कुशीनगर हदासे के बाद भी नहीं सुधरे लोग, जान पर खेल कर रहे हैं फाटक पार

क्रासिंग के दोनों ओर बसने वाले लोगों की मजबूरी है कि इस क्रासिंग को पार किए बगैर उनके काम नहीं हो सकते.


Updated: April 26, 2018, 10:13 PM IST

Updated: April 26, 2018, 10:13 PM IST
मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बावजूद न तो आम लोगों इससे कुछ सबक लिया है और न ही रेलवे प्रशासन ने. यूपी के सुलतानपुर में ऐसी दर्जनों क्रासिंग के रियलिटी चेक में यह उजागर हुआ. ट्रेंन आ रही थी और लोग जानपर खेल कर फाटर पार कर रहे थे.

न्यूज18 की पड़ताल में लखनऊ-वाराणसी रेल मार्ग पर उतरठिया से जफराबाद तक 47 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं. तो वहीं इलाहाबाद-फैजाबाद रेलखंड पर पीपरपुर से भरतकुंड तक 4 मानवरहित क्रासिंग हैं, लेकिन इनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं. सहाबागंज , इस्लामगंज ,अलीगंज, बंधुआकला ,बेदूपारा ,आनापुर समेत तमाम मानव रहित रेलवे क्रासिंग से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं, स्कूली बच्चों का आना जाना होता है. साल 2013 और फिर उसके बाद 2014 में बेदूपारा में दो बड़ी दुर्घटनाएं भी हुईं जिनमें दर्जन भर मौतें हुईं.

इन घटनाओं को देख रेलवे प्रशासन ने कुछ गंभीरता दिखाई और कई क्रासिंग्स पर अंडर पास बनावाया लेकिन लोग अभी भी खतरा उठाने को मजबूर हैं. क्रासिंग के दोनों ओर बसने वाले लोगों की मजबूरी है कि इस क्रासिंग को पार किए बगैर उनके काम नहीं हो सकते. खतरा उठाना इनकी मजबूरी है. कुछ समय पहले रेलवे प्रशासन ने इन क्रासिंग पर होमगार्ड्स लगाए जाने के निर्देश दिए थे लेकिन कहीं पर भी ऐसा कुछ नहीं दिखा.

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