सपा-बसपा में दरार, माया बोलीं- पत्नी डिंपल तक को जीत नहीं दिला पाए अखिलेश

अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं. वह दो बार से कन्नौज से सांसद थीं. उन्हें भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक ने हराया.

News18Hindi
Updated: June 4, 2019, 8:16 AM IST
सपा-बसपा में दरार, माया बोलीं- पत्नी डिंपल तक को जीत नहीं दिला पाए अखिलेश
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Updated: June 4, 2019, 8:16 AM IST
लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजावादी पार्टी का गठबंधन सफल न हो पाने के बाद मायावती ने एक बैठक कीं. इस बैठक में उन्होंने इस आशय के संकेत दिए कि आगामी उप चुनाव उनकी पार्टी अकेले लड़ेगी. एक रिपोर्ट के अनुसार मायावती ने बैठक में कहा कि 'समाजवादी पार्टी के मुखिया अपनी पत्नी डिंपल यादव की जीत तक सुनिश्चित नहीं कर सके.'

23 मई को संपन्न हुए चुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं. वह दो बार से कन्नौज से सांसद थीं. उन्हें भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक ने हराया.

सूत्रों के अनुसार मायावती ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सहयोगी, सपा का यादव वोट बैंक बसपा के पक्ष में स्थानांतरित नहीं होने की दलील देते हुये बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि अब ‘गठबंधनों’ पर निर्भर रहने के बजाय पार्टी का संगठन मजबूत कर बसपा अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा.

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माया का दावा सपा को नहीं मिले यादवों के वोट

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने गठबंधन का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के लिये सपा अध्यक्ष अखिलेख यादव की पारिवारिक कलह को भी प्रमुख वजह मानते हुए कहा कि इस कारण से अखिलेश के पारिवारिक सदस्य भी चुनाव नहीं जीत सके. बसपा अध्यक्ष ने यादवों के वोट सपा के पक्ष में एकजुट नहीं हो पाने को इसकी वजह बताया. गौरतलब है कि कन्नौज में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव और दोनों चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव बदांयू से तथा अक्षय यादव फिरोजाबाद से बीजेपी उम्मीदवारों से चुनाव हार गये.

सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने दावा किया कि डिंपल को बसपा के वोट तो मिले, लेकिन यादवों के वोट ट्रांसफर नहीं हुए.
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बसपा के सूत्रों ने यह जानकारी दी कि मायावती ने अखिलेश यादव की सपा के साथ गठबंधन के भविष्य को लेकर सीधे कोई बातचीत नहीं की और पार्टी कार्यकर्ताओं से महज इतना कहा कि जब तक उनका पारिवारिक विवाद समाप्त नहीं हो जाता ‘देखो एवं प्रतीक्षा करो’ की नीति अपनायी जाए.  एक सूत्र ने कहा, ‘न तो उन्होंने सपा या अखिलेश की आलोचना की और न ही यह कहा कि गठबंधन खत्म हो गया.’
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First published: June 4, 2019, 7:38 AM IST
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