सुल्तानपुरः दिव्यांगों के लिए मिसाल बन चुकी हैं एक पैर से लाचार रिशा वर्मा

राजीव गांधी राष्ट्रीय सदभावना पुरस्कार, मलाला पुरस्कार से नवाजा जा चुकी रिशा वर्मा के अथक परिश्रमों और प्रयासों का ही परिणाम है कि सूबे के सीएम योगी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं.


Updated: May 10, 2018, 1:28 PM IST

Updated: May 10, 2018, 1:28 PM IST
सुल्तानपुर जिले में एक मिसाल बनकर उभरी समाजसेवी रिशा वर्मा एक नामचीन चेहरा बन चुकी है. एक पैर से लाचार और ससुराल से मिली उपेक्षा के बावजूद रिशा दिव्यांगों के लिए काम करती हैं. पिछले दो दशकों से दिव्यांग बच्चों को लिखना और लिखना सिखाती आ रहीं रिशा दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनने के गुर भी सिखाती हैं. राजीव गांधी राष्ट्रीय सदभावना पुरस्कार, मलाला पुरस्कार से नवाजा जा चुकी रिशा वर्मा के अथक परिश्रमों और प्रयासों का ही परिणाम है कि सूबे के सीएम योगी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं.

लम्भुआ थाना क्षेत्र के कुर्मियाने रामपुर में शीतला प्रसाद वर्मा के घर जन्मीं रिशा वर्मा जब डेढ़ साल की थीं तभी निमोनिया के इलाज के दौरान उनका दाहिना पैर बेकार हो गया. कानपुर में एक मिल में नौकरी करने वाले पिता ने रिशा के इलाज के लिए काफी जद्दोजहद की, लेकिन रिशा का पैर ठीक नहीं हुआ, लेकिन रिशा ने अपनी अपंगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी. ड्राइंग से परास्नातक रिशा आज अपने ही जैसे ही दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए करती हैं.

वर्ष 1986 में शादी के बंधन में बंधी रिशा वर्मा को ससुराल में भी उपेक्षा का शिकार होना पड़ा. यही कारण था कि रिशा ने वर्ष 1989 में ससुराल छोड़कर दिव्यांगों की सेवा में जुट गईं. रिशा की समाजसेवी में  दिलचस्पी देखकर ग्रामीणों ने वर्ष 1995 में रिशा को अपना ग्राम प्रधान चुन लिया.

रिशा ने पांच वर्षो की प्रधानी के कार्यकाल में गांववालों को भी निराश नहीं होने दिया और गांव के विकास के लिए अनेक काम करवाए. ग्राम प्रधानी की जिम्मेदारी संभालते हुए रिशा को जब एक दिन एहसास हुआ कि दिव्यांग बच्चों की सेवा करने का उनका सपना टूट रहा है, तो उन्होंने सबकुछ पीछे छोड़कर वो एक बार फिर दिव्यांगों की सेवा में जुट गईं.

सुल्तानपुर जिले में नवचेतना नामक एक संस्था चला रही रिशा वर्मा दिव्यांग बच्चों को ड्राइंग सिखाती हैं. जिले के बढ़ैयावीर इलाके स्थित नवचेतना संस्थान से शुरू हुआ रिशा का सफर आगे  बढ़ा और रिशा ने संस्था एक और सेंटर भादर ब्लाक में शुरू किया है. दिव्यांग बच्चों के लिए रिशा वर्मा के समर्पण और प्रयास को देखते हुए वर्ष 2008 में उन्हें राज्यस्तरीय राजीव गांधी एवार्ड से नवाजा गया.

वहीं, वर्ष 2009 में रिशा को राजीव गांधी राष्ट्रीय सदभावना पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. उन्हें अभी पिछले वर्ष ही उन्हें मलाला पुरस्कार मिला है. दिव्याग बच्चों के प्रति रिशा वर्मा के उत्कृष्ट कार्य से सूबे के मुख्यमंत्री योगी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके और उन्हें अपने हाथों से सम्मानित किया.

गौरतलब है रिशा वर्मा अब तक सैकड़ों दिव्यांग बच्चों की जिन्दगियां बदल चुकी हैं और दिव्यांग बच्चों की सेवा को अपनी जिन्दगी का हिस्सा मान लिया है. बताया जाता है दूबेपुर ब्लाक के पास किराए के मकान में रहने वाली रिशा की दिनचर्या सुबह दिव्यागों के साथ शुरू होकर बच्चों के सो जाने पर ही समाप्त होती है.
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