Covid-19: गांवों में ऐसे रह रहे हैं दिल्ली-एनसीआर और मुंबई से गए श्रमिक

गोरखपुर के कूरी ग्रामसभा में दिल्ली से गए लोगों को स्कूल में ठहराया गया है
गोरखपुर के कूरी ग्रामसभा में दिल्ली से गए लोगों को स्कूल में ठहराया गया है

ग्राम प्रधानों ने उन्हें समझा बुझाकर कहीं स्कूलों तो कहीं बारातघरों में रखा हुआ है, खाना देने के बाद जलाए जा रहे हैं पत्तल और गिलास

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Covid 19-Coronavirus)  लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से प्रवासियों की जो भीड़ दिल्ली, महाराष्ट्र हरियाणा और पंजाब जैसे प्रदेशों से वापस पूर्वांचल के गांवों में गई है आखिर वो कैसे मैनेज हो रही है. क्या यहां से गए लोग अपने गांवों में घुल मिलकर इस संक्रमण को तीसरे स्टेज में पहुंचाने का काम कर रहे हैं या फिर अच्छे नागरिक की भूमिका निभाते हुए वो 14 दिन के लिए क्‍वारंटाइन में हैं.

हमने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (yogi adityanath) के जिले गोरखपुर के कुछ गांवों के हालात जानने की कोशिश की. मुख्यमंत्री का जिला होने की वजह से थोड़ी सख्ती है, लेकिन कुछ ग्राम प्रधान अपनी ओर से भी अच्छी भूमिका निभा रहे हैं ताकि संक्रमण के गांव में फैलने की आशंका न रह जाए. क्योंकि ये लोग काफी भीड़भाड़ में गए हैं. सरकार ने निर्देश दिया हुआ है कि बाहर से आने वाले व्यक्तियों को 14 दिन से पहले कैंप से बाहर न जाने दिया जाए. यही नहीं उनका निरंतर मेडिकल परीक्षण करवाया जाए.

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चौरीचौरा के एक गांव में शहर से गए लोग ऐसे रह रहे हैं.




योगी के जिले में कैसी है व्यवस्था
गोरखपुर (Gorakhpur) के दक्षिणांचल में स्थित कूरी बाजार ग्रामसभा में प्रधान अर्जुन मौर्य ने न सिर्फ गांव में फॉगिंग करवाई है बल्कि बाहर से आने वालों को स्कूल में ठहराया हुआ है. 14 दिन के लिए ग्रामीणों से अलग रखे गए लोगों को रोजाना खाना दिया जा रहा है. यहां आठ लोग दिल्ली से आए हैं.

यहीं का एक गांव नरायनपुर है. जिसमें लोगों को पंचायत भवन में ठहराया गया है. हालांकि गांवों में क्‍वारंटाइन में रह रहे लोगों का मेडिकल चेकअप नहीं हो पा रहा है, क्योंकि पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है.

चौरीचौरा क्षेत्र के एक गांव रामपुर रकबा के स्कूल में चार लोगों को ठहराया गया है. इन लोगों को पत्तल में खाना खिलाया जा रहा है. डिस्पोजल गिलास में पानी दिया जा रहा है. प्रधान श्रवण कुमार के मुताबिक भोजन के बाद जूठे पत्तलों को जलाया जा रहा है. जो लोग बाहर से आए हैं उनके घरों की महिलाएं दूर से ही उन्हें देखकर चली जा रही हैं. बाहरी लोगों के आने पर प्रतिबंध है. हालांकि इन सभी गांवों में अब तक बाहर से गए सभी लोग पूरी तरह से ठीक हैं.

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गोरखपुर: नरायनपुर गांव के पंचायत भवन में ठहरे हुए हैं लोग.


ग्राम प्रधानों के सामने बड़ी चुनौती

यूपी में इसी साल ग्राम प्रधानों का चुनाव होना है. इसलिए वे बाहर से आने वालों पर सख्ती न करके उन्हें प्यार से डील कर रहे हैं. यदि बाहर से जाने वाला कोई व्यक्ति अपने घर जाने के लिए अड़ जा रहा है तो प्रधानों के लिए मुसीबत खड़ी हो रही है. एक तरफ उन्हें प्रशासन का आदेश मनवाना है तो दूसरी तरफ ये भी ध्यान रखना है कि वोटर नाराज न हो जाए.

 

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