसे रामा दल कहा गया. तब से यह परिक्रमा रामा दल के नाम से विख्यात हुई.

चौरासी लाख योनियों से मिलती है मुक्ति

हिंदू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य चौरासी लाख योनियों में भटकता रहता है और यह अद्भुत परिक्रमा भी चौरासी कोसी होती है. जो मनुष्य चौरासी कोसीय परिक्रमा कर लेता है व चौरासी लाख योनियों से मुक्त हो जाता है.

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