सोनभद्र नरसंहार: पूर्व IAS का ये 'प्लान' हो गया था फेल, इसलिए बेची थी 90 बीघा जमीन

इस जमीन पर साल 1947 से आदिवासियों का कब्जा बरकरार है, लेकिन पटना से आईएएस का एक धीरज नाम का आदमी हर साल आकर आदिवासियों से प्रति बीघे लगान वसूलने आता था.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 19, 2019, 9:53 AM IST
सोनभद्र नरसंहार: पूर्व IAS का ये 'प्लान' हो गया था फेल, इसलिए बेची थी 90 बीघा जमीन
सोनभद्र नरसंहार: पूर्व IAS का ये 'प्लान' हो गया था फेल, इसलिए बेची थी 90 बीघा जमीन
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Updated: July 19, 2019, 9:53 AM IST
यूपी के सोनभद्र जिले के उम्भा गांव में बुधवार दोपहर 90 बीघा जमीन के विवाद में गुर्जर और गोंड विरादरी के बीच खूनी संघर्ष हुए. इसमें एक ही पक्ष के 10 लोगों की मौत हो गई. इस पूरे मामले के पीछे बिहार कैडर के पूर्व आईएएस प्रभात कुमार मिश्रा का नाम सामने आ रहा है. आईएएस प्रभात कुमार मिश्रा ने यहां आदिवासियों के कब्जे की 600 बीघा जमीन को कोऑपरेटिव सोसाइटी के नाम करा लिया था. उस वक्त तहसीलदार के पास नामांतरण का अधिकार नहीं था, लिहाजा नाम नहीं चढ़ सका.

इसके बाद सात सितंबर 1989 को आईएएस प्रभात कुमार मिश्रा ने अपनी पत्नी और बेटी के नाम जमीन करवा ली. दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार आईएएस की बेटी इस जमीन पर हर्बल खेती करवाना चाहती थी. लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिलने की वजह से उसका ये प्लान फेल हो गया. हालांकि सोसाइटी की जमीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं हो सकती.

इसके बाद आइएएस ने विवादित जमीन में से 90 बीघा जमीन मूर्तिया गांव के प्रधान यज्ञदत्त सिंह भूरिया को बेच दी. हालांकि इस जमीन पर साल 1947 से आदिवासियों का कब्जा बरकरार है, लेकिन पटना से आईएएस का एक धीरज नाम का आदमी हर साल आकर आदिवासियों  से प्रति बीघे लगान वसूलने आता था.

200 से ज्यादा थे हमलावर

बता दें कि बुधवार को प्रधान यज्ञदत्त ट्रैक्टर ट्राली में भरकर करीब 200 लोगों को लेकर घोरावल थाना इलाके के उम्भा गांव पहुंचा. उन लोगों के पास गंड़ासे और अवैध तमंचे थे. प्रधान ट्रैक्टरों से खेत की जबरन जुताई करवाने लगा. इस पर ग्रामीणों ने विरोध किया तो प्रधान के समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया.

ग्रामीणों ने मुताबिक, इस दौरान हमलावरों ने सामने आने वाले लोगों को गंड़ासे से काट डाला. फायरिंग में गोली लगने और गंड़ासे से घायल ग्रामीणों की लाशें खेत में चारों तरफ गिरती चली गईं. लोगों का कहना है कि गोंड आदिवासी बहुल इस जनपद में सदियों से आदिवासियों के जोत को तमाम नियमों के आधार पर नजरअंदाज किया जाता रहा है. इलाके में रसूखदार लोग इस तरह की काफी जमीनों पर अवैध तरीके से काबिज हैं.

अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं थे परिजन
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मृतकों के परिवार वालों ने सुबह शव लेने से इंकार कर दिया था. बाद में जिला प्रशासन ने समझा बुझाकर पीड़ित परिवार वालों को अंतिम संस्कार के लिए मनाया. मृतकों के परिवार को दस बीघा जमीन और घायलों के परिवार को पांच बीघा जमीन दी जाएगी. मुख्यमंत्री की तरफ से पांच लाख और किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रूपए मुआवजा भी दिया जाएगा.

अफसरों के काली कमाई का अड्डा

आइएएस अफसरों ने अपने रिश्तेदारों के माध्यम से अपनी काली कमाई का निवेश करने के लिए सोनांचल को हब बना लिया है. बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचारी अधिकारियों ने अपने परिवार वालों के नाम से काफी जमीन खरीदकर यहां फार्म हाउस, होटल, खनन से लेकर खेती तक के प्रोजेक्ट डाल दिए हैं. जिन जमीनों पर कभी आदिवासियों का अधिकार था, उसको राजस्व कर्मचारियों की साठगांठ से अपने नाम करवा लिया. पिछले एक दशक से जमीन पर कब्जे को लेकर जंग की कई घटनाएं सोनभद्र के साथ मिर्जापुर के पहाड़ी इलाकों में भी हो चुकी है.

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First published: July 19, 2019, 8:58 AM IST
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