पीड़ित महिलाओं से मिलकर भावुक हुईं प्रियंका गांधी, आंचल से पोंछे आंसू, देखें VIDEO

सोनभद्र नरसंहार मामले में पीड़ित परिवारों से मिलने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भावुक हो गई. इस मौके पर वे अपनी आंसू रोक नहीं पाई. आंचल से आंसू पोछते हुए प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिजनों को कहा कि हम आपके साथ खड़े हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 20, 2019, 3:26 PM IST
पीड़ित महिलाओं से मिलकर भावुक हुईं प्रियंका गांधी, आंचल से पोंछे आंसू, देखें VIDEO
सोनभद्र नरसंहार: पीड़िता से मिलकर भावुक हुई प्रियंका गांधी, आंचल से पोछा आंसू
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Updated: July 20, 2019, 3:26 PM IST
सोनभद्र नरसंहार में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भावुक हो गईं. इस मौके पर वो अपनी आंसू रोक नहीं पाई. प्रियंका गांधी ने आंचल से आंसू पोंछते हुए पीड़ित परिजनों को कहा कि हम आपके साथ खड़े हैं.

बता दें कि सोनभद्र में 17 जुलाई को 10 आदिवासियों को जमीन विवाद में की हत्या कर दिया गया. इस घटना के बाद पीड़ितों से मिलने प्रियंका गांधी जा रही थी. तभी रास्ते में मिर्जापुर से प्रियंका गांधी को रोक दिया गया और उन्हें हिरासत में ले लिया गया. पुलिस ने उन्हें चुनार गेस्ट हाउस ले गई. जहां प्रियंका गांधी अपने समर्थकों के साथ रात भर रुकी और इस बात पर अड़ी रही की वे पीड़ितों के परिवार से बिना मिले नहीं जाएंगी.


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इसके बाद भी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को प्रशासन ने सोनभद्र जाने की इजाजत नहीं दी, वह मिर्जापुर स्थित चुनार गेस्ट हाउस में ही रुकी हुई है, जहां पीड़ित परिवारों के परिजनों ने आकर उनसे मुलाकात की. इससे पहले प्रियंका गाधी ने साफ किया था कि जब तक वह पीड़ित परिवारों से मिल नहीं लेतीं, तब तक वापस नहीं जाएंगी.

क्या है पूरा मामला

सोनभद्र जिले के उम्भा गांव में 90 बीघा जमीन के विवाद में गुर्जर और गोंड बिरादरी के बीच हुए खूनी संघर्ष हुई. इसमें गोंड आदिवासियों (एक ही पक्ष) के 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हैं. बताया जा रहा है कि इस जमीन पर 1947 से आदिवासियों का कब्जा था. गोंड बिरादरी के लोग इस जमीन पर खेती करते थे. इसी जमीन को  खाली कराने के लिए ग्राम प्रधान जमीन ने करीब 200 हमलावरों के साथ पहुंचा. जब आदिवासियों ने इसका विरोध किया तो सैकड़ों राउंड फायरिंग कर दी.

आईएएस अधिकारी का भी सामने आया नाम

इस नरसंहार में बिहार कैडर के एक आईएएस अधिकारी का भी नाम सामने आ रहा है. कहा जा रहा है कि 2 साल पहले पूर्व आईएएस आशा मिश्रा और उनकी बेटी ने यह जमीन ग्राम प्रधान यज्ञदत्त को बेच दी थी. इसी जमीन पर कब्जे के लिए ग्राम प्रधान करीब 200 हमलावरों के साथ पहुंचा था.

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First published: July 20, 2019, 12:01 PM IST
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