सोनभद्र: अपना दल के जिलाध्यक्ष, उसके बेटे सहित 2 अन्य के खिलाफ हत्या की FIR के आदेश

(सांकेतिक फोटो)
(सांकेतिक फोटो)

सोनभद्र (Sonbhadra) में 5 महीने तक एक परिवार अपने बेटे की हत्या की एफआईआर दर्ज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खाता रहा. न पुलिस ने, न डीएम ने और न ही मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल ने उसकी पीड़ा सुनी. आखिर अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.

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रंगेश कुमार सिंह

सोनभद्र. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र (Sonbhadra) में अपना दल (Apna Dal) के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण पटेल, उनके बेटे मनीष पटेल और 2 अन्य के खिलाफ कोर्ट ने हत्या (Murder) के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश जारी किया है. लगभग 5 महीने पहले राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के एक पोल्ट्री फार्म पर काम करने वाले युवक की संदिग्ध मौत हो गई थी. पोल्ट्री फार्म के मालिक अपना दल के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण पटेल के पुत्र मनीष पटेल व उनके दो साथियों द्वारा सतेंद्र कुमार को जिला अस्पताल लोढ़ी ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने सतेंद्र को मृत घोषित कर दिया.

जिलाध्यक्ष के पुत्र मनीष पटेल द्वारा सतेंद्र की पत्नी को फोन कर जिला अस्पताल बुलवाया गया. वही सूचना के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों को देखकर जिलाध्यक्ष के बेटे और उसके साथी शव को स्कार्पियो से नीचे फेंककर भाग निकले थे. इसके बाद मृतक के परिजन लगातार राबर्ट्सगंज कोतवाली के चक्कर लगाते रहे पर कोई सुनवाई नही हुई. आखिरकार परेशान परिजनों ने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट की तरफ से 156(3) में मुकदमा दर्ज करवाने का आदेश हुआ है. अब देखना ये होगा कि पहले ही आरोपों में घिरी पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है?



ये है पूरा मामला
पीड़िता के वकील ने बताया कि गीता देवी के कथनानुसार 21 मई 2020 को उसका पुत्र सत्येंद्र कुमार, मनीष पटेल के पोल्ट्री फार्म पर काम करने गया था. दोपहर करीब 2:30 बजे पीड़िता का लड़का अपनी पत्नी से डरते हुए मोबाइल पर बताया कि मनीष पटेल से मजदूरी के संबंध में विवाद हो गया, जल्दी घर वापस आएगा. शाम 4:15 बजे अभियुक्त संदीप ने अपने मोबाइल से उसके छोटे पुत्र पंकज के मोबाइल पर फोन कर कहा कि सतेंद्र को लोढ़ी हॉस्पिटल लेकर आए हैं आइए. पीड़िता के पति व अन्य लोग अस्पताल गए तो वहां मनीष पटेल सत्यनारायण पटेल, जो अपना दल के जिला अध्यक्ष हैं, राजू पटेल व संदीप मौजूद थे.

सतेंद्र को गाड़ी से फेंका और हुए फरार

उसके पति डॉक्टर को अंदर बुलाने के लिए गए तब तक सभी लोग सतेंद्र को गाड़ी से नीचे फेंक कर फरार हो गए. सतेंद्र के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मौजूद थे. आंखों में खून भरा हुआ था. वह अचेत अवस्था में था. पीड़िता को विश्वास है कि इन सभी लोगों ने पीड़िता के लड़के की हत्या की है और हत्या को छुपाने के लिए मनगढ़ंत कहानी बनाकर लोढ़ी अस्पताल ले गए थे. सभी लोग काफी दबंग व राजनीतिक पहुंच वाले रसूखदार व्यक्ति हैं.

पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल तक कहीं सुनवाई नहीं हुई

सतेद्र की मां के अनुसार घटना की सूचना हत्या के दूसरे दिन ही थाना कोतवाली में दी गई थी. लेकिन कोतवाली में प्रार्थी के पति को बैठा लिया गया और उनसे डरा-धमकाकर दूसरे सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया गया और रिपोर्ट भी नहीं लिखा गया. जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कई जगह चोट के निशान हैं. नामजद तहरीर देने के बावजूद भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई. इसके बाद उन्होंने ई-मेल के माध्यम से जिलाधिकारी महोदय, पुलिस अधीक्षक महोदय, मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर 22 मई 2020 को शिकायत की. लेकिन वहां से भी कोई कार्यवाही नहीं की गई.

सीजेएम कोर्ट ने दिया आदेश

आखिरकार प्रार्थिनी ने अपने अधिवक्ता अनिल कुमार मौर्य के माध्यम से सीजेएम न्यायालय के समक्ष दिनांक 4 अगस्त 2020 को अंतर्गत धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत की थी. जिस पर न्यायालय द्वारा थाने से आख्या तलब करते हुए 11 नवंबर 2020 को थाना कोतवाली राबर्ट्सगंज को आदेश दिया गया कि उचित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कर विवेचना करें.
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