यमुना एक्‍सप्रेसवे बस हादसा: झपकी नहीं यह है एक्सीडेंट की वजह, बस में नहीं थी यह डिवाइस

एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है कि जिस ड्राइवर ने टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाया, टोल कर्मी से बात की और पैसों का लेन-देन किया हो और अगले पांच मिनट बाद उसे झपकी आ जाए.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 12:20 PM IST
यमुना एक्‍सप्रेसवे बस हादसा: झपकी नहीं यह है एक्सीडेंट की वजह, बस में नहीं थी यह डिवाइस
फोटो- पानी में यात्रियों के सामान की तलाश करते राहत दल के सदस्य.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 12:20 PM IST
यमुना एक्सप्रेसवे पर आगरा में एक बड़ा बस हादसा हुआ है. हादसे में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है. 22 लोग घायल हैं. दो गंभीर रूप से घायल अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. पलभर में एक साथ 30 लोगों की मौत ने लोगों को दहला दिया है. हालांकि, घटना के बाद से ही ड्राइवर की झपकी को हादसे का कारण बताया जा रहा है. लेकिन, मौके पर पहुंचे आगरा-लखनऊ के रोडवेज अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं.

लखनऊ से आए एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है कि जिस ड्राइवर ने टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाया, टोल कर्मी से बात की और पैसों का लेन-देन किया हो और अगले पांच मिनट बाद उसे झपकी आ जाए. असल में यह मामला ओवरटेक का है. किसी दूसरी गाड़ी को ओवरटेक करने के चक्कर में यह हादसा हुआ है.

शुरुआती जांच में आए नए तथ्‍य
वहीं दूसरी ओर जानकारों की मानें तो शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस में स्पीड गवर्नर (गति की निगरानी करने वाली डिवाइस) नहीं लगा हुआ था. जब जनरथ बस सेवा शुरु की गई थी तो सभी जनरथ बसों में स्पीड गवर्नर लगाए गए थे, लेकिन जनरथ सेवा की जो बस हादसे का शिकार हुई है, उसमें स्पीड गर्वनर नहीं लगा हुआ था.

फोटो- क्रेन की मदद से हादसे की शिकार बस को निकाला गया.


शुरुआती जांच-पड़ताल में भी स्पीड गवर्नर नहीं मिला है. यूपी रोडवेज में ड्राइवर के पद से रिटायर्ड केपी सिंह बताते हैं, 'जब बस में स्पीड गवर्नर लगा होता है तो उस बस को 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाता है. लेकिन, एक्सप्रेसवे पर चलने वाली बहुत सारी बसों के स्पीड गवर्नर निकाल दिए गए हैं.'

स्पीड गवर्नर होने पर ऐसे रहती है निगाह
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फोटो- जब एक क्रेन की मदद से बस नहीं निकली तो दूसरी क्रेन मंगाई गई.


किसी भी रोडवेज बस में लगा स्पीड गवर्नर जीपीआरएस सिस्टम पर काम करता है. रोडवेज को आईटी सेवाएं देने वाली कंपनी में काम कर चुके आईटी एक्सपर्ट इमरान अली बताते हैं कि सड़क पर बस चला रहा ड्राइवर जब-जब बस की स्पीड 90 से ऊपर ले जाता है तो यह डाटा कंट्रोल रूम में दर्ज हो जाता है. इसकी आनलाइन निगरानी भी होती है. कई मौकों पर ड्राइवर को फोन कर बताया भी जाता है कि आप बस की स्पीड को कम करें.

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First published: July 9, 2019, 11:19 AM IST
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