VIDEO: यह शख्स पशु-पक्षियों की हूबहू आवाज निकालने में है माहिर

सुल्तानपुर जिले के राजेंद्र प्रसाद दीक्षित अपने कंठ से सारस, कौआ, बंदर, बिल्ली सहित कई पशु-पक्षियों की आवाज हूबहू निकालकर लोगों को हैरत में डाल देते हैं. राजेंद्र अपने हुनर का लोहा जिले से लेकर मंडल स्तर तक मनवा चुके हैं

Alim sheikh | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 22, 2018, 11:28 AM IST
Alim sheikh | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 22, 2018, 11:28 AM IST
वैसे तो देश में अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान जैसे बॉलीवुड कलाकारों की आवाज की नकल करने वालों की संख्या बहुत है, लेकिन चंद ही ऐसे लोग होंगे जो पशु-पक्षियों की 'मिमिक्री' कर पाते है. यूपी के सुल्तानपुर जिले के राजेंद्र प्रसाद दीक्षित उनमें से एक हैं, जो अपने कंठ से सारस, कौआ, बंदर, बिल्ली सहित कई पशु-पक्षियों की आवाज हूबहू निकालकर लोगों को हैरत में डाल देते हैं. राजेंद्र अपने हुनर का लोहा जिले से लेकर मंडल स्तर तक मनवा चुके हैं.

जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पूरे बंशा गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद दीक्षित बचपन से ही पशु-पक्षियों को देखकर उनकी नकल किया करते थे. उम्र के साथ नकल उनका शौक बन गया. कुछ साल सरकारी नौकरी की, लेकिन शादी के बाद परिवार के गुजारे के लिए राजेंद्र खेती-बाड़ी का काम करते हैं.

वर्ष 2005 में राजेंद्र की ड्यूटी तहसील कार्यालय में सीजनल संग्रह धावक के पद पर हो गई. तत्कालीन सीडीओ को जब राजेंद्र के हुनर के बारे में पता चला तो उन्होंने बुलाकर अपनी कला प्रदर्शित करने को कहा. राजेंद्र ने जब हुनर दिखाया तो सीडीओ दंग रह गए. वह उन्हें कलाकार राजेंद्र कहने लगे. ड्यूटी के दौरान सभी लोग राजेंद्र को कलाकार कहकर ही बुलाते थे.

राजेंद्र प्रसाद दीक्षित बताते है कि वर्ष 2006 में फैजाबाद मंडल में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और अपनी आवाज के जादू से लोगों को अचंभित कर दिया. दर्जनों जगहों पर इनाम व ट्रॉफियां मिलने के बाद आज उनकी जिंदगी ही बदल गई है.

वह बताते हैं कि जब वह मंच पर पशुओं और पक्षियों की मिमिक्री करते हैं तो उस वक्त सुध-बुध खो बैठते हैं. उन्हें सिर्फ दर्शकों को तालियां सुनाई पड़ती हैं. एक बार तो राजेंद्र को बतौर इनाम एक साइकिल मिली थी. राजेंद्र का कहना है कि यदि मौका मिला तो वह इस कला को पूरे देश में फैलाएंगे, जो सीखना चाहेगा उसे सिखाएंगे. इस ग्रामीण कलाकार को हमेशा अच्छा अवसर और उचित मंच की तलाश रहती है.
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