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ताज के शहर में इस दीवाली गोबर के होंगे लक्ष्मी-गणेश

Himanshu Tripathi | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 23, 2019, 7:14 PM IST
ताज के शहर में इस दीवाली गोबर के होंगे लक्ष्मी-गणेश
जीरे वाली गोबर निर्मित लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं अपनी खूबियों की वजह से लोगों को पसंद आ रही हैं.

पर्यावरण (environment) बचाने का यह कारगर तरीका है, जिसमें भक्ति के साथ-साथ पानी को दूषित होने से बचाया जा सकेगा.

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आगरा (Agra): ताज के शहर (City of Taj) आगरा (Agra) में इस बार दीवाली (Diwali) बार गोबर के लक्ष्मी-गणेश (Laxmi Ganesh) का पूजन होगा. गाय (Cow) के गोबर से निर्मित गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाएं (idols) लोगों को खूब भा रही हैं. पीएम मोदी के पर्यावरण जागरूकता अभियान को आत्मसात कर लोग पीओपी से बनी प्रतिमाओं से दूरी बनाकर गोबर की प्रतिमाएं पूजन को ले जा रहे हैं. वहीं, इस बार हवन के लिए लकड़ी भी गोबर से बनाई गयी है.

ताज के शहर में पर्यावरण (environment) को लेकर एनजीटी सख्त है. यमुना का पानी (Water of Yamuna) प्रदूषण से जहरीला हो चुका है. ऐसे में सबसे पहले यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगी है. विसर्जन के लिए अलग कुंड बनाए गए हैं. बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए शहर की सामाजिक संस्थाओं ने अच्छी पहल की है. शहर में राजपुर चुंगी, रामलाल वृद्धाश्रम सहित कई स्थानों पर गोबर की लकड़ी बनाने का कार्य शुरू हुआ है. अब जब दीपावली का त्योहार आया तो गोबर निर्मित प्रतिमाओं की सोच को मूर्त रूप दिया गया.

बाल्टी के पानी में घुलकर ये गोबर प्रतिमाएं खाद बन जाएंगी. These dung idols will become manure by dissolving in bucket water.
बाल्टी के पानी में घुलकर ये गोबर प्रतिमाएं खाद बन जाएंगी.


इस पहल की शुरुआत राजपुर चुंगी क्षेत्र में गोसेवकों ने की है. गोशाला में बनी लक्षमी गणेश की प्रतिमाएं अत्यंत खूबसूरती के साथ ही पूरी तरह से उपयोगी हैं. शहर के संजय प्लेस, कमलानगर में गोबर से निर्मत गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाएं खूब पसंद की जा रही हैं. संजय प्लेस में सत्यमेव जयते सामाजिक संस्था के कार्यालय में गोबर निर्मित गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा सजी हैं. संचालक राम अग्रवाल बताते हैं कि इस शहर में पहली बार गोबर की प्रतिमाएं बनाने का प्रयोग किया गया जो सफल रहा.

गोबर वाले घोल को लोग अपने घरों के गमले में डाल सकेंगे. People will be able to put cow dung in the pot of their homes.
गोबर वाले घोल को लोग अपने घरों के गमले में डाल सकेंगे.


उन्‍होंने बताया कि अब अगले साल इसे अन्य शहरों में पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. राम के अनुसार पर्यावरण बचाने का यह कारगर तरीका है, जिसमें भक्ति के साथ-साथ पानी को दूषित होने से बचाया जा सकेगा. एक साल बाद जब प्रतिमाओं का विसर्जन होगा तो यह गोबर वाली प्रतिमाएं पानी में घुल जाएंगी. बाल्टी के पानी में घुलकर ये गोबर प्रतिमाएं खाद बन जाएंगी. इस गोबर वाले घोल को लोग अपने घरों के गमले में डाल सकेंगे.

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First published: October 23, 2019, 6:26 PM IST
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