सोनभद्र नरसंहार: IFS के 70 पन्नों की रिपोर्ट में छिपा है पूरा राज, CM योगी एक्शन की तैयारी में

रिपोर्ट में कहा गया था कि इस भूमि कि कीमत 40 हजार करोड़ से ज्यादा है. लेकिन इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. अब इस नरसंहार के पांच साल बाद सूबे की योगी सरकार ने इस रिपोर्ट की जांच शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि जांच के बाद कई अफसरों और नेताओं पर गाज गिर सकती है.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 26, 2019, 11:48 AM IST
सोनभद्र नरसंहार: IFS के 70 पन्नों की रिपोर्ट में छिपा है पूरा राज, CM योगी एक्शन की तैयारी में
तत्कालीन मुख्य वैन संरक्षक एके जैन की फाइल फोटो
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 26, 2019, 11:48 AM IST
उत्तर प्रदेश की सियासत को हिला कर रख देने वाले सोनभद्र नरसंहार ने वन भूमि कब्जा करने के दशकों पुराने खेल का राज खोल दिया है. तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने वर्ष 2014 में भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि किस तरह 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अपर अधिकारियों, नेताओं और दबंगों ने सुनियोजित ढंग से कब्जा जमा लिया है. रिपोर्ट में कहा गया था कि इस भूमि कि कीमत 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है. लेकिन इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई.

अब इस नरसंहार के बाद योगी सरकार ने इस रिपोर्ट की जांच शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि जांच के बाद कई अफसरों और नेताओं पर गाज गिर सकती है.

70 पन्नों की रिपोर्ट में भूमि कब्जाने की साजिश का जिक्र
तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने पत्रांक संख्या 401/11-बी-6 दिनांक 29 मार्च, 2014 को 70 पेज की रिपोर्ट शासन को भेजी थी. वर्ष 2014 में वह सोनभद्र में मुख्य वन संरक्षक के तौर पर तैनात थे. उन्होंने जिले में वन विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जों की रिपोर्ट तैयार की थी. जिसमें जिले की करीब 1 हजार हेक्टेयर जमीन पर भू-माफिया का कब्जा बताया था. रिपोर्ट में उन्होंने खुलासा किया था कि विभागीय अधिकारी और शासन स्तर पर बैठे नौकरशाह भी इस घोटाले में शामिल हैं. जैन ने रिपोर्ट में सीबीआई जांच की भी मांग की थी.

रिपोर्ट में जमीन आदिवासियों की होने का दावा
उन्होंने अपने रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया था कि वन भूमि को गैर वन भूमि में बदलना वन संरक्षण अधिनियम की अवहेलना है. रिपोर्ट में कहा गया था कि यह जमीन आदिवासियों की है. वो इस पर पुश्तैनी खेतीबाड़ी करते हैं. जमीन का मालिकाना हक़ सरकार के पास है. कुछ नौकरशाहों ने इन जमीनों को निजी हाथों में सौंप दिया.

केंद्र के निर्देश पर भी तत्कालीन अखिलेश सरकार ने नहीं लिया एक्शन
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एके जैन ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी थी. जिस पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी तत्कालीन मुख्य सचिव को पात्र लिखकर तत्काल कार्रवाई कर के अवगत कराने का निर्देश दिया था. लेकिन केंद्र के पत्र को अधिकारियों ने दबा दिया. अपर प्रमुख वन संरक्षक (केंद्रीय) डीपी सिन्हा ने 12 फरवरी, 2016 को मुख्य सचिव को पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने जैन की रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं के आधार पर सोनभद्र जिले के ओबरा और रेनुकूट वन प्रभाग में 1 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को गैर वन भूमि में परिवर्तित किए जाने की कार्रवाई को अनियमित माना था. उन्होंने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. लेकिन अफसरों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया.

2018 में जैन की हुई थी संदिग्ध मौत
इस रिपोर्ट के बाद जैन का डिमोशन कर उन्हें आगरा मंडल भेज दिया गया था. 11 जुलाई, 2018 को उनकी सड़क दुर्घटना में संदिग्ध मौत हो गई थी. एके जैन के भाई विवेक जैन के मुताबिक यह बहुत बड़ा घोटाला है. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सीबीआई जांच की मांग भी की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. बल्कि उनका डिमोशन कर ट्रांसफर कर दिया गया. उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं. उनकी मौत सड़क दुर्घटना में नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी.

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आईएफएस एके जैन के भाई विवेक जैन


सीएम योगी जैन रिपोर्ट की छानबीन में जुटे
सोनभद्र दौरे से वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण को गंभीर मामला माना था. जिसके बाद मुख्यमंत्री वन भूमि घोटाले से सम्बंधित जैन रिपोर्ट की छानबीन कर रहे हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में बड़े लोगों पर गाज गिर सकती है.
First published: July 26, 2019, 11:12 AM IST
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