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​Electricity Amendment Bill: कृषि कानूनों की वापसी से अब बिजली कर्मियों में भी दौड़ा करंट- जानें मामला

​Electricity Amendment Bill: कृषि कानूनों की वापसी से अब बिजली कर्मियों में भी दौड़ा करंट- जानें मामला

बिजली संशोधन बिल का विरोध.

बिजली संशोधन बिल का विरोध.

Protest Of ​Electricity Amendment Bill: बिजली संशोधन बिल (Electricity Amendment Bill) को लेकर बिजली विभाग (Electricity Department) और कृषकों (Farmers) ने हाथ मिला लिया है. वे मिलकर इस बिल का विरोध (Protest) कर रहे हैं और इसे लेकर होने वाले आंदोलन को तेज करने की कोशिशों में जुटे हैं। उनके अनुसार ​इस बिल के आने से किसानों पर अतिरिक्त बिजली (Electricity) बिल का भार रहेगा. साथ ही यह बिल राज्यों के हितों के भी विपरीत है.

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    रंगेश सिंह

    सोनभद्र. तीन कृषि कानून की वापसी की घोषणा के बाद अब बिजली विभाग आंदोलन तेज करने के मूड में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद अब बिजली संशोधन बिल को लेकर आंदोलन तेज होने वाला है. इस बिल के संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की आशंका के खिलाफ आंदोलन तेजी की रूपरेखा बन रही है. अब बिजली कर्मियों के साथ ही किसानों ने भी बिजली संशोधन बिल वापस लेने की मांग की है. शीतकालीन सत्र के पहले दिन 29 नवंबर को होने वाले बिजली कर्मियों के देशव्यापी आंदोलन के साथ ही किसानों का भी आंदोलन है.

    बिजली के निजीकरण को लेकर चिंता

    विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बताया कि नया बिल पूरी तरह किसान विरोधी है. संघर्ष समिति के स्थानीय संयोजक इ. अदालत वर्मा ने कहा कि नए बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली टैरिफ में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए. साथ ही बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए. इस बिल के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है. सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों को 8 से 10 हजार रुपये प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा. इतनी महंगी दरों पर किसान बिजली नहीं खरीद पाएगा, जिसका दुष्परिणाम खाद्यान्न के उत्पादन पर पड़ेगा. नई नीति के तहत सब्सिडी व क्रास सब्सिडी 3 साल में धीरे-धीरे समाप्त कर दी जाएगी. इसीलिए किसान संगठन भी नए बिल का विरोध कर रहे हैं.

    नेशनल टैरिफ पालिसी पर उठ रहे सवाल

    ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली संविधान में समवर्ती सूची में है और राज्य का विषय है. नये संशोधन के बाद बिजली आपूर्ति में केंद्र की सीधी दखलंदाजी होगी जो राज्यों के अधिकार क्षेत्र का हनन है. नया संशोधन राज्यों के हितों के विपरीत है. वर्तमान नीति के अनुसार इलेक्ट्रिीसिटी एक्ट 2003 में लिखा है कि टैरिफ तय करने में केंद्र व राज्य के विद्युत नियामक आयोग राष्ट्रीय विद्युत नीति व टैरिफ नीति से मार्गदर्शन लेते हुए बिजली की दरें निर्धारित करेंगे. नये संशोधन के अनुसार केंद्र व राज्य के नियामक आयोग राष्ट्रीय टैरिफ नीति का पालन करने के बाध्य होंगे. यह एक प्रकार से नियामक आयोग की स्वयत्ता में सीधी दखलंदाजी है और उपभोक्ता विरोधी है.

    Tags: Electricity bill, Farmer, Parliament Winter Session, Sonbhadra News

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