ये फॉदर कांवेंट स्कूल में सजा के रूप में बच्चों से कराते हैं योग

स्कूल में आने वाले मोटे और अक्सर बीमार रहने वाले बच्चों को लेकर फॉदर जॉन फॉदर हमेशा परेशान रहते थे. असेंबली में बच्चे ऊंघते थे. तब फॉदर ने स्कूल में 40 मिनट की असेंबली में 30 मिनट के लिए योग को अनिवार्य कर दिया.

News18Hindi
Updated: June 21, 2019, 10:55 AM IST
ये फॉदर कांवेंट स्कूल में सजा के रूप में बच्चों से कराते हैं योग
योग करवाते फॉदर जॉन फरेरा
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Updated: June 21, 2019, 10:55 AM IST
कई मिशनरी कांवेंट स्कूल में फॉदर प्रिंसीपल रहे हैं. लेकिन स्कूल में आने वाले मोटे और अक्सर बीमार रहने वाले बच्चों को लेकर फॉदर जॉन फरेरा हमेशा परेशान रहते थे. स्कूल की असेंबली में बच्चे ऊंघते रहते थे. तब फॉदर को एक आइडिया आया. फॉदर ने 40 मिनट की असेंबली को 10 मिनट का कर दिया. लेकिन अगले 30 मिनट असेंबली में ही शामिल करते हुए हर बच्चे के लिए योग अनिवार्य कर दिया.

इतना ही नहीं फॉदर ने टीचरों से भी कहा कि जब कोई बच्चा शैतानी करे और आप उसे सजा दें तो उस बच्चे से सजा के तौर पर योगा का कोई भी एक आसन कराएं. इसके बाद तो लम्बे-चौड़े स्कूल में जगह-जगह योग के बारे में स्लोगन लिखे हुए दिखाई देने लगे.

फॉदर ने स्कूल के गेट के पास एक योगा गैलरी बनवा दी. शाम के वक्त स्कूल के एक हॉल में योग की क्लास लगने लगी और कोई भी शहरी योग करने आ सकता था. आज फॉदर ने आगरा में अपना योग आश्रम बनाया हुआ है.

फाइल फोटो- आश्रम में योग कराते फॉदर जॉन फरेरा.


अब आगरा ही नहीं देश के दूसरे राज्यों में जाकर भी स्कूल-कॉलेज और जेल में योग सिखाते हैं. फॉदर अब योग गुरु के नाम से जाने जाते हैं. पिछले 37 साल से फॉदर लगातार योग कर रहे हैं. खुद योग से फायदा लेने के बाद अब फॉदर 30 साल से दूसरे लोगों को भी योग सिखाने का काम कर रहे हैं.

बीमारी और चश्मे की आदत ने पहुंचाया योग की शरण में

फॉदर बताते हैं कि 1979 में इलाहबाद में वो पादरी बनने का कोर्स कर रहे थे. इसी दौरान वह कोलाइटिस, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हो गए. कोलाइटिस के चलते ठीक से खा भी नहीं पाते थे. जो खाते थे वो बाहर आ जाता था. इतना ही नहीं आंखों पर 7.5 का चश्मा भी पहनते थे. कई बार चश्मा टूटकर गिर जाता था या फिर अक्सर रखकर भूल जाते थे.
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फाइल फोटो- योग करते हुए फॉदर जांन फरेरा.


इसी दौरान उन्होंने योगा के बारे में पढ़ा. फिर पहुंच गए योगा स्कूल ऑफ बिहार, मुंगेर के शिक्षक सदानंद सरस्वती के पास. फॉदर का कहना है कि 6-7 साल लगातार योग करते रहने से उनकी बीमारियां दूर हो गईं. आंखों का चश्मा भी हट गया.

कांवेंट स्कूल की कैंटीन में बिकने लगी लस्सी और मट्ठा

पादरी का कोर्स करने के बाद फॉदर आगरा आ गए. यहां उन्हें 170 साल पुराने सेंट पीटर्स कॉलेज का प्रिंसीपल बनाया गया. स्कूल में आते ही फॉदर ने कैंटीन से जंक फूड हटवा दिया. उसकी जगह लस्सी, मट्ठा और फल बिकवाने शुरु कर दिए. बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक और पेस्ट्री बेचने पर पाबंदी लगा दी गई.

फाइल फोटो- आगरा में बना फॉदर का योग आश्रम.


इस तरह स्कूल में शुरू हुआ मिशन योगा

स्कूल के बच्चों के बीच में योग को बढ़ावा देने के लिए फादर ने मिशन योगा शुरू कर दिया. स्कूल के गेट की दीवार पर योगा के 61 आसन वाले स्टेच्यू बनवाए गए. हर स्टेच्यू के नीचे ये भी लिखवाया गया कि किस आसन से क्या फायदा होगा. हर साल स्कूल से जारी होने वाले कैलेंडर को योगा कैलेंडर में बदल दिया गया.

कैलेंडर में योग मुद्राओं के साथ-साथ ये भी बताया गया कि कौन सा फल खाने से क्या-क्या फायदे होंगे. स्कूल कैम्पस में जगह-जगह योग की मुद्रा वाली तस्वीरे लगाई गईं, जिससे चलते-फिरते बच्चों की निगाह तस्वीर पर जाए और वो योग के बारे में जानने को इचछुक हों.

फाइल फोटो- योग गुरु के नाम से मशहूर हुए फॉदर जॉन फरेरा.


फॉदर 3 इंस्टीट्यूट से ले चुके हैं योग की शिक्षा

फादर जॉन फॉदर 1986 में मुंगेर स्थित योगा स्कूल ऑफ बिहार, 1987 में स्वामी शिवानंदा इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश और 2008 में स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु से योगा की शिक्षा ले चुके हैं. वह बताते हैं कि योगा को और नजदीक से जानने के लिए वह स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट, बैंग्लोर आते रहते हैं.

नई पीढ़ी को इस तरह से सौंप रहे हैं योग

फॉदर का कहना है कि नई पीढ़ी भी योगा करे और उसे दूसरों तक पहुंचाए. इसके लिए फॉदर आगरा के सेंट लॉरेंस सेमीनरी (गुरुकुल) में उन 20 बच्चों को रोज सुबह एक से डेढ़ घंटे तक योगा कराते हैं, जो पादरी बनने का कोर्स कर रहे हैं. इसके साथ ही फॉदर सेंट कॉनरेड स्कूल में भी योगा कराने जाते हैं. जिस चर्च में फॉदर पादरी हैं वहां भी शाम को योगा क्लास लगती है.

फाइल फोटो- फॉदर के आश्रम की ओपीडी में लगा ये बैनर.


आगरा के विभिन्न स्कूल के 12 टीचर्स को बेंगलुरु ले जाकर योगा की ट्रेनिंग दिलवा चुके हैं. आगरा में ही फॉदर एक योगा आश्रम भी चलाते हैं. ये आश्रम रेजीडेंशियल और ओपीडी के रूप में चलता है. फादर का कहना है कि यहां 3 एसी रूम हैं तो 3 कॉमन रूम हैं. वहीं ओपीडी में रोजाना 7 से 8 लोग आते हैं. यहां आने वाले किसी न किसी बीमारी की चपेट में होते हैं. इसके अलावा फॉदर आगरा की सेंट्रल जेल में कैदियों को भी योग कराने जाते हैं.

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First published: June 21, 2019, 9:11 AM IST
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