Ananlysis: आखिर कहां हैं विपक्ष के दूसरे नेता, सोनभद्र जाने की पहल कर प्रियंका गांधी ने आईना दिखाया

सोनभद्र हत्याकांड के बाद विपक्ष के नेताओं ने भी घटना-स्थाल या वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर जाने की जहमत नहीं उठाई, कुछ साल पहले तक इस तरह की घटना होने पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा हो जाता था

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: July 19, 2019, 2:39 PM IST
Ananlysis: आखिर कहां हैं विपक्ष के दूसरे नेता, सोनभद्र जाने की पहल कर प्रियंका गांधी ने आईना दिखाया
सोनभद्र हत्याकांड के बाद विपक्ष के नेताओं ने भी घटना-स्थाल या वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर जाने की जहमत नहीं उठाई, कुछ साल पहले तक इस तरह की घटना होने पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा हो जाता था
RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: July 19, 2019, 2:39 PM IST
उत्तर प्रदेश में विपक्ष है, ये तभी दीखा जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी चुनार में सड़क पर धरने पर बैठ गईं. ये जरूर हुआ कि उसके बाद विधान सभा में विपक्षी दलों ने हंगामा किया. लेकिन अहम सवाल ये है कि क्या राजनीति में सब कुछ बदल गया है. पहले सोनभद्र हत्याकांड जैसी कोई बड़ी घटना होने पर विपक्षी नेता आसमान सर पर उठा लेते थे. हर ओर विरोध प्रदर्शन और भाषणबाजी होना शुरू हो जाती थी. लेकिन सोनभद्र की घटना के बाद कांग्रेस की प्रियंका गांधी के पहले किसी और पार्टी के किसी नेता ने आखिर क्यों नहीं सोनभद्र जाने की जहमत उठाई.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) की बात की जाय तो उसका बड़ा आधार है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के कार्यकर्ता निश्चित तौर पर सोनभद्र के पिछड़े इलाके में कांग्रेस की तुलना में बहुत अधिक हैं. दोनो पार्टियों के नेता लखनऊ में हैं. वहां से सोनभद्र की दूरी इतनी भी नहीं है कि हत्याकांड के दो दिन बाद भी वहां न पहुंचा जा सके. आखिर इस नरंसहार में 10 लोगों की हत्या हुई है.

कमजोर हुआ है विपक्ष?

इन्हीं प्रियंका गांधी की दादी इंदिरा गांधी या पिता राजीव गांधी की सरकार के दौर में विपक्ष इस कदर ताकतवर और सक्रिय होता था कि कहीं सुदूर इलाके में भी कोई घटना हो तो विपक्षी नेता सरकार से पहले घटनास्थल पर पहुंच जाते थे. एसपी के संरक्षक मुलायम सिंह नेता विरोधी-दल के तौर पर हर घटना के बाद वहां पहुंचने वाले नेताओं में सबसे पहले होते रहे. दिल्ली की बात की जाए तो चौधरी चरण सिंह और राजनारायण हर घटना के बाद पहुंचने वालों में पहले होते थे. अब की बात करें तो मुलायम सिंह की विरासत संभाल रहे अखिलेश यादव ने घटनास्थल पर जाने की जरूरत क्यों नहीं समझी.

ट्रॉमा सेंटर तक नहीं गए विपक्षी नेता
कम से कम नेता वाराणसी तो जा ही सकते थे. प्रदेश कांग्रेस के भी किसी नेता को इसकी जरूरत नहीं नजर आई. ऐसा नहीं कि प्रियंका गांधी ने सोनभद्र जाने की कोशिश कर के कोई क्रांतिकारी पहल की है. न ही प्रियंका गांधी के जाने से वहां के हालत में कोई तब्दीली आ जाती. लेकिन उन्होंने विपक्षी नेताओं को आईना जरूर दिखाया है. लोगों के बीच ये सवाल जरूर खड़ा कर दिया है आखिर दूसरे विपक्षी नेता क्या कर रहे थे.

विपक्ष की भी जिम्मेदारियां होती है
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विपक्ष या सत्ता पक्ष के दूसरे नेताओं के जाने न जाने से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता. हां, ये जरूर होता है कि परेशान और पीड़ित लोगों को एक आश्वासन मिल जाता है कि बहुत से दूसरे लोग भी उनकी फिक्र कर रहे हैं. उनके साथ और भी लोग हैं. उनके साथ अब आगे कोई अत्याचर करेगा तो सभी एक साथ उसकी मदद में आएंगे. ये उम्मीद लोगों में बंध जाती है. लेकिन जिस तरह से विपक्षी दलों के नेता सोनभद्र नहीं गए उससे जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठता है.

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First published: July 19, 2019, 2:39 PM IST
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