सोनभद्र: PM नरेंद्र मोदी ने नव दंपति की शादी को बनाया यादगार, पत्र भेजकर दिया आशीर्वाद

कोमल और रविशंकर की शादी 30 अप्रैल को हुई है.

कोमल और रविशंकर की शादी 30 अप्रैल को हुई है.

Sonbhadra News: पिता का साया 12 वर्ष पहले उठ जाने के बाद से पूनम देवी के बच्चे अपना गर्जियन पीएम मोदी को ही मानते हैं. ऐसे में एक निमंत्रण पत्र प्रधानमंत्री को भी भेजा गया. किसी को उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री आशीर्वाद के रूप में पत्र भेजेंगे.

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सोनभद्र. उत्‍तर प्रदेश के सोनभद्र (Sonbhadra) जनपद के चुर्क के कोल्हुआ निवासी पूनम देवी की बेटी कोमल का विवाह उस वक्त यादगार बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तरफ से नव दंपति को आशीर्वाद का पत्र मिला. कोमल और रविशंकर की शादी 30 अप्रैल को हुई थी. कोमल ने प्रधानमंत्री को शादी में आने का निमंत्रण पत्र भेजा था. हालांकि, कोरोना काल में शादी बड़े सादगी के साथ संपन्न हुआ, लेकिन अब प्रधानमंत्री का पत्र पाकर कोमल काफी खुश है.

दरअसल, शादी में कोमल ने जिद की कि जब हमलोग अपने गार्जियन के रूप में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मानते हैं तो उनको भी शादी का निमंत्रण दिया जाना चाहिए. पिता का साया 12 वर्ष पहले उठ जाने के बाद से पूनम देवी के बच्चे अपना गार्जियन प्रधानमंत्री मोदी को ही मानते है. ऐसे में एक निमंत्रण पत्र प्रधानमंत्री को भी भेजा गया. किसी को उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री आशीर्वाद के रूप में पत्र भेजेंगे. प्रधानमंत्री का आशीर्वाद पाकर कोमल बहुत ही गदगद हैं और कह रही हैं कि उनकी शादी यादगार हो गई.

कोमल के भाई भाजपा कार्यकर्ता

बता दें पति की मौत के बाद पूनम देवी ने कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों की परवरिश की. कोमल का भाई गौरव सिंह भाजपा आईटी सेल में जिला सह-संयोजक है. अपनी बहन की शादी को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण पत्र भेजा था. प्रधानमंत्री शादी में शरीक तो नहीं हो सके लेकिन वहां से पत्र का जबाब आया. प्रधानमंत्री ने नव दंपति को दीर्घ, सुखद एवं सौभाग्यपूर्ण जीवन के लिए शुभकामनाएं दी है.
पीएम का पत्र पाकर खुश हैं दोनों परिवार

प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद न सिर्फ नव दंपति कोमल एवं रविशंकर बल्कि दोनों परिवारों के लोग बेहद खुश हैं. गौरव सिंह का कहना है कि वे भाजपा को अपना परिवार मानता है और परिवार के नाते उन्होंने प्रधानमंत्री को निमंत्रण पत्र भेजा था, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एक छोटे से कार्यकर्ता के लिए प्रधानमंत्री इतना गंभीर हो जाएंगे और उसका जबाब भेजेंगे. वे इस पत्र के लिए बहुत खुश है. साथ ही खुशी इस बात के लिए भी है कि इस खुशी के मौके पर बहन के सिर पर पिता का हाथ नहीं था जो प्रधानमंत्री जी ने पूरा कर दिया.

(रिपोर्ट: रंगेश सिंह)

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